शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

फेसबुक पर बुद्धिजीवियों ने अन्ना हजारे के आमरण अनशन पर उठाए अहम सवाल


फेसबुक पर अन्ना हजारे के आमरण अनशन को लेकर अनेक बुद्धिजीवियों की बहुत ही सधी और सटीक टिप्पणियां विभिन्न वॉल पर प्रकाशित हुई हैं। उनमें से यहां पर कुछ प्रतिक्रियाओं को दे रहे हैं। ये प्रतिक्रियाएं अनेक सवाल पैदा करती हैं जो अन्ना हजारे ,मीडिया और भ्रष्टाचार से जुड़े हैं। हम चानते हैं पाठकगण इन सवालों पर गंभीरता के साथ विचार करें।



Dilip Mandal
अन्ना की एकमात्र मांग है लोकपाल बिल को बनाने में सिविल सोसायटी के लोगों की हिस्सेदारी हो। क्या सिविल सोसायटी के मेंबर्स का चुनाव होगा?

अन्ना हजारे की मांग संविधान विरुद्ध है। वे कानून की प्रक्रिया में उन लोगों की हिस्सेदारी चाहते हैं जो लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुने गए हैं। आप उन्हें चुन नहीं सकते, हटा नहीं सकते। एमपी, एमएलए को तो हम चाहे तो हटा सकते हैं। सिविल सोसायटी के इलीट का क्या करेंगे।


 दिलीप मंडल-
जिंदगी की गति
गांधी अभी जिंदा है! अन्ना की तबियत बिगड़ी तो समझो सरकारों की सेहत खराब होगी!

Dilip Mandal
सिविल सोसायटी वाले इलीट प्रफुल्लित हैं कि बिना चुनाव लड़े और चुनाव हारने के जोखिम के, देश का कानून बनाने में उनकी हिस्सेदारी हो जाएगी।


Dilip Mandal-
इस देश के संविधान में खामियां हो सकती हैं, फिर भी यह लोकतंत्र का आधार है। इसकी वजह से इस देश में लोगों को कई तरह की स्वतंत्रता मिली है। इसे एनजीओ के हाथ में नहीं सौंपा जा सकता।
Dilip Mandal-
अन्ना के अनशन का अंत कैसे होगा? Ravindra Kumar Goliya ji ने दो संभावनाएं बताईं हैं। या तो लंबे अनशन के बाद अन्ना गुजर जाएंगे। या सरकार जनलोकपाल विधेयक पर विचार करने के लिए तैयार हो जाएगी। रवींद्र जी का मानना है कि दूसरी वाली संभावना ज्यादा प्रबल है क्योंकि इसमें सरकार और अन्ना दोनों का काम बनता है।

एक और कमेटी, एक और विधेयक, एक और कानून... और लोकपाल बनेंगे दूसरे ग्रह के लोग जो देश में सुशासन ले आएंगे।





Dilip Mandal
दिल्ली में आदिवासी कोटा खत्म करने के खिलाफ 10,000 से ज्यादा आदिवासी जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते हैँ। आपको पता भी नहीं चला क्योंकि मीडिया इस बारे में एक लाइन भी लिखने को तैयार नहीं था। अन्ना के समर्थन में 1,000 लोग मुश्किल से हैं, जिनमें से 200 से 300 या उससे भी ज्यादा मीडिया कर्मी होंगे। लेकिन उनके आंदोलन के बारे में पूरा देश जानता है।



Dilip Mandal
अन्ना का जो करवाना है दो दिन में करवा दीजिए। 8 अप्रैल से भारत बंद होगा। आईपीएल शुरू होगा। 1,000 करोड़ रुपए के विज्ञापन दांव पर होंगे। उस दौरान आप क्या देखेंगे अन्ना का आंदोलन या आईपीएल? मीडिया आपको आईपीएल देखने को मजबूर कर देगा। अन्ना अंदर के पन्नों पर जगह पाएंगे। या पहले पेज पर सिंगल कॉलम या संक्षेप में।... तो?... तो क्या, देखते रहिए।

Dilip Mandal
नीरा राडिया एक चैनल के कर्मचारियों के वेतन का बंदोबस्त करती हैं। उस चैनल ने कल भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना के आंदोलन को जोरदार तरीके से कवर किया। बरखा दत्त के चैनल में अन्ना की कवरेज कैसी है?



