मंगलवार, 30 अक्तूबर 2012

हेकड़ी,अहंकार और फेसबुक

इस दौर में हेकड़ी बढ़ी है। भ्रष्टनेता से लेकर ईमानदार नौकरशाह तक सबमें हेकड़ी का विकास हुआ है। सामान्य कारिंदे से लेकर भिखारी तक सब हेकड़ी में बातें करते हैं। हेकड़ी को नव्यआर्थिक उदारीकरण ने नई बुलंदियों पर पहुँचाया है। पहले हम कभी इतने हेकड़ीबाज तो न थे। 

यहां हेकड़ी और अहंकार के नए रूप के फेसबुक के संदर्भ में नौ लक्षण नजर आ रहे हैं-

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चूंकि मुझे फोन आया या ईमेल अतः मैं हूँ। यानी मोबाइल फोन या ईमेल आपको मैं का एहसास कराते हैं। व्यक्तिवाद में इजाफा करते हैं।

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सुनियोजित आत्मप्रेम में वृद्धि हुई है। यह स्वाभाविक और सही दिशा है।

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फेसबुक-ब्लॉगिंग के आने के बाद सामान्यजन और लेखक के बीच जो अहं का अंतर था वह खत्म हो गया है। फेसबुक ने सभी में लेखकीय अहं पैदा किया है।

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इंटरनेट के पहले लेखकीय गरिमा थी,फेसबुक के साथ लेखकीय समर्पण का भावबोध प्रबल हुआ है। इसके कारण प्रतिवादी कम और सरेण्डर करने वाले विचार और प्रचार का वर्चस्व दिखाई देता है।

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फेसबुक ने लेखकीय अहंकार और अनुभूति दोनों की विदाई कर दी है। अब आप फेसबुक पर बिना किसी अहंकारबोध के साथ लिखें,लेखन को समर्पित करें और आनंद लें।

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लेखक और फेसबुकिए में एक साम्य है दोनों जल्द ही मूल्यनिर्णय करने लगते हैं। मूल्य निर्णय से बचना चाहिए।

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फेसबुक ने अहंकाररहित कम्युनिकेशन को संभव बनाया है। बड़े से बड़ा और छोटे से छोटा व्यक्ति सहजभाव से अपनी बात कहकर खिसक लेता है। अहंकारहित कम्युनिकेशन जीवन का परमानंद है।

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फेसबुकिए की अपमानजनक या गंदी टिप्पणी पर अमूमन हम नाराज होते हैं, उसे ब्लॉग कर देने का विकल्प भी है, इससे यह धारणा भी बनती है कि फेसबुकिए के अहंकार का अभी तक पूरी तरह खात्मा नहीं हुआ है बल्कि फेसबुक ने नए किस्म का अहंकारबोध पैदा किया है।

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फेसबुकिए हेकड़ीबाज की विशेषता है कि वह अर्थ का अनर्थ करने और विषयान्तर करने में सिद्धहस्त होता है और एकदम असहिष्णु होता है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. अलमस्त अलहदा लेखन.. ! बातों बातों में लेखकीय नवप्रवृति पर एक जरुरी चुटकी ..

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  2. facebook ke naye naye lekhako ke liye achhi nasihat
    vaise sahi artho me logo ki maansikata hi hekadi dikhane ki ho gayi hai khas taur se yuva varg ki jo facebook me bahudha dekhane ko mil rahi hai jisaka vishleshan aapne kiya hai
    lagbhag yahi pravritti I A C ke netaao ke vicharo me bhi jhalakti hai yaani jo asahmat hai vah desbhakt nahi hai

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