शुक्रवार, 24 जून 2011

सिंगूर की लूटलीला, टीवी और अराजक राजनीति



भारत के इतिहास में किसी मुख्यमंत्री ने जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले में ऐसा भद्दा मजाक नहीं किया जैसा पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने सिंगूर के मामले में किया है। टाटा को राज्य सरकार की लीज पर दी गयी जमीन,जिसके 85 प्रतिशत मुआवजे का भुगतान हो गया,टाटा और अन्य का उस पर 3000 हजार करोड़ खर्च हो गया,और उसे एक ही झटके में कानून के बहाने राज्य सरकार ने अवैध ढ़ंग से हस्तगत कर लिया। कलकत्ता उच्चन्यायालय में टाटा की ओर से याचिका दायर की गई है। जिस पर सुनवाई चल रही है। दूसरी ओर राज्य सरकार जिद पर अड़ी है वो अपनी राजनीतिक प्रतिज्ञाओं को अमलीजामा पहनाकर ही दम लेगी। सिंगूर में पहले कारखाना खोले जाने के पहले पंगा,मध्य में पंगा,स्थापना के बाद पंगा,अब बंद कारखाने पर पंगा।
    सिंगूर में चल रहे जमीन और उद्योग के इस अंतहीन पंगे से कई सवाल उठे हैं क्या पश्चिम बंगाल में फिर से औद्योगिक विकास होगा ? क्या अराजक राजनीति का अंत होगा ? परिस्थितियां बता रही हैं कि राज्य में आने वाले समय में जमीन के सवाल पर बड़ी लड़ाईयां होंगी।काफी खून खराबा होगा।
     सिंगूर के नए प्रसंग में पहला सवाल यह है कि राज्य सरकार ने टाटा को लीज पर दी गयी जमीन वापस लेने के पहले टाटा से बात करने की कोशिश क्यों नहीं की ? किसी विकल्प की खोज क्यों नहीं की ? टाटा को राज्य सरकार ने पहले बुलाया था तो सभ्यता का तकाजा है कि ममता सरकार टाटा को बुलाकर कहती कि हम जमीन वापस चाहते हैं ? टाटा ने किसानों की जमीन नहीं ली थी ,यह जमीन राज्य सरकार ने ली थी।  
ममता बनर्जी को 400 एकड़ जमीन वापस लेनी थी ,यह उन किसानों की जमीन है जिन्होंने मुआवजे के चैक नहीं लिए। 400एकड़ की बजाय सारी जमीन को टाटा से क्यों वापस लिया गया ? नैनो कारखाने के लिए 600 एकड़ जमीन काफी थी जैसा ममता कह रही थीं, वे 600 एकड़ छोड़ क्यों नहीं पायीं ? टाटा से पूरी जमीन लेकर ममता सरकार किसकी सेवा करना चाहती हैं ? वे चाहती तो अनिच्छुक किसानों को मुँह मांगा दिला सकती थीं।
ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक सनक में नैनो के बने बनाए कारखाने को चलने नहीं दिया,सरकार बनाने के बाद उसे चालू करने का प्रयास नहीं किया,उलटे टाटा को राज्य सरकार द्वारा दी गई जमीन वापस लेली,टाटा को बगैर कोई मुआवजा दिए।टाटा और उसकी सहयोगी कंपनियों का 3हजार करोड़ रूपया खर्च हो गया।यह राजनीतिक मिलिटेंसी है,जो किसी कानून को नहीं मानती।
सिंगूर में नैनो के कारखाने में 22जून 2011 को जमकर लंपटों ने लूटपाट की है।ममतापंथी स्टार आनंद ,कोलकाता टीवी,न्यूज टाइम आदि बांग्ला चैनलों ने नैनो कारखाने में की गई लूटमार की खबर नहीं दिखाई। जबकि पृष्ठभूमि में लूटमार के फुटेज चल रहे थे। एकमात्र 24घंटा और आकाश चैनल ने यह खबर दी। नेशनल चैनलों पर भी ब्लैकआउट था इस खबर पर। 24 घंटा बाद ममतापंथी चैनल दिखा रहे हैं कि कारखाने में किस तरह की सुरक्षा है। सिंगूर के नैनो कारखाने में जब लूट हो रही थी टीवी चैनल एकदम ब्लैकआउट किए थे। असल में पश्चिम बंगाल में किसी बंद कारखाने को वामशासन में मजदूरों ने नहीं लूटा था। यह बेमिसाल घटना है। कलकता उच्चन्यायालय ने भी सुनवाई के दौरान लूटपाट की घटना को लज्जित करने वाली घटना कहा है।
  



















                      




1 टिप्पणी:

  1. नमस्‍कार आप के ब्‍लॉग में सब्‍सक्राइब का आप्‍शन नही है और वह होना चाहिये इससे आपके ब्‍लॉग के पाठकों की संख्‍या बढ़ जायेगी

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मेरा बचपन- माँ के दुख और हम

         माँ के सुख से ज्यादा मूल्यवान हैं माँ के दुख।मैंने अपनी आँखों से उन दुखों को देखा है,दुखों में उसे तिल-तिलकर गलते हुए देखा है।वे क...