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आदर्श 'किसान सैनिक'

माओ के जमाने में 'किसान सैनिक' आदर्श हुआ करता था। माओ का उस जमाने में कहना था कि सीखना है तो कामरेड ली फेंग से सीखो। वही 'किसान सैनिक' का आदर्श था। इसी 'किसान सैनिक' को आधार बनाकर चीनी नैतिकता का सारा तामझाम खड़ा किया गया। वही शिक्षा से लेकर राजनीति तक सभी क्षेत्रों में नैतिकता को परिभाषित करने वाला प्रधान तत्व था। अचानक माओ के बाद इसी 'किसान सैनिक' का रूपान्तरण नयी बाजार अर्थव्यवस्था की संरचनाओं के अनुरूप किया जा रहा है जिससे यह मध्यवर्ग को अपील कर सके। माओ ने ली फेंग को मुक्ति दी थी, ली फेंग पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का सैनिक था। उसे कोई नहीं जानता था। किंतु अचानक सन् 1962 में उसकी एक ट्रैफिक दुर्घटना में मौत हो गयी। यह चीन में लम्बी छलांग का दौर था। उसके प्रेरक प्रतीक के रूप में ली फेंग को प्रचारित किया गया।ली फेंग इस बात का प्रतीक था कि वह कभी आराम नहीं करता था। क्रांतिकारी भावों से भरा था। वह चीन जनमुक्तिसेना,कम्युनिस्ट पार्टी और माओ के प्रति वफादार था। ली फेंग के मरने के बाद उसकी एक डायरी भी मिली जिसके बारे में कहा जाता है कि वह नकली है। इसी ली फेंग को…

भारतीय रेडियो तरंगों के लुटेरे और गुलाम बुद्धिजीवी-नेता

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हिन्दी ब्लॉगरों और बेव लेखकों ने पिछले दिनों कमाल का काम किया थ्री जी स्पेक्ट्रम के बारे में चल रहे घोटाले पर जमकर लिखा। केन्द्रीय संचारमंत्री और उसके साथ जुड़े घोटालों का पर्दाफाश किया। सबसे पहले थ्री जी स्पेक्ट्रम का पर्दाफाश टीवी चैनल ‘आजतक’ और ‘हेडलाइन टुडे’ ने किया। कैसे भारत में संचार मंत्रालय रेडियो तरंगों की लूट का केन्द्र बना है और कैसे मंत्री की नियुक्ति से लेकर रेडियो तरंगों की निजी क्षेत्र के हाथों बिक्री तक समूचे मामले में पारदर्शिता का अभाव है, नियम तोड़े जा रहे हैं, कम दामों पर भारतीय कंपनियां तरंगों की खरीद करके विदेशी कंपनियों को कई गुना ज्यादा दामों पर बेच रही हैं इत्यादि पहलुओं का अनेक ब्लॉगरों और बेव पत्रिकाओं में उदघाटन भी हुआ है। टीवी चैनलों का दावा है कि तरंगों की बिक्री के मामले में 60 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इस घोटाले में दो मीडिया सैलीबरेटी बरखा दत्त और वीर सिंघवी के नाम भी आए हैं। इन दोनों की वर्तमान संचारमंत्री को वांछित मंत्री पद दिलाने में भूमिका रही है। यह मसला संसद में भी उठा है,विपक्षी दलों ने काफी हंगामा किया है और भारत के इतिहास का इसे सबसे…

बलिहारी माओवाद की

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सच मानिए मैं माओवादियों की हिंसा को लेकर जितना नाराज था आज वैसे नाराज नहीं हूँ। माओवाद के लिए अनेक लोग तरह-तरह की बातें करते हैं,निंदा करते हैं ,लेकिन आज मैं माओवादियों पर खुश हूँ और उनके पौरूष पर बलिहारी हूँ कि उनकी वजह से सैंकड़ों-हजारों घरों में कम से कम चूल्हे तो जल रहे हैं। मंत्री से लेकर कॉस्टेबिल तक ,गांव के गरीब से लेकर हथियार सप्लाई देने वालों तक सभी को उनके कारण धंधा मिला है। सबको माओवादियों के नाम पर खाने कमाने का मौका मिला है। कल तक बुर्जुआ राज्य का पैसा वे हराम मानते थे। अब उनके पास बुर्जुआ पंचायतों के कई हजार करोड़ रुपये विकास के नाम पर पहुँच रहे हैं। अकेले झारखण्ड में दो हजार करोड़ रुपये सीधे माओवादियों के क्रांतिकारी कोष में पहुँच रहे हैं। इससे यह भी सीखने को मिला है कि बुर्जुआ कोष और माओवादी क्रांतिकारी तिजोरी में ज्यादा दूरी नहीं होती है। माओवाद का सबसे बड़ा लाभ तो विकास उद्योग को हुआ है। विकास उद्योग से जुड़ा समूचा पूंजीवादी खेमा सीआईआई के बैनर तले उन इलाकों की ओर जाने वाला है जहां पर माओवादी सक्रिय हैं। यानी सुदूर आदिवासी अंचलों में भारत के कारपोरेट घराने स्कूल बगैर…

