मंगलवार, 6 जुलाई 2010

क्यूबा में भ्रष्टाचार: वास्तविक प्रतिक्रांति ?


        ( इस्तेबान मोरलेस को हाल ही में क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया, इस्तेवान क्यूबा के महत्वपूर्ण बुद्धिजीवी-इतिहासकार हैं,साथ ही अमेरिकी विदेशनीति के बारे में क्यूबा में गंभीर अध्येताओं में गिने जाते हैं। उनका यह लेख क्यूबा में अंदर ही अंदर चल रही प्रतिक्रांति की परतों को खोलता है। इस्तेबान मोरालेस, हवाना विश्वविद्यालय में यू एस स्टडीज सेंटर के अवैतनिक निदेशक पद पर कार्यरत हैं।गंभीर मार्क्सवादी हैं। हवाना टाइम्स में छपे इस लेख का अनुवाद विजया सिंह ने किया है।)
          क्यूबा की आंतरिक स्थितियों पर गौर करें तो निस्संदेह पता चल जाएगा कि प्रतिक्रांति ने धीरे-धीरे ही सही राज्य और सरकार के विभिन्न स्तरों में घुसपैठ शुरु कर दी है। इसके भी प्रमाण हैं कि सरकार और राज्य के कई पदाधिकारी क्रांति के पतन के भय से स्वयं को मजबूत एवं ज्यादा समर्थ बनाने में लगे हुए हैं और दूसरे तो मानो तैयार बैठे है कि क्रांति हो और वे राज्य की सारी संपत्ति पर कब्जा कर लें। ऐसा पहले भी पुराने सोवियत संघ के साथ हो चुका हैं।
       फिदेल के अनुसार; हम स्वयं इस क्रांति को समाप्त कर सकते हैं। मैं सोचता हूँ कि सभी विचारणीय मुद्दों में, प्रमुख सेनानायक द्वारा इंगित भ्रष्टाचार और उससे जुड़े प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। यह घटना पहले से ही मौजूद थी किंतु अब इसने अपना प्रसार सुरक्षा तंत्र में भी कर लिया है। अगर ऐसा नहीं है तो ऊसुफ्रक्ट के कुछ नगरनिगमों में जमीन वितरण को लेकर पूरे देश में धोखा, गैरकानूनी कार्यकलाप, पक्षपात, नौकरशाही सुस्ती आदि से प्रेरित अनेक घोटाले हुए।
         सचाई यह है कि भ्रष्टाचार सरकार की तथाकथित नीतियों के खिलाफ व्यक्तिगत, घरेलू अवज्ञा से कहीं अधिक खतरनाक और नुकसानदेह है। अवज्ञा करनेवाले अकेले हैं, उनके पास वैकल्पिक कार्यक्रमों का अभाव हैं, उनके पास न सक्षम नेता हैं न जनता। पर भ्रष्टाचार ने वास्तविक प्रतिक्रांति का रूप ले लिया है। यह सबसे बड़ी क्षति कर सकता है क्योंकि सरकार और राज्य की पूरी मशीनरी इससे आक्रांत है। वही मशीनरी जो देश के समस्त संसाधनों को नियंत्रित करती है।
