शनिवार, 17 जनवरी 2015

किरनबेदी का भगवा स्वप्नलोक



दिल्ली विधानसभा चुनाव में किरनबेदी क्या करेंगी यह वे नहीं मोदी तय करेंगे ! इसलिए मोदी के परिप्रेक्ष्य में किरन बेदी को देखा जाय तो बेहतर होगा। मोदी बुनियादी तौर पर लोकतंत्र का विलोम है । वे लोकतंत्र की नकारात्मक प्रवृत्तियों के पुंज पुरुष हैं। 

   लोकतंत्र की नकारात्मक प्रवृत्तियाँ हैं दल-बदल , अनाप-शनाप ख़र्चा करना, नियमों और क़ानूनों को न मानना, अपराधीकरण को संरक्षण देना, हर क़िस्म की स्वायत्तता का निषेध करना,सिस्टम को अंदर से तोड़ना। संयोग से इन सभी प्रवृत्तियों का संगम नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली में देखने को मिलता है । केन्द्र सरकार में ऐसे लोग मंत्री पद की शोभा बढा रहे हैं जिनके ऊपर विभिन्न क़िस्म के आपराधिक मामले चल रहे हैं, सजाएं बोली जा चुकी हैं। देश में इस तरह के मंत्रियों की कल्पना किसी ने नहीं की थी। इसी तरह निर्लज्जता के साथ बैंकों के काम में पीएम आफिस सीधे हस्तक्षेप कर रहा है। भाजपा और मोदी के दबाव के चलते मीडिया का एक बड़ा हिस्सा पंगु बना दिया गया है ! मनमाने ढंग से योजना आयोग को ख़त्म किया गया है, योजना बनाना बंद कर दिया है।सेंसरबोर्ड और दूसरी स्वायत्त संस्थाओं को तोड़ा जा रहा है। तमाम क़िस्म के अपराधी और माफ़िया गिरोहों को केन्द्र का खुला समर्थन है। स्वयं मोदी माफ़िया किंग दाऊद इब्राहीम के भाई के साथ पब्लिक मीटिंग कर चुके हैं। खुलेआम अदानी-अम्बानी के विमानों का चुनाव में इस्तेमाल कर चुके हैं। 
     मोदी के आने के बाद विभिन्न तरीक़ों से दल-बदल को बढ़ावा दिया गया है और विभिन्न दलों के नेताओं को भाजपा में लाने की कोशिश की जा रही है। भाजपा के इतिहास में सबसे ज्यादा दलबदलू नेता मोदीयुग में ही भाजपा में दाखिल हुए हैं ।केन्द्र के सभी मंत्रालयों की स्वायत्तता ख़त्म करके सभी मंत्रालयों को नीतिगत फ़ैसलों के मामले में पीएम कार्यालय के मातहत कर दिया गया है। करप्शन के सवाल पर बोलना प्रतिबंधित है। यही वो परिप्रेक्ष्य है जिसमें किरनबेदी ने मुख्यमंत्री पद की डील के तहत भाजपा की सदस्यता ली है। 
           किरनबेदी ने नवभारत टाइम्स को दिए पहले साक्षात्कार में भ्रष्टाचार के मसले को अपने प्रमुख पाँच भावी कार्यों में शामिल न करके यह साफ़ कर दिया है कि वे भविष्य में भ्रष्टाचार के सवाल पर संघर्ष नहीं करेंगी। उनके पाँच लक्ष्यों में बिजली,महँगाई , पानी,बेकारी और शिक्षा की समस्याएँ भी नहीं आतीं, यहाँ तक कि दिल्ली की जनता की झुग्गी झोंपड़ी की समस्याएँ भी उनके निशाने पर नहीं हैं। 
       किरनबेदी ने कहा है -
"अगर मैं सीएम बनती हूं तो 5 पी पर काम करूंगी। पहला पी यानी पीपल, इसमें पैरंट्स अपने बच्चों को अच्छी नैतिक बातें सिखाएं, स्कूल बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें। दूसरा पी यानी पॉलिटिक्स, अगर अच्छे नेता होंगे तो लोगों को अच्छा प्रशासन और कानून मिल सकेगा। नेताओं का काम ही नीति, नियम और रेगुलेशन बनाने का है। तीसरा पी यानी पुलिस, दिल्ली पुलिस अच्छा काम कर रही है लेकिन उसमें सुधार की जरूरत है। अगर दिल्ली में 1 लाख पुलिस वाले हैं तो उसके आधे सिविल डिफेंस वाले लोग भी जुड़े होने चाहिए। सिविल डिफेंस को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के तहत लाया जाएगा। अभी सब बिखरा है उसे एक मुट्ठी में बांधा जाएगा। एक मुट्ठी में पुलिस तो दूसरी मुट्ठी में सिविल डिफेंस होगी।"

"चौथी पी यानी प्रोसिक्यूशन, इसमें लोगों को शीघ्र न्याय मिल सके इसके लिए फास्ट ट्रायल होगा। पांचवां पी प्रिजन होगा। जेलों में सुधार के कार्यक्रम चलाए जाएंगे। जेलों में रेप के आरोपी बढ़ते जा रहे हैं। उनमें सुधार लाने के लिए जरूरी है कि इस तरह के सुधार के कार्यक्रम जेल में चलाए जाएं ताकि वे फिर से अपराध की दुनिया में ना जाएं।"
       कहने का आशय यह है कि किरनबेदी के निशाने पर अब वे काम हैं जो इन दिनों दिल्ली की बृहत्तर आम जनता के मसले नहीं हैं ये तो सिस्टम के मसले हैं । इसका अर्थ यह भी है कि भाजपा खुले तौर पर कह रही है कि वह दिल्ली में सरकार में आती है तो बिजली, पानी, महँगाई, बेकारी, गंदगी, शिक्षा आदि जन समस्याएँ उसकी प्राथमिकता में नहीं होंगी। 
               किरनबेदी जो कह रही हैं वह मोदी की भी राय है क्योंकि वे मोदी से आशीर्वाद लेकर आई हैं और उनके ही इशारों पर सब कुछ कह रही हैं। किरनबेदी की भाषा और बयान अब भाजपा और मोदी के बयान माने जाएँगे। वे साफ़गोई के साथ कह रही हैं कि भाजपा वे अपना अतीत सुधारने आई हैं। यानी वे अतीत को लेकर जिस कष्ट में रही हैं उससे मुक्त होना चाहती हैं । अतीत से मुक्ति के लिए एक धाकड अफ़सर को संघ से बेहतर कोई आश्रम कहीं और मिल भी नहीं सकता! 
         

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