शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

यूजर की मौलिकता का हनन करता फेसबुक

फेसबुक के मालिकों ने अपने सिस्टम की रक्षा के नाम पर यूजरों के मौलिक सृजन को अपराध घोषित कर दिया है। कुछ यूजरों ने फेसबुक में कुछ ऐसी सेवाएं जोड़ दीं जिनका फेसबुक से कोई संबंध नहीं है। ये सेवाएं उन्होंने सूचनाएं पाने के लिए जोड़ी थीं। जिससे वे अन्य सोशल नेटवर्क साइट में बढ़त बना सकें।
    पावर वेंचर नामक कंपनी ने एक ऐसा टूल बनाया है जिसके आधार पर यूजर अनेक सोशल नेटवर्क खाते रख सकता है उन्हें एक साथ जोड़ सकता है और एक ही साथ अनेक सोशल नेटवर्क पर अपने दोस्तों को संदेश भी भेज सकता है। फेसबुक का मानना है कि पावर वेंचर का यह टूल अमेरिका के अपराध कानून का उल्लंघन है। फेसबुक ने यूजरों को इस टूल का इस्तेमाल न करने के लिए कहा है और यह भी कहा है जो फेसबुक के साथ इस टूल का इस्तेमाल करेगा वह कानून की नजर में अपराधी कहलाएगा।
     अगर कोई यूजर फेसबुक की अनुमति के बिना इस टूल का इस्तेमाल करता है तो कैलीफोर्निया के कानूनों के अनुसार अपराधी होगा। इंटरनेट पर यूजरों के अधिकारों का संरक्षणकरने वाली संस्था ‘इलैक्ट्रोनिक फ्रंटियर फाउंडेशन’ ने अदालत में चल रहे एक मामले में फेसबुक के तर्कों का प्रतिवाद किया है और कहा है कि फेसबुक का यह दावा बुनियादी तौर पर गलत है। यूजर को यह अधिकार है कि वह डाटा पाने के लिए किस टूल का इस्तेमाल करे और कितने टूल का इस्तेमाल करे। उसके इस अधिकार को फेसबुक नियंत्रित नहीं कर सकता। डाटा एकत्रित करने के मामले में यदि फेसबुक की बात मान ली जाती है तो फेसबुक का इस्तेमाल करने वाले लाखों-करोड़ों यूजरों को अपराधी की केटेगरी में खड़ा कर दिया जाएगा और फिर इस आधार पर उन पर कानून के उल्लंघन के आधार पर मुकदमे चलने का खतरा है।
     उल्लेखनीय है कैलीफोर्निया के आपराधिक कानून के अनुसार  computer trespassers को दण्डित किया जा सकता है। लेकिन जो यूजर पावर वेंचर एग्रीगेटर को अपना नाम, पासवर्ड आदि बताता है उसे trespassers की कोटि में नहीं रखा जा सकता। फेसबुक के सिद्धांत के अनुसार फेसबुक पर जाने वाले ने यदि फेसबुक के बताए नियमों और सेवा शर्तों को नहीं पढ़ा है तो वह आसानी से फेसबुक को त्याग नहीं सकता और बंद नहीं कर सकता। अथवा कुछ भी नया और मौलिक बना या जोड़ नहीं सकता।
    यहां तक कि फेसबुक पर जाने वाले यूजर द्वारा स्वचालित लॉगिन करना भी अपराध है। कानून का उल्लंघन है।  लॉगिन में "automatic " का अर्थ अपराध नहीं होसकता। लेकिन फेसबुक के सदस्य यदि ऑटोमेटिक लॉगिन करते हैं तो उनके हिसाब से यह अपराध है। कायदे से देखें तो सोशल नेटवर्क साइट पर जो सूचनाएं यूजर देता है वह उसका मालिक है ,सोशल नेटवर्क उनका मालिक नहीं हो सकता। यूजर को ही सूचना को अन्य को देने न देने का अधिकार है। यूजर के द्वारा दी गयी सूचनाओं का मालिक कोई अन्य तब तक नहीं हो सकता जब तक वह उसे बेचता नहीं है। यूजर अपनी सूचना का मालिक है ।
    सन फ्रांसिसको के फेडरल जज की अदालत में यह मामला चल रहा है। अदालत ने अगर फेसबुक के तर्कों को मान लिया तो यह कैलीफोर्निया के कानूनों के दायरे को व्यापक बना देगा। उसके बाद फेसबुक के यूजरों के पास ज्यादा विकल्प नहीं होंगे। वे फेसबुक के बंदी होंगे। यह सीधे यूजरों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। अमेरिका में अभी जिस तरह की कारपोरेटपंथी आंधी चल रही है उसमें यह खतरा बना हुआ है कि कानून फेसबुक के साथ खड़ा नजर आए। लेकिन यूजरों के मौलिक अधिकारों के रखवाले शांत होने वाले नहीं हैं।            


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