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बुधवार, 27 जुलाई 2016

नामवरजी की इतिहास से शत्रुता

       आम्बेडकर की जयन्ती मोदी सरकार मना रही है, मोदी-मोहन भागवतजी आम्बेडकर पर सुंदर बातें कह रहे हैं।लेकिन आचरण एकदम दलितविरोधी कर रहे हैं।राजनीति में आचरण प्रमुख है, विचार गौण होते हैं। 90वें जन्मदिन के नाम पर 28जुलाई 2016 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में नामवरजी क्या बोलते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है,महत्वपूर्ण है आरएसएस के लोगों का इस संग्रहालय की आड़ में जन्मदिन मनाना।उसमें नामवरजी का जाना महत्वपूर्ण है।इस आयोजन को नामवरजी द्वारा दी गयी स्वीकृति महत्वपूर्ण है।सवाल यह है आचरण की बातों पर नामवरजी के भक्तगण ध्यान क्यों नहीं दे रहे ? सवाल यह है नामवरजी के निर्माण में किनका खून-पसीना-विचारधारा और पैसा लगा है ?

नामवरजी सार्वजनिक बौद्धिक संपदा का अंग हैं ।वे पूजा की नहीं आलोचना की मूर्ति हैं ! जब उनकी आलोचना हो रही है तो भक्तों को परेशानी क्यों हो रही है ? हम इसलिए परेशान हैं क्योंकि नामवरजी सीधे आरएसएस के साथ गलबहियां देकर घूम रहे हैं।यह जनता और प्रगतिशील साहित्य के खिलाफ सबसे घिनौना कदम है।

यह कोई नामवर पुराण नहीं है।नामवरजी लेखक हैं,वे गल्पपुरूष नहीं हैं,उनके कर्म के मूल्यांकन के मकसद से उनसे फेसबुक के जरिए संवाद है।उनके भक्तों से संवाद है।मौजूदा समय से संवाद है।

हमें कोई आपत्ति नहीं है वे किसे नौकरी देते हैं,किसकी सेमीनार में बोलने जाते हैं,क्या बोलते हैं,वे सरकार से जुड़ें या न जुड़ें,हमें इस सबसे कोई आपत्ति नहीं है, वे यह काम करते रहे हैं,हमने कभी नहीं बोला।हमारी आपत्ति यह है कि नामवरजी ने अपना जन्मदिन मनाने के लिए आरएसएस को अनुमति क्यों दी ॽ नामवरजी उनको अनुमति न देते तो क्या छोटे हो जाते ॽ

मोदीजी के पीएम बनने के पहले से नामवरजी ने संघ की ओर मुँह किया था,हमने तब भी आगाह किया था, फिर कर रहे हैं,यह जनता के साथ गद्दारी है।हम उन लेखकों से भी अपील करते हैं जो अब तक चुप हैं ,नामवरजी के वहां जाने से क्या वे सहमत हैं ॽ यदि हां तो खुलकर कहें कि उनका स्टैंड क्या है ॽयह क्या बात हुई कि नामवरजी का जन्मदिन आरएसएस नियंत्रित संस्था मनाए और आपकी कोई राय ही न हो,क्या हम यह मानें कि आपलोगों का उनको समर्थन है ॽ

कई मित्रों ने कहा काहे को नामवरजी के पीछे पड़े हो? हमने कहा वे हमारे शिक्षक हैं।हमें पूरा हक़ है उनसे सवाल करने, उनके लिखे और बोले पर सवाल करने का। हमने यह भी कहा वे फेसबुक पर हमारे प्रिय व्यक्तित्व हैं,इसीलिए उन पर लिख रहे हैं,दूसरा वे हमारे लिखे का बुरा नहीं मानते!

अफसोस है नामवरजी ने ब्रेख्त की परंपरा छोड़कर एजरा पाउण्ड -हाइडेगर की परंपरा में जगह बना ली है।

मैं जानता हूँ हिन्दी के बूढ़े लेखक मेरी बात नहीं सुनेंगे,वे अपनी सत्ता की आदतों मे मगन हैं,हम तो असल में फेसबुक के जरिए युवा मित्रों से संवाद कर रहे हैं जिससे वे सत्ता की आदतों के शिकार न हों,यही छोटा सा लक्ष्य है,नामवरजी तो बहाना मात्र हैं,नामवरजी की सत्ता की आदतों को मैं छात्रजीवन से जानता हूँ और उनको समय-समय पर बेनकाब करता रहा हूं।

फेसबुक पर नामवरजी के जो भक्त सक्रिय हैं हम उनसे अनुरोध करेंगे कि नामवरजी की हिमायत करते हुए कम से कम जन्मदिन आने तक नामवरजी पर रोज़ एक लेख लिखो ।



नामवरजी पर सब लोग जानें कि भक्तगण कितना नामवरजी को जानते हैं।नामवरजी के नाम पर जाहिलगिरी बंद होनी चाहिए। नामवरजी विद्वान हैं उनका लिखा सहज रूप में उपलब्ध है, आसानी से उसे पढ़कर ही लिखो,कम से कम मोदी के भक्तों की तरह नामवरजी के भक्त न बनो! लेकिन अफसोस है नामवरजी ने भी तो मोदी की तरह भक्त ही पैदा किए हैं!!

