मंगलवार, 24 नवंबर 2015

जर्मनी से क्यों हो रही है आतंकीसेना में भरती


आज से एक साल पहले इराक में कुर्द इलाके में जब भाड़े के सैनिक-आतंकी के रुप में एक जर्मन की लाश मिली तो सारी दुनिया का ध्यान आतंकियों की भर्ती क्षमता की ओर गया। हमने कभी इस सवाल पर विचार नहीं किया कि जर्मन देश में मजबूत सरकार,मजबूत राष्ट्रवाद,उदार समाज और बेहतरीन शिक्षा के बावजूद वहां से आतंकी संगठनों के लिए भाड़े के सैनिक कैसे मिल रहे हैं ? सीरिया में आतंकियों के संगठनों में तकरीबन 600जर्मन-मुसलिम भाड़े के सैनिकों के होने का अनुमान जर्मन सरकार ने व्यक्त किया है।

उल्लेखनीय है भाड़े के सैनिकों की एक ऐसे देश से भर्ती हो रही है जिसकी प्रति व्यक्ति आय सारे यूरोप में सबसे ज्यादा है।जर्मन अधिकारियों के अनुसार सीरियाई आतंकियों के लिए काम करते हुए 60जर्मन भाड़े के सैनिक मारे जा चुके हैं और तकरीबन180वापस जर्मनी लौट चुके हैं। जर्मनों की आतंकी भाड़े के सैनिक के रुप में संघर्ष करने की लंबी परंपरा है, एक जमाने में अफगानिस्तान में भी भाड़े के जर्मन सैनिक लड़ने के लिए गए थे। भाड़े के जर्मन आतंकीसैनिकों को चेचेन्या और बोसनिया की भाड़े की सेनाओं में भी लड़ते हुए देखा गया। सवाल यह है अतिविकसित देश जर्मन अपने नागरिकों को आतंकियों-पृथकतावादियों को क्यों मुहैय्या करा रहा है ?जर्मनी में “मल्टी कल्चरल हाउस” नामक संस्था है जिसने चेचेन्या-बोसनिया आदि में भाड़े के सैनिकों की भर्ती करके आतंकियों को जर्मन-मुसलिम युवाओं की सेवाएं उपलब्ध करायीं। इसके अलावा हेमबर्ग की एक मसजिद के जरिए भी भाड़े के सैनिकों की भर्ती का काम होता रहा है। यही वह मसजिद है जिसके जरिए 9/11 के आतंकी हमले लिए भी आतंकी भर्ती किए गए थे।सन् 2009 और 2010 में अलकायदा के पाक ग्रुप के लिए भी यहाँ से भाड़े के सैनिक भर्ती किए गए। इसके अलावा यमन,सोमालिया, सीरिया और इराक में भी आतंकियों की भाड़े की सेना में जर्मनी से भर्ती युवा काम कर रहे हैं। सीरिया में काम करने वाले आतंकी संगठन “सलाफी जेहादी ऑर्गनाइजेशन मिलातु इब्राहीम” में जर्मनों की बड़ी संख्या है। इस संगठन का निर्माण अलकायदा के मीडिया फ्रंट “ग्लोबल इस्लामिक मीडिया फ्रंट” के महमूद और डेनिश कुस्पर्ट नामक एक आतंकी ने किया था। महमूद को 2007 में गिरफ्तार किया गया बाद में 2011 में उसे छोड़ दिया गया। डेनिश कुस्पर्ट इन दिनों सीरियाई आतंकियों का महत्वपूर्ण प्रचारक बना हुआ है। उनके नेटवर्क-वीडियो आदि के कामों को अंजाम दे रहा है। जर्मनों की आईएसआईएसएल में उपस्थिति कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं उन्होंने अपनी एक स्वतंत्र ब्रिगेड़ इस संगठन के अंदर बना ली है।

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