गुरुवार, 19 नवंबर 2009

मुक्‍ति‍बोध जन्‍मदि‍न नेट सप्‍ताह के समापन पर- हस्‍तलि‍खि‍त डायरी का अंश


2 टिप्‍पणियां:

  1. तभी तो कहते हैं कि लेखक जब लिखने के मूड में हो तो दरवाज़ा बंद करके लिखे ताकि दिमाग खुला रहे :)

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  2. Muktibodh dwara hastlikhit diary-ansh pdhna adbhut anubhv rha.Muktibodh k janmadin pr net sptah ke aayojan ki safalta k liye aap ko aur aapke sahyogiyo ko ashesh shubhkamnayen.

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