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गुरुवार, 26 नवंबर 2009

लि‍ब्रहान कमीशन के सबक





बाबरी मस्‍जि‍द वि‍ध्‍वंस की जांच कर रहे लि‍ब्रहान कमीशन की रि‍पोर्ट संसद में रखे जाने के बाद यह साफ हो गया है कि‍ इसमें कि‍सकी भूमि‍का थी। वैसे सारा देश जानता था कि‍ बाबरी मस्‍जि‍द वि‍ध्‍वंस में कि‍सकी भूमि‍का थी। समस्‍या यह थी कि‍ इस तरह की वि‍कट साम्‍प्रदायि‍क समस्‍या से भवि‍ष्‍य में कैसे लड़ें। केन्‍द्र सरकार ने इस रि‍पोर्ट के संदर्भ में जो कार्रवाई हेतु सि‍फारि‍शें दी हैं। वे गौरतलब हैं। ये सि‍फारि‍शें इसी कमीशन की रि‍पोर्ट से नि‍कली हैं। अनेक ऐसी भी सि‍फारि‍शें हैं जि‍न्‍हें केन्‍द्र सरकार ने अभी अपनी कार्रवाई रि‍पोर्ट में शामि‍ल नहीं कि‍या है।
     बाबरी मस्‍जि‍द वि‍ध्‍वंस की तैयारि‍यां सि‍र्फ एक मस्‍जि‍द  गि‍राने की तैयारि‍यों तक सीमि‍त नहीं थीं, इनका दीर्घकालि‍क राजनीति‍क लक्ष्‍य था। दीर्घकालि‍क लक्ष्‍य था साम्‍प्रदायि‍क आधार पर भारत का स्‍थायी वि‍भाजन करना। बहुराष्‍ट्रीय कंपनि‍यां, कारपोरेट घराने और अमरीकी प्रशासन यही चाहता था। यही वजह है कि‍ बड़े पैमाने पर अमेरि‍की बहुराष्‍ट्रीय कंपनि‍यों से संघ परि‍वार के संगठनों को व्‍यापक फंड भी मि‍लता रहा है।
      बाबरी मस्‍जि‍द वि‍ध्‍वंस की योजना का पहला सबक है कि‍ ऐसी कि‍सी भी राजनीति‍क कार्रवाई,कार्यक्रम और आन्‍दोलन को सक्रि‍य होने से रोका जाए जो देश का सामाजि‍क,राजनीति‍क वि‍भाजन करने वाला हो। देश की एकता के सामने समस्‍त राजनीति‍क लक्ष्‍य बौने हैं,अप्रासंगि‍क हैं।
लि‍ब्रहान कमीशन का दूसरा बड़ा सबक यह है कि‍ मीडि‍या और नौकरशाही को साम्‍प्रदायि‍क प्रचार अभि‍यान और हि‍तसाधन का अस्‍त्र न बनने दि‍या जाए। संघ परि‍वार अपने साम्‍प्रदायि‍क लक्ष्‍य में इसलि‍ए सफल होता रहा हे क्‍योंकि‍ मीडि‍या और नौकरशाही का उसे व्‍यापक पैमाने पर अंध समर्थन मि‍लता रहा है। संघ अपने प्रचार अभि‍यान के लि‍ए मीडि‍या का सबसे ज्‍यादा दुरूपयोग करता रहा है। मीडि‍या की अपनी प्रकृति‍ में नि‍हि‍त साम्‍प्रदायि‍क तत्‍वों,वि‍चारधारा और कार्यशैली से कैसे  लड़ा जाए ,इसके लि‍ए कि‍स तरह के संरचनात्‍मक परि‍वर्तन कि‍ए जाएं इनका अभी तक केन्‍द्र सरकार ने खुलासा नहीं कि‍या है।
साम्‍प्रदायि‍कता की समस्‍या अभी कि‍सी संगठन वि‍शेष की समस्‍या नहीं रह गयी है बल्‍कि‍ इसने व्‍यापक शक्‍ल अख्‍ति‍यार कर ली है। इसने मीडि‍या,नौकरशाही और राजनीति‍क दलों में स्‍थायी स्‍थान बना लि‍या है। साम्‍प्रदायि‍कता को अब आप संघ परि‍वार की समस्‍या कहकर हाथ नहीं छाड़ सकते।
      संघ परि‍वार साम्‍प्रदायि‍कता का गोमुख है लेकि‍न आज इससे समूची राजनीति‍क संरचना और संचार माध्‍यमों के बड़े हि‍स्‍से को अपनी वि‍चारधारा के घेरे में ले लि‍या है। इस समस्‍या के प्रति‍ तदर्थ उपाय इससे मुक्‍ति‍ नहीं दि‍लाते। केन्‍द्र सरकार ने कार्रवाई रि‍पोर्ट में जो प्रस्‍ताव दि‍ए हैं वे आधे अधूरे हैं और इस समस्‍या के प्रति‍ केन्‍द्र के तदर्थ रवैयये को व्‍यक्‍त करते हैं1 केन्‍द्र सरकार का खासकर कांग्रेस पार्टी का साम्‍प्रदायि‍कता के साथ नरम-गरम का रि‍श्‍ता रहा है। साम्‍प्रदायि‍कता के खि‍लाफ वि‍चारधारात्‍मक,संरचनात्‍मक परि‍वर्तनों को कांग्रेस ने कभी प्रमुख एजेण्‍डा नहीं बनने दि‍या।
  