Anant Kumar Jha
पत्रकारिता विशुद्ध रूप से  व्यवसाय ही है,फिर एक बार इस बात को भारतीय मीडिया ने साबित किया है.जन लोकपाल विधेयक को लेकर प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा किए गए आमरण अनशन के समर्थन में पूरा भारतीय मीडिया क्यों और कैसे उतर आया इसे व्यवसायिक रूप से सझने की जरुरत है.पेश है दो उदाहरण:
लाइव इंडिया: इस चैनल ने यह पहल की है कि जो भी हमें देख रहा है और अन्ना के समर्थन में आना चाहते हैं। 53030 पर अपना नाम, शहर का नाम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं।
दैनिक भास्कर:दैनिक भास्कर ने भी ऐसी ही पहल करते हुए भ्रष्टाचार से त्रस्त सारा देश, जरूरी आपका भी एक संदेशनाम से एक मुहिम शुरू की है. dbpahal (स्पेस) आपका नाम (स्पेस) आपका संदेश। इसे 54567 पर भेज दीजिए।
 कुल मिलजुलकर यह चोखा धंधा है. भ्रष्टाचार से खिलाफ जनयुद्ध के नाम पर मीडिया क्या गुल खिला रहा है यह तो दिख रहा है.लगे हाथ इस महान कार्य में हाथ बटा रहे मीडिया घरानों को यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए की एसएमएस  से होने वाली कुल कमाई का कितना हिस्सा इस पुनीत कार्य पर खर्च करेंगे.

Sandeep Kumar -
corruption like a cast.never go only it could be control in little bit.corruption is a reality like cast.we are talking and running for big fish.but the corruption which has spread on ground zero,how can be removed.how many people is aware about lok pal bill.how many victims of corruption is know the process to lodge the complain through lokpal bill if it implemented now.plz raise-up the voice to change the monopoly of bureaucrats.only and only solution is to enhance the literacy power.Anna hazare or more has awake up when 2g spectrum,aadarsh socety, e.t.c came.where crore has engaged.who is ready to agitate on jantar-mantar about 100,200 rupees which has become the official fees of block and other rural agency. if this types of crore scame were not come then where was our anna hazare,where was our anti-curruption supporter,where was our having intention anti-currupted media.////////kya itne dino se hamara desh ekdam sudh tha.ye media ko world cup ke baad ab trp isme nazar aa rahi hai.


Mukesh Bhargava -
Jan Lokpal bill Aur anna.Inse kuch hoga nhin.Aakhir ek beiman se nikalkar mamla dusre ke pass chala jayega. communal bhasha bol rhe hain anna.Bahut se beiman saath me jud gye hain.Media bahut phayada le jayega.Abhi kuch din pahle cricket ka tamasha chala tha. Kuch kar pane ki koshish hain,Shyad kuch ho paye...... Waise bhi jo bathe log hain kya kum chhal rhe hain.

Abhay Tiwari
सुषमा स्वराज: भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में हम अन्ना के साथ हैं!
(और आम तौर पर हम बेल्लारी बन्धुओं के साथ हैं)

Prabhat Pandey -
और यदुरप्पा के साथ .

Rajya Bardhan
Anna Hajare ne Uma Bharti aur Om Prakash Chautala ko manch se bhaga kar achcha kiya!!! Bhrashtachari bhrashtachar ko door nahi kar sakta..... Lekhakon ko nyatik samarthan dena chahiye......!!!!!!!!!



