शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

सुब्रह्मण्यम स्वामी के कु-विचार


भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी आरएसएस के विचारों की ताजा गंध देते हैं। स्वामी का कहना है " दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में एक एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) का एक कैंप होना चाहिए." इस बात के बहाने स्वामी बताना चाहते हैं कि उनकी मंशाएं साफ हैं वे जेएनयू को "नरक" के रुप में देखते हैं। उनके लेखे वहां छात्र पढ़ने लिखने नहीं जाते ,बल्कि अन्य किस्म के कामों के लिए जाते हैं।
स्वामी ने अपने ट्विटर हैंडल @Swamy39 पर लिखा, "जेएनयू कैंपस में छापा मारकर नक्सलियों, जिहादियों को पकड़ने के लिए बीएसएफ़ कैंप और एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो होना चाहिए."
सवाल यह है मोदी पुलिस को एक्शन लेने से किसने रोका है ?पुलिस जेएनयू कैम्पस में जाती क्यों नहीं है ? छापे क्यों नहीं मारते मोदी पुलिस के दस्ते ?किसने रोका है नक्सलियों को पकड़ने से ,डेढ़ साल में एक भी दिन पुलिस भेजने का भी समय नहीं मिला बटुक नायक को!!धिक्कार है 56 इंच के सीने को !
हम जानना चाहते हैं कि स्वामी की सूचनाओं का स्रोत क्या है ? उनको किसने बताया कि जेएनयू में नक्सली,जेहादी और नशेड़ी भरे पड़े हैं ? स्वामी को किसने खबर दी कि जेएनयू में राष्ट्रविरोधी छात्र हैं,यदि ऐसा है तो स्वामी के नायक मोदी क्या कर रहे हैं ? वे अब तक शांत क्यों हैं ? क्या उनका अब तक शांत रहना यह नहीं बताता कि वे निकम्मे हैं और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ एक्शन लेने में असमर्थ हैं !
हमें यह तो मालूम है देश में भगवा चंडूखाना है जिसमें इस तरह कु-संस्कृत विचार बटुकों के मन में उतारे जाते हैं। हम सबसे पहले स्वामी से कहेंगे कि वो एबीबीपी के छात्रों से कहें कि वे जेएनयू छोड़कर चले जाएं,उनको ऐसे वि वि में नहीं पढ़ना चाहिए जहां नक्सली हों,नशेड़ी हों,जेहादी हों! उनको किसी देशभक्त विवि में चले जाना चाहिए। स्वामी के पास ऐसे छात्रों की जितनी भी सूचनाएं हैं वे जल्द ही प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखित में दें जिससे तुरंत कार्रवाई हो सके ।

1 टिप्पणी:

विशिष्ट पोस्ट

मेरा बचपन- माँ के दुख और हम

         माँ के सुख से ज्यादा मूल्यवान हैं माँ के दुख।मैंने अपनी आँखों से उन दुखों को देखा है,दुखों में उसे तिल-तिलकर गलते हुए देखा है।वे क...