मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

औरत पर संदेह नहीं विश्वास करो


यूपी में कमाल हो गया,औरतों ने पंचायत चुनावों में झंड़े गाड़ दिए.ग्राम प्रधान की 44प्रतिशत सीटों पर औरतों ने जीत हासिल की है, जबकि उनके लिए आरक्षित सीटें थीं 33फीसदी ।11प्रतिशत सीटें अनारक्षित स्थानों से औरतों ने जीतकर सच में कमाल कर दिया। जब भी पंचायत के चुनाव परिणाम आए हैं, तो औरतों के परिणाम बेहतर ही आए हैं,लेकिन परिणाम आने के साथ ही संदेह वर्षा आरंभ हो जाती है। सवाल यह है पुरुष क्या स्वायत्त ढ़ंग से काम करता है ?हमलोग पुरुष की सैंकड़ों-हजारों सालों की असफलता के बावजूद उस पर संदेह नहीं करते,उसकी क्षमता पर संदेह नहीं करते, लेकिन औरत की क्षमता पर तुरंत संदेह करने लगते हैं।लोकतंत्र हो या जीवन हो,सामाजिक प्रक्रिया विश्वास के आधार पर चलती है,जिनको हम चुनते हैं उन पर विश्वास करें ,यदि वे खरे न उतरें तो उनको बदल दें ,उनकी जगह किसी और का चुनाव करें।लेकिन संदेह न करें।

यूपी में औरतें जीती हैं,देश में हजारों औरतें जनप्रितिनिधि के रुप में काम कर रही हैं,इससे लोकतंत्र में औरतों की शिरकत बढ़ी है।औरत की पहचान बदली है। औरतों पर जिन बातों को लेकर संदेह किया जा रहा है वे बातें पुरुषों पर भी लागू होती हैं। मसलन्, यह कहा जा रहा है कि वे अंगूठा छाप हैं,उनके पास निजी विवेक नहीं है,पति का मोहरा हैं।ये सारी बातें पुरुषों पर भी लागू होती हैं। हमारे पुरुष तुलनात्मक तौर पर ज्यादा ये ही सब काम कर रहे हैं।वे किसी न किसी के मोहरे हैं। विवेकहीनता में भी औरतों से आगे हैं।



कहने का तात्पर्य यह कि औरतें जब लोकतंत्र में फैसलेकुन कमेटियों में चुनी जाती हैं तो हमें संदेह का माहौल बनाने से बचना चाहिए। औरतें क्रमशःघर से बाहर आ रही हैं,राजनीति में दाखिल हो रही हैं,उनमें बदलाब हो रहा है।वे एकदम विपरीत परिस्थितियों में काम कर रही हैं,उनको हर हालत में तब तक मदद और समर्थन की जरुरत है जब तक उनकी स्थिति पूरी तरह बदल नहीं जाती।औरत का सबसे बड़ा शत्रु संदेह है। संदेह न करें,उस पर विश्वास करें,वह न तो माया है,न ठगिनी है,वह भी मनुष्य है,उसे भी सामान्य मनुष्य की तरह जीने और काम करने का मौका दें।

1 टिप्पणी:

  1. ऐसी नेक सोच सबकी होनी चाहिए। . औरत जिस तरह से घर को स्वर्ग बना सकती है वैसे ही वह देश को भी संभाल सकती है

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