रविवार, 2 मई 2010

जो हिटलर की चाल चलेगा वो हिटलर की मौत मरेगा



         हमारे हिन्दी के कुछ सुधी पाठक नाराज हैं कि फिलीस्तीन पर इतना हल्ला क्यों मचाए हुए हैं। पाठकों ने तीन सवाल उठाए हैं, पहला सवाल यह है कि फिलिस्तीन पर आंसू क्यों बहा रहे हैं ?
    हम इस प्रसंग में कहना चाहते हैं कि भारत की श्रेष्ठ मानवीय परंपरा है दूसरों के दुखों में शरीक होना। फिलीस्तीन हमारे लिए आज दूसरे बन गए हैं। महात्मा गांधी ने भी फिलिस्तीनियों के संप्रभु राष्ट्र के संघर्ष का समर्थन किया था। भारत सरकार की आम सहमति से बनी नीति है फिलीस्तीन राष्ट्र के समर्थन की। हम जो भी बातें लिख रहे हैं वे भारत की राष्ट्रीय नीति के समर्थन और गांधीजी के सपनों को पूरा करने के लिए लिख रहे हैं।
     दूसरी बात पाठकों ने यह कही है कि इस्राइल जो कुछ कर रहा है आत्मरक्षा के लिए कर रहा है। यह बात प्रत्येक दृष्टि से गलत है। इस्राइल ने  फिलीस्तीनियों के देश पर कब्जा किया हुआ है। कोई भी देशप्रेमी नागरिक यह पसंद नहीं करेगा कि उसके देश पर कोई बाहरी शक्ति आकर कब्जा कर ले।
    इस्राइल -अमेरिका ने आज तक फिलीस्तीन के बारे में संयुक्तराष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद का एक भी प्रस्ताव लागू नहीं किया है। इन दोनों देशों के अलावा सारी दुनिया चाहती है कि फिलीस्तीनियों की अवैध कब्जा की गई जमीन इस्राइल छोड़ दे। लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है।
   एक पाठक ने पूछा है कि हम्मास क्या है ? हम्मास देशभक्त जुझारू क्रांतिकारी संगठन है और हम्मास को फिलीस्तीन की जनता में व्यापक समर्थन प्राप्त है। हम्मास ने हमेशा अपनी मातृभूमि के लिए संघर्ष किया है। हम्मास के कब्जे में इस्राइल का कोई हिस्सा नहीं है। हम्मास का फिलीस्तीन इलाकों में व्यापक नेटवर्क है जिसमें शिक्षा संस्थान,अस्पताल, अनाथालय आदि पचासों किस्म के जनसेवा के काम होते हैं। हम्मास के विकासमूलक कार्यों के लिए यूरोपीय देशों से व्यापक आर्थिक मदद भी मिलती है। अमेरिका और उसके भोंपू उसे आतंकवादी मानते हैं। जो तथ्य और सत्य दोनों ही दृष्टियों से गलत है। आप चाहें तो हम्मास के बारे में नेट पर फिलीस्तीन स्रोत सामग्री पढ़कर और ज्यादा जान सकते हैं।
     फिलीस्तीन आज सारी दुनिया में आजादी के प्रतीक है,स्वतंत्रता के संघर्ष में सबसे कठिन संघर्ष कर रहे हैं। हमें संप्रभु राष्ट्र,स्वतंत्रता और आजादी के मूल्य को इस्राइली-अमेरिकी बर्बरता से बचाना है तो फिलीस्तीन को आजादी और राष्ट्र की जमीन दिलाने के लिए समर्थन देना चाहिए। फिलीस्तीन की मुक्ति हम सबकी मुक्ति है। इस्राइली-अमेरिकी विस्तारवाद की पराजय मानवता के सुरक्षित विकास के लिए जरुरी है। सारी दुनिया में मानवाधिकारों के लिए,खासकर अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार हनन की प्रक्रिया को इससे ्रारा झटका लगेगे। यह गठबंधन हारता है तो भारत भी मजबूत बनेगा
   जो लोग इस्राइल को फिलीस्तीन प्रसंग में निर्दोष मान रहे हैं वे जानते हैं कि इस्राइल की जितनी भी बर्बरता और युद्धोन्माद है उसका गोमुख है अमेरिका। अमेरिकी प्रशासन नहीं याहता कि फिलीस्तीन को मुक्ति मिले। इस्राइल कभी भी अपने बूते पर फिलीस्तीन का दमन नहीं कर सकता।
    अमेरिका की बेशुमार आर्थिक और सामरिक मदद का निरंतर बने रहना ही इस्राइल की बर्बरता का प्रधान कारण है। आज इस्राइल की पूरी अर्थव्यवस्था अमेरिकी मदद पर टिकी है। अमेरिका यदि आज इस्राइल की आर्थिक और सैन्य मदद बंद कर दे। हथियारों की सप्लाई बंद कर दे तो फिलीस्तीनी इलाकों से इस्राइल को भागना पड़े।
      फिलीस्तीन जनता के पास किसी भी तरह के आधुनिक हथियार नहीं हैं। गोला-बारुद नहीं है। अब स्थिति यह है कि पत्थर भी मारने के लिए नहीं बचे हैं। फिलीस्तीन के लोग इसके बावजूद बहादुरी के साथ निहत्थे जंग कर रहे हैं और उनके निहत्थे संघर्ष से मध्य-पूर्व का सबसे ताकतवर देश इस्राइल ढरा हुआ है। फिलीस्तीन को लेकर इस्राइली नेताओं में जिस कदर भय बैठा हुआ है उस भय को इस्राइली नेता परमाणु बम होने के बावजूद दूर नहीं कर पा रहे हैं।
       उल्लेखनीय है इस्राइल के पास अत्याधुनिक हथियारों का जितना बड़ा जखीरा है वैसा जखीरा मध्यपूर्व में किसी भी देश के पास नहीं है। फिलीस्तीन के भय से कांपते इस्राइली शासकों की रातों की नींद गायब है और वे उन हथकंडों को अपना रहे हैं जो कभी हिटलर ने यहूदियों पर लागू किए थे। हिटलर ने यहूदियों के सफाए को हर कीमत पर सुनिश्चित करने की कोशिश की और अंत में स्वयं ही मौत का शिकार बना। दुर्भाग्य की बात है कि इस्राइल का यहूदी नेतृत्व हिटलर के रास्ते पर चल निकला है। हिटलर का रास्ता पतन का रास्ता है। हिन्दी में चर्चित नारा है ‘‘ जो हिटलर की चाल चलेगा वो हिटलर की मौत मरेगा’’।
      


