शुक्रवार, 7 मई 2010

माइक्रोसॉफ्ट ने घुटने टेके भारत कब जागेगा

     यूरोपीय आयोग की सिफारिश के आधार पर माइक्रोसॉफ्ट ने फैसला लिया है कि वह सर्च के डाटा को 6 माह के बाद नष्ट कर देगा। माइक्रोसॉफ्ट ने यह फैसला यूरोपीय यूनियन के द्वारा सन् 2008 में बनाए वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों के आधार पर लिया है।
      अभी तक यह होता था कि माइक्रोसॉफ्ट के सर्च ईंजन में जाने वालों के  आईपी एड्रेस माइक्रोसॉफ्ट के पास रहते थे और वह इनका चोरी छिपे दुरुपयोग कर रहा था इसे निजी सूचनाओ के दुरुपयोग की केटेगरी में देखा गया।
     माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सर्च ईंजन के डाटा पिछले दिनों चीन सरकार को भी उपलब्ध कराए हैं जिसके आधार पर चीन सरकार का विरोध करने वालों  और तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष करने वालों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी हुई है।  ईमेल और दूसरे ‘ई’ संचार के उपकरणों की स्थान विशेष के संदर्भ में निशानदेही करने साथ चीन में अनेक मानवाधिकार कार्यकर्त्ता पकड़े गए हैं।
     यूरोप में भी माइक्रोसॉफ्ट अपने सर्च ईंजन के डाटा का राजनीतिक हिसाब-किताब बराबर करने और व्यवसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रहा था। यूरोपीय यूनियन ने सन् 2008 में ‘आर्टिकल 29 वर्किंग ग्रुप ’ नामक संगठन का गठन किया और इसमें समूचे यूरोप के डाटा संरक्षण के काम से जुड़े कई अफसरों को भी शामिल किया गया।
     ‘आर्टिकल 29 वर्किंग ग्रुप’ ने याहू,गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने अधिकारियों के साथ विस्तार के साथ बातचीत की और यह फैसला लिया कि इन कंपनियों को यूरोप के प्राइवेसी कानूनों का पालन करना होगा।  बाद में ‘आर्टिकल 29 वर्किंग ग्रुप ’ के आदेश पर यह तय पाया गया कि ये तीनों कंपनियां अपने सर्च ईंजन के ऑनलाइन डाटा को 6 माह के बाद नष्ट कर देंगी।
      इस आदेश के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सर्च ईंजन बिंग को नए ढ़ंग से नियोजित किया है। अभी तक याहू और गूगल ने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं यह साफ नहीं है। उल्लेखनीय है कि इलैक्ट्रोनिक प्राइवेसी इनफोर्मेशन सेंटर ने यूरोपीय यूनियन के देशों से अनुरोध किया था कि वे प्राइवेसी कानूनों का ख्याल रखें और सर्च ईंजन के मालिकों पर दबाब ड़ालें कि वे यूरोपीय देशों के प्राइवेसी कानूनों का पालन करें।
      माइक्रोसॉफ्ट का यूरोपीय कानूनों के सामने झुकना इस बात का संकेत है कि सरकारें यदि चाहें तो जनता की ‘ई’ प्राइवेसी की रक्षा कर सकती हैं। क्या भारत सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी और भारत के प्राईवेसी कानूनों को मानने के लिए इंटरनेट कंपनियों को मजबूर करेगी ?             





4 टिप्‍पणियां:

  1. ऎसा नही है कि भारतीय सरकार इन मामलो मे कुछ नही कर रही.. इस लिन्क को देखे.. इनमे हर देश की रिक्वेस्ट्स के बारे मे बताया गया है और अगर वो सही है तो सबसे ज्यादा तकरीबन १४२ लोकेशन्स को गूगल के बोट से दूर रखने को कहा गया है..
    http://www.google.com/governmentrequests/

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  2. हमारे लिये तो बिल्कुल नई जानकारी

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