आत्मघाती है इंटरनेट सेंसरशिप

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चीन के जो लोग गुण गाते रहते हैं उन्हें देखना चाहिए कि चीन में मानवाधिकारों की दशा क्या है ?अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों के प्रति चीन प्रशासन का रुख क्या है ? खबर आयी है कि चीन के सिनजियांग क्षेत्र में 10 महिने बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गयी हैं। उल्लेखनीय है कि 10 महिना पहले इस इलाके के अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यापक हिंसाचार हुआ था और उसके बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयीं। इस क्षेत्र में 10 महिनों से मोबाइल सेवाएं बंद थीं। एसएमएस भेजना बंद था। टेक्स्ट संदेश भेजने पर पाबंदी थी। राज्य प्रशासन ने उपग्रहसंचालित समस्त संचार नेटवर्क को बंद कर दिया था। स्मरणीय है गुजरात और मुंबई के दंगों के समय नेट सेवाएं अथवा किसी भी किस्म का उपग्रह संचार इतने लंबे समय तक कभी बंद नहीं किया गया। उल्लेखनीय है चीन की आबादी में 10 में से 6 लोग इस क्षेत्र में रहते हैं। इस इलाके में तुर्की से आयी उइघूर मुस्लिम जाति की आबादी ज्यादा है। लेकिन इस इलाके के समस्त कारोबार और रिहायशी इलाकों में हेन जाति के लोगों को कम्युनिस्ट प्रशासन ने अन्य प्रान्तों से लाकर जबर्दस्ती बसाया है फलतः उइघूर जाति के लोगों को व्यापक स्तर प…

चीन और पश्चिम बंगाल में भाषायी अंधलोकवाद

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( कॉमरेड वेंग लीक्वान)        चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने अंततः पश्चिमी सिनजियांग क्षेत्र के पार्टी सचिव वेंग लिक्वान को सचिव पद से हटा दिया है और उनकी पदावनति कर दी गयी है। उल्लेखनीय है जुलाई 2009 में सिनजियांग उईघूर क्षेत्र में भयानक दंगे हुए थे जिनमें चीनी मुसलमानों की बड़े पैमाने पर संपत्ति नष्ट हुई थी और 200 से ज्यादा निर्दोष नागरिक मारे गए थे। सचिव साहब दंगे और मुसलमानों के खिलाफ हमले रोकने में पूरी तरह असफल रहे। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने इस क्षेत्र के सचिव को हटाकर दंगे रोकने में पार्टी की असफलता को एकतरह से मान लिया है। वेंग की जगह झांग चुन सियान को इस क्षेत्र का पार्टी सचिव बनाया गया है। यह खबर चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिंहुआ ने आज दी है। उल्लेखनीय है वेंग लीक्वान 1994 - 2010 तक इस क्षेत्र में पार्टी सचिव और केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे हैं। सन् 1966 से पार्टी सदस्य हैं। ये जनाब अल्पसंख्यकों के प्रति कड़े रवैय्ये के लिए जाने जाते हैं। इनका स्थानीय संस्कृति और भाषा के प्रति पूर्वाग्रह रहा है। वेंग ने अल्पसंख्यकों के इलाके में उनकीउईघूर भाषा के बदले मेनडेरियन भाषा को प्राइम…

नव्य उदार मार्ग का कुपरिणाम हैं चीनी बच्चों पर हमले

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(चीन में हाल के कातिलाना हमलों में घायल 2 साल का बच्चा अस्पताल में) चीन में विगत दो महीनों से बच्चों पर जिस तरह के कातिलाना हमले हो रहे हैं इससे समूचे चीन में हंगामा उठ खड़ा हुआ है। चीन के विशेषज्ञों ने इस पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा है कि ये हमले अंधाधुंध नव्य पूंजीवादी आर्थिक विकास का परिणाम है। विगत दस सप्ताह में 8 हमले हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक विकास के चक्कर में विकास का मानसिक स्वास्थय पर क्या असर हो रहा है इसकी अनदेखी हुई है। सारे देश में अंधाधुंध आर्थिक विकास हुआ है उसका देश के नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर हो रहा है इसके बारे कभी सोचा ही नहीं गया। Agence France-Presse, Associated Press समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में बीजिंग स्थित चीनी विश्वविद्यालय के राजनीति और कानून विभाग के प्रो.मा अइ का मानना है कि हमने आर्थिक तरक्की पर ध्यान केन्द्रित किया और लेकिन मानसिक दशा को उन्नत बनाने पर ध्यान नहीं दे पाए। विगत 30 सालों के परिवर्तन की गति बेहद तेज रही है। हाल के हमलों में कुल मिलाकर 17 छोटे बच्चे मारे गए हैं और 50 बच्चे घायल हुए हैं। हमलावरों में स…

