जगदीश्वर चतुर्वेदी-आम तौर पर हिन्दी में पढ़े लिखे लोग गालियों का खूब प्रयोग करते हैं। हम उसे तरह-तरह से वैध बनाने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन कायदे से हमें अश्लील भाषा के खिलाफ दृढ़ और अनवरत संघर्ष आरंभ करना चाहिए। यह काम सौंदर्यबोध के साथ शैक्षिक दृष्टि से भी जरूरी है।इससे हम भावी पीढ़ी को बचा सकेंगे। आपकी क्या राय है ।

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