Ritu Raj
1973 में लोकनायक जय प्रकाश नारायण की उम्र थी 73 वर्ष; 2011 में अन्ना हजारे जी की उम्र है 72 वर्ष. क्या स्वतंत्र भारत के युवाओं को हमेशा बूढ़े कंधों की लाठी की ही ज़रूरत पड़ती रहेगी?

Atal Behari Sharma

Bahut dhansu sawal kiya he Rituraj bhai...... yuva log Cricket or Ketrina me mast he....


Ritu Raj
1975 में हमलोग युवा थे ... लेकिन मस्त थे हेमा और धर्मेन्द्र में ... आज कोई और युवा है ... वह भी मस्त है कैटरीना और क्रिकेट में. 1975 में भी भ्रष्टाचार ही मुद्दा था ... 2011 में भी भ्रष्टाचार ही मुद्दा है. कहीं कुछ अनकही बातें तो नहीं छिपी हुयी हैं इन तथ्यों में??

Upendraprasad Singh -

I feel that always corruption when reaches at certain level where explosion may take place the social system throw Lighting conductor to defuse and 1975 Sampurna Kranti experience tells us that from the womb of fight against corruption the icons of corruption like LALU and his mandali will take birth


Chandra Prakash Jha -

My friend Shahid Akhtar says अन्ना हजारे की मुहिम सेलीब्री‍टीज लूट लेना चाहते हैं। इस मुहिम को सेली‍ब्री‍टीज और मीडिया की चमक नहीं गांव की डगर चाहिए। गांव में जड़ जमाए भ्रष्‍टाचार पर हमला करना जरूरी है।
लेकिन लोग गांव की पगडंडियों तक नहीं जाना चाहते। राजधानी का राजपथ उन्‍हें मीडिया की चमक एवं सुर्खियां दे रहा है। शायद ही कारण है कि क्रिकेट और फिल्‍म के लोग इसमें ब...िछे पड़े हैं। लोगों के साथ अच्‍छे रैपो से उनका ब्रांड मूल्‍य जो बढ़ेगा।
Ritu Raj -
सुमन ... मैं पूरी तरह सहमत हूँ तुम्हारे मित्र से. मैं पिछले दो वर्षों से अपने गाँव में रह रहा हूँ ... यहाँ कि मीठी और कडवी सच्चाइयों को देख रहा हूँ ... अक्सर उन्हें झेल भी रहा हूँ ... हर कदम पर हो रहे भ्रष्टाचार का दर्शक भी हूँ ... और इसी लिय बार बार कह रहा हूँ ... हमारा समाज एक भ्रष्ट समाज है ... हम कभी भ्रस्ताचार के खिलाफ नहीं हैं ... हम भ्रष्टाचार के एक हद से बढ़ाने के खिलाफ हैं ... बस.


Ritu Raj-
 सुमन ... कुछ पत्रकार बंधू भी हैं जो इस बात से अत्यंत उत्साहित हो रहे हैं कि अन्ना जी को लारा दत्ता ने भी अपना समर्थन दिया है. ऐसे एक पत्रकार बंधू के किसी मित्र ने उन्हें टोक कर कह दिया कि लारा ने अपने आनेवाली फिल्म के प्रोमोशन के चक्कर में ऐसा कहा होगा तो वे बुरा मान गए !!!!


Ritu Raj -
फेसबुक पर लोग आमिर खान कि चिट्ठी, जो उनहोंने प्रधान मंत्री को लिखी है, उसे चाव से पढ़ रहे हैं ... लेकिन उन्हीं लोगों को यदि यह कहा जाय कि जाकर थोडा वक्त गाँव में बिताएं और वहाँ के हालातों को सुधारने की कोशिश करें तो वे बिदक जायेंगे.



Chandra Prakash Jha -

Shiv Sena too has supported Anna's latest venture and we know what Shiv Sena is. Anna's last such fast - a couple of years ago- was against some corrupt ministers on the Congress -NCP government in Maharashtra and one of them Suresh Dada Jain is now in Shiv Sena !!shtra


Chandra Prakash Jha -

Forget Lara , think of Barkha Dutts & Veer Sanghvis - do they have any moral right to voice against corruption?