3 टिप्‍पणियां:

  1. हमारे कुछ ब्लॉगर दोस्तों ने फिलीस्तीन के सवाल पर जिस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त की है,वह स्वागतयोग्य है। मैं उनकी वामपंथ के बारे में जो भी राय है उसके बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता फिर कभी वामपंथ पर बहस करेंगे। अभी फिलीस्तीन पर ही केन्द्रित रखें। फिलीस्तीनियों की संप्रभु राष्ट्र की मांग विश्व जनमत द्वारा स्वीकृत न्यायपूर्ण मांग है।

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  2. हिटलर के बारे में क्या जानते भी हैं?? जर्मनी निवासियों से पूछें इस्रायल के बारे में कुछ पता भी है... या बस जो मन में आया लिख दिया... फिलिस्तीन क्या बला है, एक आतंकवादियों का अड्डा... कभी भगत सिंह के बारे में पूरा पढ़ें, उनके खत भी मौजूद हैं पढ़ें...

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  3. आप फरमाते हैं...
    "फिलीस्तीन जनता के पास किसी भी तरह के आधुनिक हथियार नहीं हैं। गोला-बारुद नहीं है। अब स्थिति यह है कि पत्थर भी मारने के लिए नहीं बचे हैं। फिलीस्तीन के लोग इसके बावजूद बहादुरी के साथ निहत्थे जंग कर रहे हैं "

    आप तो जौली अंकल से भी बेहतरीन चुटकलेबाज हैं

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