           साधारण से उदाहरण पर गौर किया जा सकता है; राज्य के गोदामों में पाउडर दूध भरा पड़ा है पर यही दूध काले बाज़ार में 70 पेसोस/किलोग्राम में उपलब्ध है। इससे बढ़िया उदाहरण नहीं हो सकता। अधिकतर लोग इसी काले बाज़ार से सामान खरीदता है। दूसरे शब्दों में, राज्य के स्त्रोतों के व्यय पर अवैध बाज़ार चलता है जिसकी वजह से राज्य को छोड़कर सभी फायदे में होते हैं। और इसके बारे में आपकी क्या राय है: जब रास्ते पर खड़ा दुकानदार, मुद्रा के बड़े गोदाम के बाहर, सबकुछ बेचने का प्रलोभन देता है। वस्तुत: यह राज्य की कार्यकारिणी द्वारा तैयार किया गया ऐसा भ्रष्टाचार है जिसमें सभी लिप्त हैं। क्योंकि जैसा कि हम सभी जानते हैं, क्यूबा में केवल एक आयातक है-राज्य। मुझे नहीं लगता कि मियामी से आनेवाले सामानों से बड़े बाज़ार या स्थायी वस्तुओं के बड़े बाज़ार का निर्माण हो सकता है।
       गौरतलब है, सूअर का मांस जो राज्य के गोदाम से निजी दुकानों तक जाता है या पेय पदार्थ जैसे शरबत, मदिरा और पानी जो पर्यटन केंद्रों तक जाते हैं, के मूल्यों में, एकाएक की गई जाँच के दौरान, भारी अंतर दिखाई दिया। इससे राज्य में निजी व्यापार और राज्य के थोक व्यापार के बीच हो रहे उत्पादों के अवैध प्रवाह को समझा जा सकता है। यह पूरी की पूरी गुप्त अर्थव्यवस्था है जो राज्य के नियमन से बाहर है। इसके कारण राज्य की अर्थव्यवस्था असंतुलित हो गई है। इसे संतुलन में लाना तब तक असंभव है जब तक वितरण और माँग के बीच के गंभीर असंतुलन को ठीक नही कर लिया जाता।
          यह अर्थव्यवस्था ही प्रतिक्रांति के रूप में अपने गुप्त नेताओं, राज्य के विरूद्ध वैकल्पिक योजनाओं और मजबूत जनता के साथ खड़ी हो रही है। यह वही जनता है जो इस अर्थव्यवस्था का धड़ल्ले से उपयोग कर रही हैं। ऊपर जो स्थितियाँ रेखांकित की गईं हैं वे उन परेशानियों से कम भयानक हैं जिनका सामना हमें अब करना पड़ रहा है। वे केवल ऊपरी बातें हैं। हाल के दिनों में उच्च पदाधिकारियों के एक समूह में कई महत्वपूर्ण कमजोरियाँ देखी गई- पक्षपात या मित्रों की तरफदारी, भ्रष्टाचारी गतिविधियाँ, ज़रूरी सूचनाओं के प्रति लापरवाही के साथ-साथ पॉवर के लिए इनका आपसी संघर्ष। शोचनीय स्थिति यह है कि यह सूचना स्पेनिश खुफिया विभाग में पहुँच रहीं हैं, इसके बावजूद उन अफसरों को नामज़द नहीं किया जा रहा। ये सभी गंभीरतम मुद्दे हैं।