Chandra Prakash Jha -

Won't be surprised if tomorrow A Raja and Shahid Balwa also lend their support from the jail to Anna's cause


Ritu Raj -


मैं बिहार का हूँ ... बिहार के गाँव में रहता हूँ. नीतीश कुमार फिलहाल मीडिया के हीरो हैं ... और भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ होने का दावा भी करते हैं. तरह तरह के नए नए कानून बनाये हैं उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ ... लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी आज भी थाने में, ब्लाक में, बिजली विभाग में - अमूमन हर जगह - चूसा जा रहा है. लेकिन वह इस से विचलित नहीं है ... उसकी जीवन शैली का एक अंग बन गया है यह भ्रष्टाचार. आम आदमी इसे अब भ्रष्टाचार मानता ही नहीं है ... वह खुश होता है पैसे दे कर क्योंकि उसका काम हो जाता है ... अक्सर जायज़ काम के लिए भी वह पैसे खर्च करता है और काम करवा कर खुशी और गर्व से फूल कर घर लौट आता है. यह है जमीनी हकीकत ... लेकिन किसी मीडिया में इसकी कोई चर्चा नहीं होती क्योकि इसमें glamour नहीं है. अन्ना हजारे के अनशन में glamour है ... वह खास दिल्ली में है ... उसे आमिर खान और लारा दत्ता का समर्थन मिल रहा है ... फेसबुक गूँज रहा है अन्ना जी के समर्थन में. लेकिन भारत के गाँवों में भ्रष्टाचार बदस्तूर जारी है.

Ritu Raj -


जैसा कि सुमन ने भी थोड़ी देर पहले कहा ... भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून तो पहले से ही मौजूद हैं ... नए नए कानून बनने से भ्रष्टाचार समाज से समाप्त नहीं होगा ... चाहे वह एक नया लोकपाल कानून ही क्यों न हो. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई दिल्ली में लड़ना बेमानी है ... इसे तो सुमन के मित्र के शब्दों में ... पगडंडियों पर उतरना होगा ... अन्यथा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाइयों का यह सिलसिला चलता रहेगा और भ्रष्टाचार अपनी जगह बरकरार रहेगा.


Chandra Prakash Jha -
Some Numbers : Just now my search on Goggle for 'corruption in India ' yielded' about 30,600,000 results in 0.07 seconds while the search for " Anna Hajare ' had about about 1,070,000 results in 0.08 seconds. Surely Corruption in India has much more base than Anna Hajare.

akshay Bakaya-


The Congress calling the "immensely respected" Anna Hazare a "maverick" & RSS agent is definitely a sign of cold feet.

Even in the 70s, it was Indira's knee-jerk Emergency rule that revived the dying RSS, jailing them and making heroes out of them. As in Tahrir square a corrupt régime's secret hope (or stragegy) would be that participants would commit violence (as too often in Palestine, Kashmir) so that the movement could be quickly labelled terrorist, naxalite, etc. and legitimately repressed by the state's always-stronger violence.

Great things seem possible if imagination and creativity infects this movement. Gene Sharp's handbook of non-violent revolution, as everywhere recently, can be a key source, especially the "198 Methods". See (and do pass on please) :


Asrar Khan-

ये अन्ना हजारे का साथ देने का विल्कुल सही वक्त है /..इसी बीच यह भी पता चला है की हमारे महामहिम प्रधानमंत्री ने कहा है की अन्ना हजारे किसी के बहकावे में आकार आमरण अनशन पर बैठ गए हैं /..इसके बाद लोगों ने प्रधान मंत्री से पूछना शुरू कर दिया है की क्या हजारे साहब बच्चे हैं..? पी यम साहब की बात आप लोगों को कैसी लगी ?

