बुधवार, 7 अप्रैल 2010

इंटरनेट तटस्थता को करारा झटका

     इंटरनेट की स्वतंत्रता को अब तक सर्वसत्तावादी समाजों में ही राजनीतिक दबाब झेलने पड़ रहे थे लेकिन कल अमेरिका में वाशिंगटन डीसी की निचली अदालत ने करारा झटका दिया है। इंटरनेट के संदर्भ में अमेरिका की अदालतों और प्रशासन के रुझान का सारी दुनिया के लिए बड़ा महत्व है। कल ‘कॉमकास्ट’ के मामले में निचली अदालत ने कहा है कि अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के पास मौजूदा कानूनों के तहत इंटरनेट के संचालन और नियंत्रण के पर्याप्त अधिकार नहीं हैं। इसके कारण यह संस्था किसी अवांछित बेवसाइट या बेव सेवा संचालक के ट्रैफिक का प्रसारण या संचार नियमित और नियंत्रित नहीं कर सकती।
    निचली अदालत के इस फैसले से नेट तटस्थता के निर्माण के लिए फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के द्वारा किए गए प्रयासों को करारा झटका लगा है। अदालत ने कॉमकास्ट के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। उल्लेखनीय है कि इंटरनेट सेवा देने वाली कॉमकॉस्ट ने सन् 2007 में बिट टोरेंट नामक कंपनी के नेट ट्रैफिक को बाधित किया था और नेट संचार रोक दिया था। कॉमकॉस्ट के इस फैसले के खिलाफ फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन ने कदम उठाए थे और फैसला भी दिया था,इस फैसले को कॉमकास्ट ने चुनौती दी थी,निचली अदालत में लंबी कानूनी जंग के बाद यह फैसला आया है।
   इस फैसले का यह असर हो सकता है कि फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन इंटरनेट की तटस्थता को बनाए रखने के बारे में जो प्रयास कर रहा है वे सफल न हो पाएं। कमीशन ऐसे प्रावधान तैयार करने में लगा हुआ है जिससे नेट कंपनियां किसी भी किस्म के नेट संचार को बाधित नहीं कर सकती थीं।यूजर की प्राइवेसी का उदघाटन नहीं कर सकती थीं, लेकिन अदालत के इस फैसले ने नेट कंपनियों को नेट संचार को रोकने और मनमानी करने का एक तरह से खुला लाईसेंस दे दिया है। यह नेट की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वालों के लिए करारा झटका है। कमीशन यह प्रयास कर रहा है कि नेट कंपनियों के फैसलों से नेट की तटस्थता प्रभावित न हो। यह माना जा रहा है कि हाल ही में फेडरल कमीशन ने जो ब्राडबैण्ड योजना तैयार की है उसे भी लागू करना आसान नहीं होगा। इसका अर्थ यह भी है कि फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन अब किसी भी नेट सेवा कंपनी की मनमानी रोक नहीं सकेगा। यानी कंपनियां सरकारी नियंत्रण के बाहर अपनी मनमानी करने के लिए स्वतंत्र होंगी। इसका अर्थ यह भी है कि नेट उपभोक्ता की प्राइवेसी अब असुरक्षित है। कंपनियां प्राइवेसी के मामले में कुछ भी कर सकती हैं। 
   उल्लेखनीय है चीन में नेट कंपनियों ने प्राइवेसी का उल्लंघन करते हुए चीन प्रशासन के खिलाफ संघर्ष करने वालों की सभी सूचनाएं, ईमेल और पते वगैरह दे दिए जिसके आधार पर सैंकड़ों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को चीन प्रशासन ने गिरफ्तार कर लिया। 
    अमेरिका में बड़े पैमाने पर कारपोरेट घरानों के नियंत्रण से इंटरनेट को मुक्त कराने का आंदोलन चल रहा है हमें भी इस संघर्ष में उनका साथ देना चाहिए। हमें भी अपने नेटबंधुओं को नेट स्वतंत्रता के पक्ष में गोलबंद करना चाहिए।


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