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पेंग्विन के 75 साल और ई-बुक की चुनौतियां

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पेंग्विन प्रकाशन के 75 साल हो गए हैं। यह अपने आपमें बड़ी घटना है। पेंग्विन ने इन 75 सालों में पुस्तक की दुनिया में मूलगामी परिवर्तनों को जन्म दिया है। एक जमाना था किताब मंहगी आती थी, पहलीबार पेंग्विन ने छह पेंस में ब्रिटेन में पेपरबैक निकाला था ,उस समय इतने पैसे में एक सिगरेट आती थी । उसके बाद पेपरबैक पुस्तक की आंधी ने अज्ञान के दरवाजों पर जिस गति से दस्तक दी है उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। पेंग्विन ने पढ़ने और किताब खरीदने के रवैय्ये में बुनियादी बदलाव पैदा किया। पेंग्विन ने पन्द्रह हजार से ज्यादा टाइटिल छापे हैं और एक लाख से ज्यादा संस्करण प्रकाशित किए है।      अब पुस्तक की दुनिया नए संचार संसार में दाखिल हो गयी है। यह ई-बुक का युग है। पेंग्विन के सामने ई-बुक का बड़ा उदीयमान बाजार है जिसको अभी सस्ता होना है। ई-बुक को सस्ता बनाने में पेंग्विन जैसे प्रकाशन की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। अभी ई-बुक के बाजार में पेंग्विन की हिस्सेदारी मात्र एक प्रतिशत है। अमेरिका और दुनिया के दूसरे शहरों में छह प्रतिशत डिजिटल बुक के ग्राहक है।      पेंग्विन ने 75 वर्ष पूरे होने पर आईपेड के लिए डिजिटल…

संस्कृत ,उर्दू और हिन्दी काव्य के तुलनात्मक अध्ययन की समस्याएं-4-समापन किश्त

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तुलनात्मक साहित्य के क्षेत्र में अध्ययन की कई पद्धतियां प्रचलन में हैं। फ्रांसीसी तुलनाशास्त्री ‘प्रभाव’के अध्ययन पर जोर देते हैं। रेने वैलेक ने ‘कारण-प्रभाव’ को महत्ता दी है। हंगरी के तुलनाशास्त्री ‘स्रोत’ और ‘मौलिकता’ को महत्वपूर्ण मानते हैं। इस प्रक्रिया में उन्होंने राष्ट्रीय चरित्रों की पहचान स्थापित की है।      उल्लेखनीय है कि ‘प्रभाव’ का ‘ग्रहण’ के साथ संबंध है। फलतः ग्रहणकर्ता मूल्यांकन के केन्द्र में रहेगा। वेन तेघम और अन्य विचारकों ने ‘ग्रहण’ के सिद्धांत के अनुरूप ही अपने तुलनात्मक नजरिए का विकास किया।      साहित्य संप्रेषण और ग्रहण के सवालों पर सामयिक तुलनाशास्त्री विभिन्न दृष्टियों से विचार करते रहे हैं। हंगरी के तुलनाशास्त्रियों ने ‘स्रोत’ और ‘मौलिकता’ पर जब जोर दिया था तो उस समय हंगरी में 19वीं शताब्दी का समय था और संस्थानों के निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी।     तुलनात्मक साहित्य के मूल्यांकन और सिद्धान्त की किताबों को गौर से देखें तो पाएंगे कि कुछ महत्वपूर्ण पदबंधों का प्रयोग मिलता है। जैसे, फार्चून,डिफ्यूजन,रेडिएशन आदि इन पदबंधों का पाठक पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर…

नेट के कल्पनाजगत में बदलते हम

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नेटकावर्चुअलजगतयूटोपियाकेलिएआदर्शजगतहै।यूटोपियामेंजीनेवालोंकेलिएइससेसुंदरजगहकहींनहींहै।इसीलिएकुछलोगइसेन्यूटोपिया