प्रेम पाने का नहीं देने का नाम है

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प्रेम पर इन दिनों अनेक कोनों से हमले हो रहे हैं। प्रेम आज विवाद और हिंसा का विषय बना हुआ है। अतःप्रेम के सवाल पर गंभीरता के साथ विचार करना समीचीन होगा। सवाल यह है प्रेमीयुगल प्रेम के अलावा क्या करते हैं ?प्रेम का जितना महत्व है उससे ज्यादा प्रेमेतर कार्य-व्यापार का महत्व है। प्रेम में निवेश वही कर सकता है जो सामाजिक उत्पादन भी करता हो, प्रेम सामाजिक होता है, व्यक्तिगत नहीं। प्रेम के सामाजिक भाव में निवेश के लिए सामाजिक उत्पादन अथवा सामाजिक क्षमता बढ़ाने की जरूरत होती है। प्रेम में जिसका सामाजिक उत्पादन ज्यादा होगा उसका ही वर्चस्व होगा। प्रेम करने वालों को सामाजिक तौर पर सक्षम,सक्रिय,उत्पादक होना चाहिए। सक्षम का प्रेम सामाजिक तौर पर उत्पादक होता है। ऐसा प्रेम परंपरागत दायरों को तोड़कर आगे चला जाता है। पुरानी नायिकाएं प्रेम करती थीं, और उसके अलावा उनकी कोई भूमिका नहीं होती थी। प्रेम तब ही पुख्ता बनता है, अतिक्रमण करता है जब उसमें सामाजिक निवेश बढ़ाते हैं। व्यक्ति को सामाजिक उत्पादक बनाते हैं। प्रेम में सामाजिक निवेश बढ़ाने का अर्थ है प्रेम करने वाले की सामाजिक भूमिकाओं का विस्तार और विकास…

चीन में मुसलमान विरोधी आंधी

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(प्रसिद्ध चीनी अर्थशास्त्री लाहम तोहती)                          चीन में मुसलमानों की खैर नहीं है। चीन के जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी है वहां जबर्दस्त दमन चल रहा है,भारत में जो लोग मुसलमानों के हितैषी होने का दावा करते हैं चीन में चल रही मुस्लिम विरोधी आंधी पर चुप क्यों हैं ?     पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के साथ जिस तरह का सौतेला व्यवहार राज्य प्रशासन ने किया और मुसलमानों की घनघोर उपेक्षा की है उसके तथ्य और सत्य को सच्चर कमीशन की रिपोर्ट में बताया गया है। वाम में मुस्लिम विरोधीभाव चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुस्लिमविरोधी रुझान से काफी मिलता -जुलता है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यप्रणाली के साथ पश्चिम बंगाल माकपा की कार्यप्रणाली और राज्य प्रशासन के अनेक लक्षण मिलते हैं। इस संदर्भ में चीन में मुसलमानों के साथ किए जा रहे बर्बर व्यवहार को जानना बेहद जरुरी है।          खबर आयी है कि चीन के Uyghur  अल्पसंख्यक जाति के अनाथ बच्चों के साथ चीनी प्रशासन सबसे खराब अमानवीय व्यवहार कर रहा है। इस जाति के अनाथ बच्चों को एक अनाथाश्रम में नहीं रखा जा रहा है बल्कि कुछ अवधि के बाद उन्हें दूसरे शहर …

