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रविवार, 20 जून 2010

फेसबुक,माइक्रोसॉफ्ट और याहू के यूजरों की संख्या घटी



      नेल्सन के सर्वे में पाया गया है कि ज्यादातर ऑनलाइन ब्राण्डों पर यूजरों का समय घटा है। यूजरों ने नेट पर अप्रैल 2010 में कम समय गुजारा है। यह बात विश्वविख्यात संस्था नेल्सन कंपनी के ताजा सर्वे में सामने आयी है। यूजरों ने गूगल पर समय ज्यादा गुजारा है। इसके विपरीत याहू की संपदा में 6.9 प्रतिशत गिरावट आयी है। माइक्रोसॉफ्ट की संपदा में 4.2 प्रतिशत और फेसबुक की संपदा में 3.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है।नेट पर सक्रिय टॉप 10 ब्रॉण्डों में सिर्फ गूगल ही एकमात्र कंपनी है जिसके यूजरों ने गूगल पर अप्रैल 2010 में ज्यादा समय गुजारा है। यू ट्यूब का औसत रिकार्ड रहा है। यू ट्यूब पर प्रति यूजर ने एक घंटा पांच मिनट पचास सैकिण्ड गुजारा है अप्रैल महिने में 9 प्रतिशत ज्यादा समय यू ट्यूब पर खर्च किया है। फेसबुक पर प्रति यूजर ने औसतन 7 घंटे गुजारे। सोशल नेटवर्क पर मार्च की तुलना में 4.5 ज्यादा यूजर आए। जबकि माइक्रोसॉफ्ट और याहू के यूजरों की संख्या में गिरावट आई।

शुक्रवार, 7 मई 2010

माइक्रोसॉफ्ट ने घुटने टेके भारत कब जागेगा

     यूरोपीय आयोग की सिफारिश के आधार पर माइक्रोसॉफ्ट ने फैसला लिया है कि वह सर्च के डाटा को 6 माह के बाद नष्ट कर देगा। माइक्रोसॉफ्ट ने यह फैसला यूरोपीय यूनियन के द्वारा सन् 2008 में बनाए वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों के आधार पर लिया है।
      अभी तक यह होता था कि माइक्रोसॉफ्ट के सर्च ईंजन में जाने वालों के  आईपी एड्रेस माइक्रोसॉफ्ट के पास रहते थे और वह इनका चोरी छिपे दुरुपयोग कर रहा था इसे निजी सूचनाओ के दुरुपयोग की केटेगरी में देखा गया।
     माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सर्च ईंजन के डाटा पिछले दिनों चीन सरकार को भी उपलब्ध कराए हैं जिसके आधार पर चीन सरकार का विरोध करने वालों  और तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष करने वालों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी हुई है।  ईमेल और दूसरे ‘ई’ संचार के उपकरणों की स्थान विशेष के संदर्भ में निशानदेही करने साथ चीन में अनेक मानवाधिकार कार्यकर्त्ता पकड़े गए हैं।
     यूरोप में भी माइक्रोसॉफ्ट अपने सर्च ईंजन के डाटा का राजनीतिक हिसाब-किताब बराबर करने और व्यवसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रहा था। यूरोपीय यूनियन ने सन् 2008 में ‘आर्टिकल 29 वर्किंग ग्रुप ’ नामक संगठन का गठन किया और इसमें समूचे यूरोप के डाटा संरक्षण के काम से जुड़े कई अफसरों को भी शामिल किया गया।
     ‘आर्टिकल 29 वर्किंग ग्रुप’ ने याहू,गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने अधिकारियों के साथ विस्तार के साथ बातचीत की और यह फैसला लिया कि इन कंपनियों को यूरोप के प्राइवेसी कानूनों का पालन करना होगा।  बाद में ‘आर्टिकल 29 वर्किंग ग्रुप ’ के आदेश पर यह तय पाया गया कि ये तीनों कंपनियां अपने सर्च ईंजन के ऑनलाइन डाटा को 6 माह के बाद नष्ट कर देंगी।
      इस आदेश के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सर्च ईंजन बिंग को नए ढ़ंग से नियोजित किया है। अभी तक याहू और गूगल ने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं यह साफ नहीं है। उल्लेखनीय है कि इलैक्ट्रोनिक प्राइवेसी इनफोर्मेशन सेंटर ने यूरोपीय यूनियन के देशों से अनुरोध किया था कि वे प्राइवेसी कानूनों का ख्याल रखें और सर्च ईंजन के मालिकों पर दबाब ड़ालें कि वे यूरोपीय देशों के प्राइवेसी कानूनों का पालन करें।
      माइक्रोसॉफ्ट का यूरोपीय कानूनों के सामने झुकना इस बात का संकेत है कि सरकारें यदि चाहें तो जनता की ‘ई’ प्राइवेसी की रक्षा कर सकती हैं। क्या भारत सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी और भारत के प्राईवेसी कानूनों को मानने के लिए इंटरनेट कंपनियों को मजबूर करेगी ?             





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