बुधवार, 25 नवंबर 2015

संघ की राजनीति और फंड -


आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन और उनसे जुड़े साइबर बटुक एक बात में अमेरिकी एजेण्डे पर चल रहे हैं,अमेरिकी एजेण्डा है धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करो,धार्मिक फंडामेंटलिज्म को मजबूत करो। इस एजेण्डे को संघियों ने कई दशकों से सचेत रुप से अपनाया हुआ है,वे दिन-रात धर्मनिरपेक्षता को गरियाते रहते हैं,धर्मनिरपेक्ष लेखकों-बुद्धिजीवियों -नेताओं और दलों पर कीचड़ उछालते रहते हैं। इन लोगों ने धर्मनिरपेक्षता को मीडिया उन्माद के जरिए छद्म धर्मनिरपेक्षता करार दे दिया है। वे संविधान वर्णित धर्मनिरपेक्षता को भी नहीं मानते,उसे भी वे हटाने की मुहिम चला रहे हैं। इस काम के लिए वे कारपोरेट फंडिंग के जरिए काम कर रहे हैं।
आरएसएस अकेला ऐसा संगठन है जिसके फंडिंग के स्रोत का पता नहीं है।यह ऐसा संगठन है जो केन्द्र सरकार से लेकर अनेक राज्य सरकारों को नियंत्रित किए है लेकिन फंडिंग का स्रोत नहीं बताता। यही दशा अनेक फंडामेंटलिस्ट संगठनों की भी है वे भी अपनी फंडिंग को उजागर नहीं करते।आरएसएस यदि देशभक्त संगठन है तो अपने फंडिंग के सभी स्रोत उसे उजागर करने चाहिए, उसे बताना चाहिए कि उसके यहां कहां से और किन स्रोतों से पैसा आता है और उसके संगठन में उसका किस रुप में इस्तेमाल होता है। भारत में हर करदाता नागरिक सरकार को अपने आय-व्यय का हिसाब देता है लेकिन संघ नहीं देता। यदि किसी के पास आरएसएस के आय-व्यय की जानकारी है तो कृपया शेयर करें। मजेदार बात यह है कि कांग्रेस ने भी कभी आरएसएस से जानकारी उगलवाने की कोशिश नहीं की।

1 टिप्पणी:

  1. भारत की प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता ही पश्चिम का निशाना है। जैसे कि oil rich देश उनके शिकार हैं।

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