शनिवार, 27 दिसंबर 2014

मदनमोहन मालवीय और हिन्दू -मुस्लिम एकता की समस्या



 देश में साम्प्रदायिक माहौल बिगडा हुआ है ,संघ और उनके नायक मोदी द्वारा वोट की राजनीति को बहुसंख्यकवाद की राजनीति और धर्माधारित राजनीति की ओर मोड़ा जा चुका है। यह देश के लिए सबसे ख़तरनाक चीज है। देश में चारों ओर मुस्लिम विद्वेष की बर्षा हो रही है। साथ में मदनमोहन मालवीय जी को भारतरत्न देकर सम्मानित भी किया जा रहा है, दुर्भाग्य की बात है कि मालवीयजी के विचारों के साथ संघ और मोदी सरकार का तीन- तेरह का संबंध है । संघ और उसके संगठनों की विचारधारा की धुरी है हिन्दू-मुस्लिम विद्वेष , जबकि मालवीयजी के विचारों की धुरी है हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव। मोदी नारा विकास का दे रहे हैं लेकिन ज़मीनीस्तर पर बहुसंख्यकवाद की ओर जा रहे हैं। हिन्दू-मुस्लिम विद्वेष को बढ़ावा दे रहे हैं,फ़ंडामेंटलिस्ट संगठनों की हिमायत कर रहे हैं।संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा  भारत को हिन्दुओं का देश कहकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। जानें और पढें संघ वाले कि मालवीयजी ने क्या लिखा था।
     मदन मोहन मालवीय ने लिखा " हिन्दुस्तान में अब केवल हिन्दू ही नहीं बसते हैं - हिन्दुस्तान अब केवल उन्हीं का देश नहीं है। हिन्दुस्तान जैसे हिन्दुओं का प्यारा जन्म-स्थान है, वैसा ही मुसलमानों का भी है। ये दोनों जातियाँ अब यहाँ बसती हैं और सदा बसी रहेंगी। जितना इन दोनों में परस्पर मेल और एकता बढ़ेगी , उतनी ही देश की उन्नति करने में हमारी शक्ति बढ़ेगी और जितना ही बैर या विरोध या अनेकता रहेगी , उतने ही हम दुर्बल रहेंगे।" यह भी लिखा " जो हमारी उन्नति नहीं चाहते , वे हमको एक- दूसरे से लड़ाने के लिए यत्न करते हैं और करेंगे। लेकिन हमारे आपस में एक - दूसरे के विचार और भाव शुद्ध रहें तो हमारे किसी बैरी को हमको लड़ाने का यत्न सफल नहीं होगा। यह दु:ख की बात है कि हम लोगों में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो एक जाति को दूसरे से लड़ाने का यत्न करते हैं। हमको इस बात के कहने में कोई संकोच नहीं कि जो हिन्दू या मुसलमान ऐसा करता है, वह देश का शत्रु है। इतना ही नहीं , बल्कि वह अपनी विशेष जाति का भी शत्रु है । हमको सबको उचित है कि सब एक- दूसरे के चित्त को संताप पहुँचाने वाली बीती बातों को भूल जावें,एक- दूसरे का हित और सुख यत्नों में सहायक हों।" 


1 टिप्पणी:

  1. मैं ऐसा नहीं मानता. धर्म-परिवर्तन की बात को लेकर और फालतू की बयानबाजी को लेकर वे त्यागपत्र देने की बात कर चुके हैं. संघ से विरोध जताया. राम मंदिर नहीं गए, जबकि बहुमत में सरकार है.. आप इन सब बातों पर भी विचार करें. मोदी ने मुस्लिमों के समर्थन में बहुत कुछ कहा है और 'मुस्लिम आतंकवाद' शब्द को लेकर पुलिस बल को प्रयोग करने से रोक दिया है. मुस्लिम समर्थन के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है.

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