      ये सभी संवेदनशील विषय जैसे पॉवर की आशा और भूख, पक्षपात, भ्रष्टाचार तथा देश के उच्च नेताओं द्वारा दिए गए अनुचित बयान इत्यादि विशेष विदेश सेवा के संज्ञान में हैं। वास्तविक राजनीतिक प्रक्रिया, व्यापारिक शक्ति गहरे अर्थों में क्रांति के शत्रुओं के पास चली गई है।

         जब क्यूबा सरकार ने अमेरिकी जाँच एजेन्सी एफ बी आई को अमेरिका में जारी प्रतिक्रांति, जब अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की भी संभावना थी, की गतिविधियों के बारे में बताया और साथ ही एफ बी आई की गतिविधियों को जानना चाहा तो प्रतिक्रांति के खिलाफ और क्यूबन-अमेरिकन माफिया के खिलाफ कदम उठाने की बजाय वे क्यूबा के पीछे ही शिकारी कुत्तों की तरह पड़ गए। वे जानना चाहते थे कि क्यूबा ने ये जानकारियाँ कहाँ से प्राप्त की। इस कारण हमारे पाँच देशभक्तों को उन्होंने अमेरिकी जेल में 11 वर्ष गलत धाराओं के अंतर्गत बंद रखा।
       फिदेल के कहने पर कि हम क्रांति को स्वयं खत्म कर सकते हैं, उन कारणों पर विचार कर सकते हैं जिससे क्रांति प्रतिवर्तनीय बनाई जा सके, अब अमेरिकी विशेष विभाग फिदेल के विषय में सूचनाओं की जाँच या अभिपुष्टि करने में जुटा है। वे प्रमुख सेनानायक से सहमति चाहते है कि वे क्यूबा की दैंनदिन गतिविधियों को देख सकें, प्रत्येक विषय को खंगाल कर वे क्यूबा की वास्तविक प्रतिक्रांति की ताकत को खोजना चाहते हैं। ये ताकतें सरकार और राज्य की मशीनरी के सर्वोच्च स्तरों व अधिकारियों से संबद्ध हैं जो क्रांति को पलभर में गिरा सकती हैं। भ्रष्ट कर्मचारियों, जो कि बिल्कुल भी अल्पसंख्यक नहीं हैं, द्वारा मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने उच्च पदों तथा मजबूत व्यक्तिगत, घरेलू यहाँ तक कि बाहरी संबंधों के निर्माण में, पॉवर की स्थिति को पाने के लिए दर्जनों वर्ष खर्च किए हैं। ये सभी अधिकारी न्यायिक जाँच 1 और 2 तक सामान्य रूप से कार्यरत थे।
        हाल ही में जनरल असेवेडो, क्यूबा के नागरिक विमान चालन संस्था (आई ए सी सी)के निदेशक, को निकाल दिया गया और उनके निकाले जाने के कारण ने अनेकानेक लोगों को भयभीत कर दिया है। उनकी रातों की नींद उड़ गई है। उनके कहने में कुछ तो सत्य होगा क्योंकि यह छोटा सा मैत्रीपूर्ण देश है। इनके कार्यव्यापारों की अब भी कोई विस्तृत सार्वजनिक व्याख्या उपलब्ध नही है, जैसा कि लोग अपेक्षा करते हैं। क्योंकि -अफवाहों में कहा जाता है कि- जनता का धन और संसाधनों का अपव्यय किया जा रहा हैं और वह भी देश की जटिल आर्थिक स्थितियों में। इसलिए असेवेडो का समर्थन करें या उसे दंडित करें, दोनों ही अवस्था में जनता के सामने जवाबदेही देनी होगी। वही जनता जो तकनीकी व वैज्ञानिक तौर पर क्रांति को रचती और बनाती है, जो कि उपयुक्त सामर्थ्य के साथ तैयार है।
         सच यह है कि एसेवेडो, (आई ए सी सी) के साथ जो कुछ हुआ वह विलक्षण नही था। ऐसी और भी अनेक कम्पनियाँ होंगी जहाँ यह सब पहले की तरह चल रहा होगा; जैसे- अधिकारियों द्वारा कमिशन लेना, विदेशों के बैंक में खाते खुलवाना। इस आधार पर सिध्दांतत: अन्यान्य भ्रष्टाचार की घटनाओं की जाँच शुरू की जा सकती है। अर्थशास्त्र में 'अचानक जाँच'(सरप्राइज ऑडिट) का प्रावधान है जिसका उद्देश्य किसी को दुख देना या खिझाना नही वरन् ईमानदार व्यवस्था को बनाए रखना है।

एक और बेहद जरूरी बात जिसपर अब तक हमारा ध्यान नही था, वह है बहुत पहले से ही क्यूबा के प्रति अमेरिका की बदलती नीतियाँ (1986-1994)। आज सबसे ज्यादा ध्यान क्यूबा की घरेलू सचाइयों पर दिया जा रहा है। ऐसा हमेशा तो नहीं लेकिन मौलिक व प्राथमिक रूप से हो रहा है। क्यूबा की सभी घरेलू गतिविधियों पर अमेरिकी राजनीतिज्ञों और विशेष विभागों की पैनी नज़र है।

