जगदीश्वर चतुर्वेदी। कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर। पता- jcramram@gmail.com
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सोमवार, 28 जुलाई 2014
मोदी बाबू के कमाल के ६० दिन-
एक तरफ़ हाफ़िज़ सईद से अपने दूत के ज़रिए गप्पें ! दूसरी ओर सईदभक्त आतंकियों की घुसपैठ और सीमा पर निरंतर गोलीबारी!
एक तरफ़ संसद में सर्वधर्म सद्भाव की नक़ली अपील ! दूसरी ओर मुरादाबाद में नए क़िस्म के मुज़फ़्फ़रनगर मार्का 'सद्भाव'की अथक कोशिश ! अहर्निश संविधान की मूलभावनाओं भाजपा और सहयोगी दलों के घटिया वैचारिक हमले !
एक तरफ़ देश को स्वच्छ प्रशासन का गुजरात के नाम पर भरोसा !दूसरी ओर गुजरात में नौ हज़ार करोड़ रुपयों के खर्चे का हिसाब किताब न देना !
सीएजी के अनुसार रिलायंस-अदानी आदि को सारे क़ानून तोड़कर लूट में हज़ारों करोड़ रुपयों की मदद करना !
एक तरफ़ संविधान के अनुसार काम करने का वायदा दूसरी ओर संवैधानिक नियमों और क़ायदों का सरेआम उल्लंघन !
एक तरफ़ देशभक्ति का नक़ली नाटक दूसरी ओर विगत ६० दिनों में पाक फ़ायरिंग में मारे गए शहीदों के घर मोदी बाबू का न जाना !
एक तरफ़ चुनाव के समय सोनिया- राहुल - वाड्रा के ख़िलाफ़ नक़ली मंचीय नाटक और इधर साठ दिनों में इनके 'अवैध 'धंधों पर हमले न करना !
महँगाई का बढ़ना , ख़ासकर टमाटर का १००रुपये के पार पहुँच जाना आदि बातें हैं जो मोदी को सबसे निकम्मा और ग़ैर-भरोसेमंद पीएम बना रही हैं।
दिल्ली में नार्थ -ईस्ट के लोगों पर हमलों में इज़ाफ़ा और बलात्कारों का न रुकना बताता है कि लोकतंत्र में प्रचार के नाम पर टीवी और मीडिया उन्माद के ज़रिए जनता से ठगई की गयीहै।
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