अण्णा हजारे की अगुआई वाले जन आंदोलन को सफलता मिलती दिख रही है और सरकार झुकती हुयी दिख रही हैा ऐसे में दुष्यंोत का एक शेर याद आता है 
कौन कहता है आसमां में नहीं हो सकता सुराख 
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों ।


सत्य को सत्य कहने की कीमत हर एक को चुकानी पड़ती है...कभी कभी तो खाना पीना भी मुश्किल हो जाता है.... यकीन ना हो तो अन्ना हजारे सा. को देख लीजिए...




कुछ महत्त्वाकांक्षी बुद्धिजीवियों और चुके हुए रिटायर्ड महत्त्वाकांक्षियों के अलावा.... अन्ना साहब हजारे के साथ कोई नहीं है.... यह कोई जन-आन्दोलन नहीं... एक समूह की कुछ मांगों को पूरा करवाने का आग्रह है.. हठ है...
......... भ्रष्टाचार कोई सरकारी महकमा नहीं जिसे सरकार पर दबाव बनाकर बंद करवा दिया जाय....भ्रष्टाचार आदमी के जीन में है... कोई बड़ा भ्रष्टाचारी है.. कोई छोटा...कोई बहुत छोटा...
.... पहले आंदोलन के अगुआ अपने निष्कलंक होने का प्रमाण जनता को दें... फिर जनता भी उनके साथ आएगी.....
.. मीडिया भी अपना रवैया ठीक करे.... एक अभिनेता को गाँधी जैसे महान, नेक और निष्पक्ष पुरुष से ऐरे-गैरे की तुलना न करे... गाँधी जी कभी गाँधी-टोपी पहन कर गाँधी बनने का नाटक नहीं करते थे....
इसे जन आंदोलन कहकर न पुकारा जाय... इससे इतिहास की आत्मा पीड़ित होगी...आने वाली पीढ़ी हमारा मजाक बनाएगी....


Ajay Rohilla -
अन्ना हजारे के लिए ....एक बूढ़ा आदमी है मुल्क में या यों कहो इस अँधेरी कोठरी में एक रोशनदान है ...-दुष्यंत कुमार


Subodh Shukla -
कुछ प्रूफ रीडर बुद्धिजीवी और पेज ३ समाज-चिन्तक अन्ना के अनशन पर दिए जा रहे छोटे-छोटे भाषणों का पाठ मनु-स्मृति की तरह पेश कर रहे हैं. यह दुखद है. किन्तु संघर्ष और आन्दोलन, विचार की सामाजिक समझ एवं समस्या के व्यापक जनतांत्रिक आयामों की धुरी पर टिके होते हैं. अपनी तमाम सीमाओं और असमर्थताओं के बावजूद अन्ना आज लोकतांत्रिक नेतृत्व की एक विश्वसनीय इकाई बन कर उभरे है. इसमें संदेह नहीं.

पुष्पेन्द्र फाल्गुन-
हिन्दुस्तान एक ऐसा देश जिसे निरंतर किसी न किसी मसीहा की तलाश रहती है..., हर बात, हर काम के लिए मसीहा हैं हमारे पास, एक भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सलीके का मसीहा नहीं था, सो यह तलाश भी पूरी हुई अन्ना हजारे के रूप में..., तलाश पूरी, अपना काम ख़तम, अब भ्रष्टाचार के जिस भी मुद्दे को अपन लोग उठाएंगे, उम्मीद करेंगे कि अन्ना उस मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाएं...







2 टिप्‍पणियां:

  1. भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून तो पहले से ही मौजूद हैं ... नए नए कानून बनने से भ्रष्टाचार समाज से समाप्त नहीं होगा ..
    भ्रष्टाचार को हम सब लोगो ने मिलकर ख़त्म करना होगा .. सबसे पहले तो हम सब को यह संकल्प लेना होगा की जहाँ कही भ्रष्टाचार हो रहा है उसके खिलाफ आवाज़ उठाएंगे ...

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  2. कम से कम सुशिक्षित समाज को भ्रम फैलाने से बचना चाहिए और अन्ना साहब का साथ देना चाहिए। आज तक सब की ज़बान पर ताले थे और आज कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहा है तो पेट में दर्द क्यों ??????

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