बुधवार, 2 सितंबर 2009

इंटरनेट के 40 साल : संचार क्रांति‍ से भारत कोसों दूर

इंटरनेट आज 40 साल का हो गया। मात्र चालीस सालों में इंटरनेट ने समूचे संचार जगत की बुनि‍यादी प्रकृति‍ ही बदल डाली है। 2सि‍तम्‍बर 1969 को लॉस एंजि‍ल्‍स स्‍थि‍त कैलीफोर्निया वि‍श्‍ववि‍द्यालय में 20 लोग क्‍लेनरॉक प्रयोगशाला में एकत्रि‍त हुए और उन्‍होंने इंटरनेट के प्रयोग का पहला नजारा देखा जि‍समें दो कम्‍प्‍यूटर अर्थहीन डाटा संप्रेषि‍त कर रहे थे,इन दोनों कम्‍यूटरों को 15 फुट लंबे तार से जोड़ा गया था। यह पहला सैन्‍य संचार प्रयोग था। कम्‍प्‍यूटर नेट शुरूआत थी। तब से लेकर आज तक 40 साल हो गए हैं। इन 40 सालों में इंटरनेट यूजरों की तादाद तेजी बढ़ी है।सन् 1999 में 25 करोड़ यूजर थे,सन् 2002 में 50 करोड़,सन्2006 में 100 करोड और सन् 2008 में 150 करोड यूजर दर्ज कि‍ए गए हैं। इसमें चीन में 29.8 करोड़ (22.4 प्रति‍शत),अमेरि‍का में 227 मि‍लि‍यन ( 74 प्रति‍शत) ,जापान में 94 मि‍लि‍यन (73.8 प्रति‍शत),भारत में 81 मि‍लि‍यन (7.1 प्रति‍शत)ब्राजील 68 मि‍लि‍यन (34.3 प्रति‍शत) , जर्मनी 55 मि‍लि‍यन ( 67 प्रति‍शत) , ब्रि‍टेन 48 मि‍लि‍यन (72 प्रति‍शत), फ्रांस 41 मि‍लि‍यन(66 प्रति‍शत), रूस 38 मि‍लि‍यन(27 प्रति‍शत),दक्षि‍ण कोरि‍या 37 मि‍लि‍यन (76 प्रति‍शत),आस्‍ट्रेलि‍या 17 मि‍लि‍यन ( 80.6 प्रति‍शत) यूजर हैं। इंटरनेट के आने के बाद वि‍मर्श्‍ा,लेखन,अखबार,साहि‍त्‍य, जीवनशैली, सैन्‍य नि‍यंत्रण,सैन्‍य संचालन, युद्ध ,वि‍कास आदि‍ की प्रकृति‍ में मूलगामी बदलाव आया है। संचार को रीयल टाइम में सम्‍पन्‍न करना संभव हुआ है। भवि‍ष्‍य में इंटरनेट का और भी तेज गति‍ से वि‍कास होगा,जो लोग इस माध्‍यम का इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं वे भी इसका इस्‍तेमाल करेंगे। भारत में इसके वि‍कास की दर बेहद कम है। सकल जनसंख्‍या के मात्र सात प्रति‍शत हि‍स्‍से तक ही यह माध्‍यम पहुंच पाया है। इसका अर्थ यह भी है कि‍ भारत संचार क्रांति‍ से अभी कोसों दूर हैं। 100 लोगों में से मात्र 7 लोग ही नेट का इस्‍तेमाल करते हैं,लि‍खने का काम तो और भी कम लोग करते हैं। भारत में हि‍न्‍दी में स्‍थि‍ति‍यां ज्‍यादा सुखद नहीं है। ज्‍यादातर हिंदीभाषी राज्‍यों दस घंटे से लेकर 18 घंटे तक बि‍जली गायब रहती है, टेलीफोन कनेक्‍शनों की भी संख्‍या कम है। कहने का अर्थ यह है कि‍ हिदीभाषी समाज संचार क्रांति‍ में अभी शैशव अवस्‍था में है। हिंदी ब्‍लॉग लेखकों के तकरीबन दस हजार ब्‍लाग हैं।

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