रविवार, 15 नवंबर 2009

चीन की कम्‍युनि‍स्‍ट पार्टी में रखैलों का जलवा






आज के टाइम्‍स ऑफ इण्‍डि‍या में एक बड़ी ही शर्मनाक  खबर है ,चीन की कम्‍युनि‍स्‍ट और चीन के प्रशासन के अधि‍कारि‍यों का एक बड़ा तबका भ्रष्‍टाचार से परेशान है। भ्रष्‍टाचार भी असामान्‍य कोटि‍ का है। पढ़कर वि‍श्‍वास नहीं हो रहा था बाद में मेरे चीनी कम्‍युनि‍स्‍ट दोस्‍तों ने फोन पर बताया कि‍ बात सही है। चीन की कम्‍युनि‍स्‍ट पार्टी में एक बड़ा तबका है जो रखैल रखता है। क्रांति‍कारी पार्टी का क्रांति‍ से सेक्‍स क्रांति‍ तक का यह रूपान्‍तरण कि‍सी भी तर्क से गले उतरने वाली बात नहीं है। चीनी प्रशासन ने सर्कुलर जारी कि‍या है कि‍ अधि‍कारी लोग रखैल रखना बंद कर दें और यदि‍ रखना ही चाहें तो अपने खर्चे से रखैलों को पालन पोषण करें। उल्‍लेखनीय है चीन में फि‍जूलखर्ची रोकने के लि‍ए जो सरकारी और पार्टी स्‍तर का अभि‍यान चल रहा है उसके दौरान यह नि‍र्देश जारी कि‍या गया है। एक अनुमान के अनुसार चीन की कम्‍युनि‍स्‍ट पार्टी के सक्रि‍य नेतृत्‍व का एक बड़ा तबका रखैल को रखता रहा है। यह वहां स्‍वीकृत परंपरा है। साथ ही मंहगी मदशालाओं में भी उनकी आवाजाही बढ़ गयी है जि‍से चीनी प्रशासन रोकना चाहता है। स्‍थि‍ति‍ की भयावहता का ही परि‍णाम है कि‍ पार्टी को खुलेआम सर्कुलर नि‍कालकर आपत्‍ति‍ प्रकट करनी पड़ रही है। सरकारी प्रसारण माध्‍यमों से इसे बार-बार प्रचारि‍त कि‍या जा रहा है। आम तौर पर अधि‍कारि‍यों को जो तनख्‍वाह मि‍लती है उससे वे रखैलों का खर्चा नहीं उठा पाते और पैसे की कमी को पूरा करने के लि‍ए घूस लेते हैं। घूसखोरी और व्‍यभि‍चार ये दो बड़ी बीमारि‍यां हैं जि‍नसे चीन की कम्‍युनि‍स्‍ट पार्टी जूझ रही है। सर्कुलर में कहा गया है कि‍ यदि‍ अधि‍कारी और पार्टी के सदस्‍य रखैलों से अपने को दूर कर लें तो भ्रष्‍टाचार स्‍वत: ही कम हो जाएगा। यह तो वैसे ही हुआ कि‍ आप चीनी खाना बंद कर दीजि‍ए दाम अपने आप कम हो जाएंगे। स्‍थि‍ति‍ की भयावहता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि‍ शंघाई पार्टी के महासचि‍व पर भ्रष्‍टाचार और यौन दुराचार के अनेक आरोप हैं। उनकी अनेक रखैलें भी हैं। रखैलों के पूरे कुनबे को संभालने के लि‍ए व्‍यापक पैमाने पर पैसा भी चाहि‍ए और जाहि‍र है पैसा सि‍र्फ घूसखोरी से ही मि‍लता है और पार्टी का नेतृत्‍व इससे बेहद परेशान है। आम पार्टी मेम्‍बर व्‍यभि‍चार  और भ्रष्‍टाचार के धंधे से बचकर रहे इसके लि‍ए मीडि‍या में बड़े नेताओं के सदवि‍चार भी सुनाए जा रहे हैं लेकि‍न इस सबका कोई असर नजर नहीं आ रहा।          


8 टिप्‍पणियां:

  1. कम्यूनिस्म को ही संसार की सभी समस्याओं का हल मानने वाले क्या इससे कुछ सबक लेंगे??

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  2. हमारे यहाँ भी क्या कोई पार्टी ऐसा करने का साहस करेगी ?
    अपने नेता और अफसर पर भी जरा ध्यान दीजिये मित्र
    यहाँ ज्यादा मिलेगी
    शाम को यही तो महफ़िल गुलजार करते है
    बाकी तो बस बदनाम है

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  3. अरुण जी की टिप्पणी से सहमत।

    प्रदूषित साम्यवादी विचारधारा जिसमें all are equal but some are more equal से सहमति, स्वीकार और आचरण हो वहाँ ऐसा क्षरण एक तार्किक परिणति है। चूँकि ऐसा एक आदर्शवादी विचारधारा पर स्थापित तंत्र में हो रहा है इसलिए अधिक glaring लग रहा है। भारतीय सन्दर्भ में देखें तो जैसे पुजारी रखैल रखे। ...
    हाँ, हम तो मान बैठे हैं कि राजनेता ऐसे ही होते हैं या उनके लिए यह क्षम्य है। दुर्भाग्य है कि हमारी सारी नैतिक स्थापनाएँ धर्म की ओर ताक लगाए बैठी रहती हैं। . .

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  4. शर्मनाक खबर !
    सच्चाई में शर्मनाक क्या है, भई.
    माओ त्से तुंग की रंगीनमिजाज़ियां नहीं पढ़ीं शायद.

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  5. राजनीति और रखैल तो बहुत पुराना साथ है . अपने दिल्ली मे ही कई या कहे अधिकतर नेता रखैले मैन्टेन करते है .

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  6. ब्लॉग और टिप्पणी इजाजत नहीं देते वरना खास राजनैतिक पार्टियों की नेत्रियों की ऐसी चटखारेदार खबरें दूं कि रखैलें भी शर्माकर पानी-पानी हो जायें… :) चीन में तो एक ही पार्टी का शासन है, ठीक वैसे ही जैसे 30 साल से बंगाल में एक पार्टी का है… तो भाई कहने का मतलब ये कि रखैल रखना एक शान की बात समझी जाती है राजनीति में…। दिक्कत तब पैदा होती है जब बुढ़ापे में नारायणदत्त तिवारी जैसी हालत हो जाये…

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  7. Basic Instincts do not differentiate between left and right and no one in power can rise above them. China is equally corrupt in this respect .

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  8. आश्चर्य तो बिल्कुल नहीं हुआ। कम्यूनिष्ट होने से क्या उन्हें कमीना और व्यभिचारी होने पर रोक लग गयी? लालच और आसक्ति किसी को भी बर्बाद कर सकती है। क्या कम्यूनिष्ट और क्या दक्षिणपन्थी।

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