कई ऐसे वाजिब कारण है जिन्हें स्पष्ट करने की कोई ज़रूरत नही हैं, मसलन अमेरिकी हमसे ज्यादा बेहतर जानते है कि क्यूबा के लोगों के क्या और कितने बैंक के खाते विदेशों में हैं। वे कौन हैं जो कमीशन खाते हैं और वे किस धंधे में लिप्त हैं। क्योंकि जितनी भी कंपनियों से क्यूबा व्यापार करता है, उनके अपने खुफिया तंत्र हैं जो कहीं न कहीं अमेरिकी समायोजन से चलते हैं। यदि कहीं ऐसा नही है तो कई ऐसे भी अधिकारी हैं जो क्यूबा की संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलते ही अमेरिकी विभाग से जुड़ जाते हैं। सूचनाएँ देने की एवज में उन्हें खासा धन-लाभ होता है।

अफसोसजनक स्थिति यह है कि हमारे व्यापार की सभी संभावित गतिविधियों के बारे में अमेरिकी खुफिया विभाग हमसे कहीं अधिक सूचना सम्पन्न है। इन्हीं जानकारियों के आधार पर क्यूबा के अधिकारियों को घूस दिया जा सकता है, ब्लैकमेल किया जा सकता है, उच्च पदों का प्रलोभन दिया जा सकता है। ये सभी बातें एकसाथ काम करें ज़रूरी नहीं। ऐसा हो ही सकता है कि कोई भ्रष्टाचारी तो हो परंतु वह उच्च पद को स्वीकार न करे, क्योंकि ऐसे चतुर व्यक्ति समझबूझ कर चालें चलते हैं। एकबार भ्रष्ट हो जानेवाला फिर शायद ही दूसरे मूल्यों की ओर मुड़ता है।

विदेशी उद्योग से जुड़े भ्रष्ट अधिकारी को यह जानना चाहिए कि वह किसी भी देश के विशेष विभागों को जो सूचनाएँ मुहैया कर रहा है वे सभी त्वरित गति से अंतत: अमेरिका के हाथों में पहुँच रहीं हैं। अधिकारियों को ब्लैकमेल करके, घूस, पदोन्नति के प्रलोभन के द्वारा बड़े दस्तावेजों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

इसे समझना बहुत आसान है। केवल मूर्ख ही नही समझ पाएँगे कि क्यों क्यूबा के विदेशी क्रियाकलापों तथा अधिकारियों की महत्वपूर्ण सूचनाओं का अमेरिका में इतना महत्व हैं, इन जानकारियों के बदले अच्छे दाम क्यों दिए जाते हैं। और अगर अब भी हम यह नहीं जानते तो हमारा विनाश निश्चित है। यह क्यूबा की बर्बादी का गुप्त क्षेत्र है जो आगे चलकर राजनीतिक विखंडन पैदा करेगा। यह प्रतिक्रांति का क्षेत्र है जिसका तथाकथित विरोधियों से, घटिया समूहों या श्वेत वस्त्रों की अभिजात्य औरतों से कोई लेना-देना नही है।
       गौरतलब है कि कुछ क्यूबा के अधिकारियों की कमजोरियों ने स्पैनिश खुफिया तंत्र की मदद की है। एफ ए आर और एम आई एन आई एन टी में क्यूबन नागरिक नशीले पदार्थों की अवैध तरस्करी में लिप्त थे। इसका पता क्यूबा को 1989 में चला जबकि डी ई ए ,एफ बी आई और अमेरिकी विशेष विभाग को इसकी पूर्व जानकारी थी। इस तरह के कार्य किसी भी देश की सक्षमता पर गंभीरतम दुष्प्रभाव डालते हैं। यहाँ यह स्पष्ट है कि आंतरिक किलेबंदी और सुदृढ़ता ही किसी देश को अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में संबल प्रदान करती है। अत: क्यूबा जितनी जल्दी भ्रष्ट अधिकारियों की खोज कर सकेगा नुकसान उतना ही कम होगा।

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