भूमंडलीकरण और ग्लोबल मीडिया से कैसे लड़ें

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(दिमागी ख्बाब है भूमंडलीकरण)
           भूमंडलीकरण में अन्तर्विरोध निहित हैं। इसका संबंध पूंजीवाद के अन्तर्विरोधों से है। पूंजीवाद ने विश्व व्यवस्था के रुप में जब अपना विकास शुरु किया तो उसने सीमित रुप में सामन्तशाही के खिलाफ संघर्ष किया। पूंजीवादी सत्ता और औपनिवेशिक शासन व्यवस्था की स्थापना की। पुराने संबंधों को बरकरार रखा। इसके खिलाफ दुनिया के गुलाम मुल्कों में आजादी के लिए संघर्षों का सिलसिला चल निकला।
         आजादी के लिए संघर्ष पूंजीवादी भूमंडलीकरण के खिलाफ पहली सबसे बड़ी जंग हैं। तात्पर्य यह है कि भूमंडलीकरण मूलत: आजादी और आत्मनिर्भरता को छीनता है। यह परनिर्भरता और सैन्य-निर्भरता पैदा करता है। लोकतन्त्र को कमजोर बनाता है या उसे खत्म करता है। यह कार्य वह भूमंडलीय माध्यमों, भूमंडलीय संचारप्रणाली, भूमंडलीय नियमों,और निर्बाध प्रवेश के जरिये करता है।
       साम्राज्यवादी भूमंडलीकरण की विशेषता है पर-निर्भरता, सैन्य सहयोग और उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रचार- प्रसार। इच्छा और आकांक्षाएं सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की बजाय वस्तु प्राप्ति से जुडने लगती हैं। फलत: इच्छाओं का वस्तुकरण होने ल…

बच्चों की हत्याओं के खिलाफ ब्लॉगर मैदान में उतरे

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(घायल बच्चे को ऑपरेशन थियेटर में ले जाते हुए)       चीन में आम आदमी आज जितना असुरक्षित है उतना पहले कभी नहीं था। आज देश में बच्चों से लेकरबूढ़ों तक सभी असुरक्षा के वातावरण में रहने के लिएअभिशप्त हैं।आज के सभी अखबारों में चीन में बच्चों के ऊपर कातिलाना हमले की खबरें छपी हैं। ये कातिलाना हमले पिछले दो महिनों से चुन-चुनकर बच्चों पर हो रहे हैं एक स्कूल में तो ये हमले ऐसे वक्त हुए जब वहां पर पुलिस का कड़ा पहरा लगा हुआ था। (मारे गए बच्चों के परिवारीजन)      ताजा वाकया चीन के शानंजी प्रान्त के नानज़िंग शहर का है। यहां एक किंडरगार्डन स्कूल में हमलावरों ने 7 बच्चों और2 वयस्कों की घेरकर हत्या कर दी है। इस घटना के बाद देश का प्रशासन हरकत में आ गया है,स्कूलों के दरवाजे पर कैमरे लगा दिए गए हैं। सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।      बाद में पता चला है कि जिस बिल्डिंग में स्कूल चल रहा था उस बिल्डिंग का मालिक अपनी बिल्डिंग की लीज खत्म होने पर घर वापस मांग रहा था,स्कूल प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं था ,इसके चलते मकान मालिक ने बच्चों की हत्या कर दी। पूरे चीन में बच्चों के स्कूलों पर पुलिस गश्त बढ़ा दी गयी है। चीन में…

देशप्रेम का पाखंडी चीनी राग

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चीनी जनता में कम्युनिस्ट शासकों के प्रति तेजी से असंतोष बढ़ रहा है। चीन के कॉमरेड साम्राज्यवादी अवधारणाओं के शिकार हो गए हैं। साम्राज्यवादी धारणा में देश प्रेम का अर्थ सरकार प्रेम है। कॉमरेडों का मानना है जो देशप्रेमी है उसे चीन की कम्युनिस्ट सरकार का भी प्रेमी होना चाहिए।जो देशभक्त है उसे पार्टीभक्त होना चाहिए। देशप्रेम और देशभक्ति का यह संकुचित और विकृत मार्ग है। यह मानना गलत है कि देशप्रेमी को सरकार के नेताओं और मंत्रियों का भी प्रेमी होना चाहिए। यह सोच भी गलत है कि जो व्यक्ति सरकार प्रेमी नहीं बह देशप्रेमी नहीं। भारत में भी ऐसे लोग है जो देशप्रेम का अर्थ हिन्दू प्रेम मानते हैं। वंश परंपरा प्रेम मानते हैं। पार्टी विशेष से प्रेम मानते हैं।देशप्रेम की ये सब विकृत मान्यताएं हैं।  चीन जैसी दशा पश्चिम बंगाल में भी है। यहां पर कम्युनिस्टों में एक बड़ा तबका है जो बांग्ला प्रेम को पार्टी प्रेम के साथ (माकपा प्रेम के साथ ) गड्डमड्ड करके देखता है। देशभक्ति को पार्टीभक्ति के साथ एकमेक करके देखता है। देश प्रेम का अर्थ संपदा प्रेम,पार्टी प्रेम,वंश परंपरा प्रेम और नेता प्रेम नहीं है। देशप्रेम का …