मंगलवार, 24 नवंबर 2009

लि‍ब्रहान कमीशन : भूलो और माफ करो


बाबरी मस्‍जि‍द का गि‍राया जाना। उसमें संघ और उससे जुड़े संगठनों की घृणि‍त भूमि‍का के घाव अभी भरे नहीं थे कि‍ इन घावों को हरा करते हुए लि‍ब्रहान कमीशन की रि‍पोर्ट को कल इण्‍डि‍यन एक्‍सप्रेस अखबार ने 'लीक' कर दि‍या। हम वि‍गत 25 सालों से राममंदि‍र का राजनीति‍क नरक भोग रहे हैं। देश में इस मसले पर जि‍तने बड़े पैमाने पर जानोमाल की क्षति‍ हुई है वैसी कि‍सी अन्‍य मसले पर नहीं हुई है। यह मसला जब तक रहेगा तब तक खूंरेजी,दंगे,लूट,आगजनी आदि‍ होते रहेंगे। अब फि‍र से लि‍ब्रहान कमीशन की रि‍पोर्ट के संसद में पेश कि‍ए जाने के बाद से सारा साम्‍प्रदायि‍क वातावरण गरमाने की कोशि‍श की जा रही है।
    लि‍ब्रहान कमीशन ने अपनी रि‍पोर्ट में जि‍न्‍हें दोषी पाया है उनके खि‍लाफ कि‍सी तरह की कार्रवाई करने की सि‍फारि‍श नहीं की है। ठीक उसी तर्ज पर भारत सरकार ने भी कार्रवाई रि‍पोर्ट पेश में दोषि‍यों के खि‍लाफ कोई कार्रवाई करने का संकेत नहीं दि‍या है। यहां तक चीजें बेहद साफ हैं। लि‍ब्रहान कमीशन ने जि‍न्‍हें दोषी पाया उनको रेखांकि‍त कर दि‍या है। समस्‍या यह है कि‍ अब क्या करें।
बाबरी मस्‍जि‍द वि‍ध्‍वंस साधारण घटना नहीं है। यह अक्षम्‍य अपराध है। राष्‍ट्रीय कलंक है। इसके बावजूद इस समूचे प्रकरण पर समग्रता में राष्‍ट्रीय नजरि‍ऐ से सोचने की जरूरत है। देश के सौहार्दपूर्ण तानेबाने को बनाए रखकर दीर्घकालि‍क परि‍प्रेक्ष्‍य में सोचने की जरूरत है। अल्‍पकालि‍क राजनीति‍क परि‍प्रेक्ष्‍य में यही बात मन में आती है कि‍ दोषि‍यों के खि‍लाफ कार्रवाई होनी चाहि‍ए। दीर्घकालि‍क परि‍प्रेक्ष्‍य में हमारी सरकार को 'भूलो और माफ करो' की नीति‍ के आधार पर इस रि‍पोर्ट को अब अलमारी में बंद करके रख देना चाहि‍ए। लि‍ब्रहान कमीशन की रि‍पोर्ट पर यदि‍ कार्रवाई होती है तो इसके गंभीर परि‍णाम हो सकते हैं। यह कयास नहीं है बल्‍कि‍ ठोस संभावना है। जो लोग बाबरी मस्‍जि‍द के मसले पर आहत हैं उन्‍हें भी समझना होगा कि‍ स्‍थायी सामाजि‍क और साम्‍प्रदायि‍क वि‍भाजन रखकर हम देश को एकजुट नहीं रख सकते। अनेकबार राष्‍ट्रीय हि‍तों को, जनता के जीवन की सुरक्षा और शांति‍ के लक्ष्‍य को सर्वोपरि‍ स्‍थान देकर सोचना होता है। लि‍ब्रहान कमीशन की रि‍पोर्ट एक ऐसा ही मसला है जि‍स पर पार्टीजान तरीके से अथवा कानूनी नजरि‍ए से सोचेंगे तो भयावह परि‍स्‍थि‍ति‍यों से दो-चार होना पड़ेगा। हमें इस संदर्भ में दक्षि‍ण अफ्रीका के राजनीति‍क दलों से सीखना चाहि‍ए वहां पर गोरे लोगों के भयानक और अक्षम्‍य अपराधों को भी 'भूलो और माफ करो' की नीति‍ के आधार पर क्षमा कर दि‍या गया। हमें भी यही कदम उठाना चाहि‍ए। हमारे यहां लि‍ब्रहान कमीशन ने दोषि‍यों को रेखांकि‍त कर दि‍या है। आगे क्‍या करें इस पर कमीशन और सरकार चुप हैं। यह इन दोनों की राजनीति‍क परि‍पक्‍वता का परि‍चायक है। इसे राजनीति‍क कमजोरी नहीं समझना चाहि‍ए। हमें लि‍ब्रहान कमीशन की रि‍पोर्ट को मानकर ,भूल जाना चाहि‍ए। यही हमारे देश का मंगलमय रास्‍ता होगा। यही हमें आगे वि‍कास करने का अवसर देगा।   

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