संदेश

February, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जेएनयू छात्र आंदोलन, आतंकवाद और राष्ट्रवाद

जेएनयू छात्र आंदोलन में विभिन्न रंगत की विचारधाराएं सक्रिय रही हैं।इनमें मार्क्सवादी,उग्र वामपंथी, लिबरल,समाजवादी,मुक्त चिंतक,माओवादी आदि शामिल हैं। इन सभी रंगत के विचारों को छात्रसंघ की साधारणसभा में वाद-विवाद करते सहज ही देखा जा सकता है।जेएनयू छात्र आंदोलन की सबसे अच्छी बात है अहिंसा ।इस अर्थ में जेएनयूवाले पक्के बौद्ध हैं।वे वाम नहीं है। किसी भी संस्थान या संगठन की विचारधारा उसके आचरण से तय होती है,विचारों से नहीं।जेएनयू के छात्रों का आचरण बौद्ध परंपरा के करीब है,वाम के नहीं।बौद्ध परंपरा का निर्वाह करते हुए जेएनयू छात्र आंदोलन ने कभी हिंसा नहीं की और न कभी हिंसा का समर्थन किया। असहमति और संवाद को छात्र जीवन की धुरी बनाया। यह भी उल्लेखनीय है कि जेएनयू छात्रसंघ में कभी कोई क्रिमिनल चुनकर नहीं आया।

जेएनयू छात्रसंघ देश में अकेला छात्रसंघ है जो पूरी तरह स्वायत्त है, वि.वि. प्रशासन से उसका कोई संबंध नहीं है।छात्रसंघ अपने फैसले खुद लेता है और अपनी सारी गतिविधियों की सभी जानकारी छात्रों को पर्चे आदि के माध्यम से मुहैय्या कराता है। छात्रों को वहां चुने गए नेताओं से ज्यादा अधिकार प्राप्त हैं,…

जेएनयू छात्र आंदोलन राष्ट्रवाद और आरएसएस

जेएनयू छात्र आंदोलन के लिए 'अन्य' ( 'अदर' 'हाशिए के लोग') बहुत ही महत्वपूर्ण है। संयोग है कि जेएनयू के अकादमिक वातावरण,पाठ्यक्रम और अकादमिक संस्कृति का मूलाधार भी यही है। जेएनयूछात्र संघ के बिना जेएनयू की परिकल्पना असंभव है,छात्रसंघ जेएनयू आत्मा है। आज यही मूलाधार संकटग्रस्त है, उस पर केन्द्र सरकार के जरिए हमले संगठित किए जा रहे हैं। जेएनयू में अन्य या अदर के हकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जेएनयू में छात्रों की हर स्तर पर भागीदारी है,जेएनयू में छात्रों की सलाह को तरजीह दी जाती रही है,उनको स्वतंत्र और स्वायत्त माहौल दिया गया है।

        जेएनयू के लिए राष्ट्रवाद का मतलब वह नहीं है जो संघियों या बुर्जुआ कांग्रेस के लिए है।जेएनयू छात्र आंदोलन की साझा समझ रही है कि भारत सांस्कृतिक-जातीय और धार्मिक विविधतावाला देश है।जेएनयू के जन्म के बाद से इस थीम पर हजारों पर्चे और अनेकों प्रस्ताव इस समझ के आधार पर छात्रसंघ ने प्रकाशित किए हैं।जेेएनयू के छात्रों की नजर में भारत के राष्ट्र की धुरी धर्म नहीं नागरिक हैं।राष्ट्रचेतना की धुरी धार्मिक चेतना नहीं,ना…

ईमानदार पेशेवर शिक्षण और विचारधारा

मुझे निजी तौर पर जिन शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिला वे सभी पेशेवर ईमानदार शिक्षक थे।मथुरा में नगरपालिका के प्राइमरी स्कूल जवाहर लाल स्कूल, माथुर चतुर्वेद संस्कृत महाविद्यालय और अंत में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जिन शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिला वे अध्ययन-अध्यापन के प्रति एकदम पेशेवर नजरिया रखते थे,विद्यार्थियों के साथ बेहद मानवीय व्यवहार करते थे।फलतः मेरे मन में पेशेवर शिक्षक बनने की भावना पैदा हुई,एक ऐसा शिक्षक बनने की भावना पैदा हुई जो शिक्षा के प्रति ईमानदार रहे,पेशेवर तैयारी के साथ कक्षा में जाए,शिक्षा को धंधा न बनाए,मेरा कोई भी शिक्षक धंधेबाज नहीं था।दिलचस्प बात यह कि जितने भी शिक्षक मिले वे किसी न किसी विचारधारा को मानते और जानते थे,उनके पास राजनीतिक नजरिया था।एकमात्र आचार्य सवलकिशोर पाठक ऐसे थे जो कभी राजनीति पर नहीं बोलते थे, वे दर्शनशास्त्र के बहुत ही बेहतरीन विद्वान थे, व्यवहार में वे कांग्रेसी विचारधारा से प्रभावित थे,लेकिन आम बातचीत में छात्रों से राजनीति की कभी बातें नहीं करते थे।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि किसी भी शिक्षक ने राजनीति करने के लिए मेरे य…

कलकत्ते के खट्टे-मीठे अनुभव-

मैं सन्1989 में कोलकाता आया,जिस समय मेरी नियुक्ति कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में हुई उस समय हिन्दी एम.ए. में तकरीबन 45 छात्र पढ़ते थे।आज प्रत्येक सेमिस्टर में 125 छात्र पढते हैं।एम.फिल् भी है।मेरी नियुक्ति के पहले तक कलकत्ता वि.वि. में एससी,एसटी, आरक्षण नहीं था।कॉलेज सर्विस कमीशन में भी आरक्षण के आधार पर पद नहीं भरे जाते थे। यह समस्या जब मेरी नजरों में पहलीबार सामने आई तो मैंने इसे माकपा के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखा और अंतमें काफी जद्दोजहद के बाद आरक्षण लागू हुआ। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि हिन्दी एमए का पाठ्यक्रम तकरीबन30सालों से नहीं बदला गया था,उसमें निरंतर अपडेटिंग की प्रक्रिया आंरंभ हुई। इस काम में विभाग के अन्य शिक्षकों ने सहयोग किया,लेकिन पहल मैंने की। आज पश्चिम बंगाल हिन्दी के पठन-पाठन के लिहाज से बहुत विकास कर गया है,इसमें वाम सरकारों की बड़ी भूमिका रही है।अनेक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ायी जाती है।

कलकत्ते का सारा माहौल पुराने पैटर्न,आदतों,संस्कारों पर टिका है।नई दुनिया का उसमें प्रवेश बेहद धीमी गति से हो रहा है।चीजें बदल रही हैं लेकिन बेहद धीमी गति से। विद्या…