बुधवार, 6 जुलाई 2016

मंत्रीमंडल परिवर्तन नहीं यह करप्शन प्रबंधन है-

         मोदीजी के मंत्रीमंडल में नए फेरबदल में खुश होने लायक कुछ नहीं है,सारे मंत्री स्मृति ईरानी जैसी औसत बुद्धि के ही हैं,सबकी बौद्धिकता और निकम्मेपन का स्तर ईरानी के बराबर है।हावर्ड से लेकर गुजरात वि वि तक के जो भी स्नातक भाजपा में सांसद हैं वे सब "न्यूनतम बौद्धिक -अधिकतम संघी" के साँचे में ढले हैं।
मंत्री पद के लिए जिस बुद्धि-विवेक और साहस की दरकार होती है वह भाजपा सांसदों में दूर-दूर तक नहीं है।बुद्धि-विवेक और साहस में यदि भाजपा अग्रणी दल होता तो वह अपना नेता नरेन्द्र मोदी को नहीं चुनता।इसलिए स्मृति ईरानी के हटने से खुश न हों।दूसरी बात यह कि मोदीजी सांसद की क्षमता के हिसाब से मंत्री पद पर नहीं चुनते ,वे निजी वफादारी के आधार पर मंत्री चुन रहे हैं।जो सांसद निजी तौर पर मोदी के प्रति वफादार है,उसे वे सब कुछ देने को तैयार हैं।
कल मैं मोदीजी के परम मित्र और उद्योगपति सुनील अलग और भाजपा प्रवक्ता को टाइम्स नाउ पर सुन रहा था,सुनकर हंसी आ रही थी।किस तरह भांडों की तरह मोदीजी के हर चयन को महान चयन बताने में ये दोनों प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।दिलचस्प बात यह है कि स्मृति ईरानी ने नई शिक्षा नीति का मसौदा जारी किया मोदीजी ने उनको मंत्रालय से हटाकर अन्यत्र भेज दिया,सदानंद देवगौडा के मंत्रालय का सुप्रीमकोर्ट के साथ विगत कई महिनों से टसल चल रहा है,नया टसल सिविल कोड है। बेचारे मंत्री का मंत्रालय बदल दिया। यही हाल कमोबेश हर मंत्रालय का है।जो नम्बर एक घूसखोर है संसद में घूस के नोट के साथ मिला उसे मंत्री बना दिया।
हालात यह है अरूण जेटली का वित्तमंत्रालय सबसे खराब काम कर रहा है लेकिन उनको मंत्रीमंडल से बाहर करने की क्षमता मोदीजी में नहीं है। इसका प्रधान कारण है कि भाजपा में शामिल प्रत्येक भ्रष्ट सांसद ताकतवर है ,मोदीजी को इन भ्रष्ट सांसदों में से ही चुनना है ,जो मंत्रीमंडल में आ जाता है वह सहज ही जाता नहीं है।जिन मंत्रियों पर अदालत में संगीन जुर्म में केस चल रहे हैं उनको मंत्रीमंडल से विदा करने में मोदी जैसे शक्तिशाली पीएम को दो साल लगे हैं,इससे मोदीजी की कमजोरी जाहिर होती है,इसी तरह यदि वैंकेय्या नायडू यदि संसदीय मंत्री के रूप में बेहतर काम नहीं कर पाए तो उनको मंत्रीमंडल से निकालने का साहस मोदी में नहीं है,स्मृति ईरानी ने सबसे घटिया ढ़ंग से मंत्री के रूप में काम किया लेकिन उनको मंत्रीमंडल से निकालने की ताकत आरएसएस में नहीं है।जिस मंत्री का 2साल बाद विभाग बदला गया है वह निश्चित तौर पर काम की कसौटी पर खरा नहीं उतरा ,फलतःउसे मंत्रीमंडल के बाहर होना चाहिए,लेकिन वे ऐसा करने की स्थिति में नहीं हैं।

डाक्टर,वकील,पीएचडी धारी मोदीजी के मंत्रीमंडल में हैं इससे क्या बताना चाहते हैं मीडियावाले।यदि कहना चाहते हो कि मोदीजी के मंत्रीमंडल में पढ़े लिखे लोग हैं तो यह कौन सी बड़ी बात है।यह कोई देश पर एहसान नहीं है,सवाल यह है क्या कोई मंत्री स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता रखता है,किसी को आजादी है,जान लो मोदी के मंत्रीमंडल में सिर्फ मोदी को ही काम करने की आजादी है और मोदीजी तो इतने शर्मीले हैं कि अपनी बीए,एमए, की डिग्री तक नहीं दिखा रहे।
पूरा देश इस समय एक ऐसा व्यक्ति चला रहा है जिसके पास कोई डिग्री नहीं है और डिग्री दिखाने में उसे शर्म आती है,यही वजह है गुणी लोग उसके मंत्रीमंडल में बंधकमंत्री की तरह काम कर रहे हैं।जो मंत्री बंधक हैं वे डिग्रीधारी नहीं हो सकते,संविधान की सबसे डिग्री है स्वतंत्र और स्वायत्त मंत्री की और यह डिग्री मोदीजी के अलावा आरएसएस ने किसी को नहीं दी है।

एक अन्य चीज जो नजर आई वह यह कि मोदीजी अपने सहयोगी सांसदों की योग्यता से वाकिफ नहीं हैं या अतिरिक्त प्रेम होने के कारण उनको मंत्री बनाकर लेकर आए थे,मसलन् ,वीके सिंह और अकबर का क्या काम है विदेश मंत्रालय में,विगत दो साल में वीके सिंह की कोई भूमिका नहीं रही,फिर भी बने हुए हैं।
सिर्फ भाजपा संसदीय दल में आंतरिक असंतोष को दबाए रखने के लिए मौजूदा परिवर्तन किया गया है।इस समय स्थिति यह है कि भाजपा के सांसदों में हर दूसरा सांसद मंत्री है या मंत्री पद की सुविधा का विभिन्न तरीकों से लाभ ले रहा है।इस तरह लाभ बांटकर मोदीजी भ्रष्ट भाजपा को टूटने से बचाए हुए हैं।



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