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लेखक और प्रतिवाद का हक

देश में पीएम राजनीति कर सकता है, मोहन भागवत राजनीति कर सकते हैं, जाहिल बटुक भी राजनीति कर सकते हैं, विपक्षीदल भी राजनीति कर सकते हैं, लेकिन लेखक राजनीति न करे! क्यों जी, लेखक राजनीति क्यों न करे? किस अधिकार से उसे राजनीति करने से रोक रहे हैं आप! लेखक सत्ता का गुलाम कभी नहीं रहा , जो सत्ता के गुलाम थे वे आज भी सत्ता की गुलामी कर रहे हैं और लेखकों के द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए जाने पर सवाल खडे कर रहे हैं, इनमें वे भी हैं जो कल उस सत्ता का मुखौटा लगाए हुए थे आज वे मोदी का मुखौटा लगाए हुए हैं।     लेखक का राजनीति करना, राजनीतिक मसलों पर स्टैंड लेना, सत्ता और साम्प्रदायिक ताकतों के हिंसक गठजोड. का विरोध करना सही दिशा में उठाया गया कदम है। कुछ लोग कह रहे हैं यहसेक्युलर लेखकों का फ्रस्टेशन है तो कुछ लोग कह रहे हैं कि यह प्रचार की भूख के लिए उठाया गया कदम है। साम्प्रदायिक हिंसा और उसे संघ के खुले समर्थन ने सारे संघर्ष को राजनीतिक बना दिया है। लेखकों परहमला करने वाले जब राजनीतिज्ञ हों तो यह कैसे संभव है कि लेखक चुप रहे, मूकदर्शक बना रहे!   लेखकों ने हिंसा शुरु नहीं की , लेखकों पर हमले,…

लोकतंत्र पर हमला है मुस्लिम विद्वेष

मुसलमान की नई पहचान बन रही है,इस नई पहचान पर बातें होनी चाहिए। एक जमाना था भारत में बहुत कम संख्या में मुस्लिम मध्यवर्ग था,लेकिन आजादी के बाद स्थितियां बदली हैं,तमाम किस्म की बदहाली और गरीबी के बावजूद मुसलमानों में मध्यवर्ग का उदय एक बड़ी घटना है और यह हम सबके लिए खुशी की बात भी है। मध्यवर्गीय मुसलमानों को देखकर यह निष्कर्ष न निकालें कि मुसलमानों में गरीब मुसलमान नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है नवोदित मुस्लिम मुसलमान मध्यवर्ग पर हमें बातें करनी चाहिए। हाल ही अखलाक की हत्या और उसके बाद के दौर में मुसलमानों की प्रतिक्रिया देखकर यह बात कही जा सकती है कि मुसलमानों में जो मध्यवर्ग उभरकर सामने आया है वह इस तरह के हमलों से दुखी है,गुस्से में है ,लेकिन वह किसी भी किस्म के उन्माद में बहना नहीं चाहता।

मैं फेसबुक पर आए दिन मुस्लिम मित्रों की प्रतिक्रियाएं पढ़ता हूँ उनमें संजीदगी रहती है। जबकि यह सच है कि मध्यवर्गीय मुसलमान को तोड़ने की सुनियोजित साजिशें चल रही हैं। गुजरात के दंगों में जो कुछ हुआ उससे मध्यवर्गीय मुसलमान को आर्थिक तौर पर पूरी तरह तोड़कर रख दिया गया। लेकिन यही मध्यवर्गीय मुसलमान…