बुधवार, 4 अगस्त 2010

चीन में कैमरों में कैद जनता



    एक जमाना था समाजवाद और पूंजीवाद का जनता के प्रति भिन्न रवैय्या होता था। कम्युनिस्टों और बुर्जुआ नेताओं और दलों का जनता के प्रति भिन्न नजरिया होता था। हमने यह भी देखा है कि बुर्जुआ नेता अपने को आम जनता के बीच असुरक्षित महसूस करते थे। मसलन हिटलर कभी युद्ध के मोर्चे पर अकेले नहीं गया वह अपने ही सैनिकों से भयाक्रांत रहता था। वहीं दूसरी ओर एक मोर्चे से दूसरे मोर्चे की ओर स्टालिन अकेले ही सैनिकों का उत्साह बढ़ाने का काम कर रहे थे।
      हमारे यहां पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों की कितनी ही गलतियां रही हों लेकिन यहां पर वीआईपी कहे जाने वाले नेता आराम से बगैर किसी सुरक्षा व्यवस्था के निर्भय होकर घूमते रहते हैं। उनके लिए कहीं पर भी कोई खतरा नहीं है। न नेता जनता पर अविश्वास करता है और न जनता नेता से भयाक्रांत रहती है। किसी भी मंत्री,एमपी,एमएलए के पास कोई सुरक्षा पुलिस नहीं है। सभी साधारण जनता की तरह रहते हैं। इसके विपरीत देश के अन्य राज्यों में वीआईपी नेताओं के लिए असुरक्षा का वातावरण है। वे बिना सुरक्षाकर्मियों के कहीं भी आ जा नहीं सकते। ऐसे में ममता बनर्जी का यह कहना कि माकपा ने मुझे लालगढ़ में मारने की योजना बनाई है, व्यर्थ का आरोप है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा है और इस हिंसा  की बागडोर फिलहाल ममता और माओवादियों के हाथ में है। इससे भिन्न फिनोमिना चीन में देख सकते हैं।
   चीन के उइगूर प्रांत में देख सकते हैं। एक साल पहले इस प्रांत में हन और उइगूर जाति के बीच भयानक दंगे हुए। ऐसे दंगे चीन के इतिहास में कभी नहीं हुए थे। उस समय इन दंगों में 167 लोग मारे गए थे और हजारों लोग घायल हुए थे।
    आज उरूगई इलाकों में चीन सरकार ने 47 हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं,कोई भी इलाका नहीं छोड़ा है जहां के बारे में रीयल टाइम में खबर प्रशासन के पास न पहुँचे। निकट भविष्य में 60 हजार कैमरे और लगाए जाने हैं। अब  प्रत्येक इलाके, गली, घर, चौराहे पर कैमरा चौकीदारी कर रहा है जिससे कोई आश्चर्यजनक प्रतिवाद की घटना न हो जाए।
     चीन में प्रशासक वैसे ही जनता से डरे हुए  हैं जैसे पश्चिम में शासक डरे रहते हैं। कैमरों के जरिए जनता को नियंत्रित करना पश्चिम में रूटिन चीज है। लेकिन किसी कम्युनिस्ट देश में जनता पर अहर्निश निगरानी निश्चित रूप से चिन्ता की बात है। इससे यह भी पता चलता है कि चीन के कम्युनिस्ट अपने को आम जनता में असुरक्षित महसूस करते हैं। समाजवादी देश में नेता यदि अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं तो यह निश्चित रूप से पतन का लक्षण है।
    समूचे चीन में 70 लाख से ज्यादा कैमरे जनता पर अहर्निश चौकीदारी कर रहे हैं। सन् 2014 तक 15 मिलियन अतिरिक्त कैमरे और लगा दिए जाएंगे। यह ऑरवेलियन नजरदारी और नियंत्रण की धारणा का सामाजिक रूपान्तरण है। यह समाजवाद नहीं वर्चुअल समाजवाद है। इसमें सभी असुरक्षित और बेगाने हैं।                       







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