सोमवार, 12 जनवरी 2015

पीएम मोदी की असफल ट्विटर क्रांति

        
पीएम नरेन्द्र मोदी का 'ट्विट' भी बहुत ही मनमौजी है।वे जब से प्रधानमंत्री बने हैं उनके 'ट्विट' ने देश-विदेश की समस्याओं पर बोलना बंद कर दिया है। लोकसभा चुनाव के समय उनके 'ट्विट' का जो रुप था वह रुप पीएम बनते ही बदल गया है। असल में 'ट्विट' नहीं बदला है,'ट्विट' करनेवाला बदल गया है। नरेन्द्र मोदी जब से पीएम बने हैं उनके 'ट्विट' में अधिकांश समय शोक-संदेश, शुभकामना संदेश ही आ रहे हैं।

     मोदीजी का 'ट्विट' में अब कोई भी बात कहने का मन नहीं करता।देश में बहुत कुछ ऐसा घट रहा है जो पहले उनकी 'ट्विटचिन्ता' में था लेकिन अब उनकी 'ट्विटचिन्ता' में नहीं है ? कोई पत्रकार उनसे पूछ नहीं सकता कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि देश में बड़ी-बड़ी घटनाएं घट रही हैं लेकिन मोदी जी कभी कोई बयान नहीं देते ! कभी संसद के गेट पर प्रेस के सवालों का जबाव तक नहीं देते। संसद में नहीं बोलते,ट्विट में नहीं बोलते।

स्थिति यह है कि भारत किसानों की आत्महत्याएं जारी हैं,लेकिन मोदी का ट्विटर मौन है ! बैंक और कोयला श्रमिकों की हड़ताल हुई ट्विटर मौन रहा ! जम्मू-कश्मीर में सरकार नहीं बन पायी ट्विटर मौन है! हम जानना चाहते हैं क्या पीएम को बोलने की आजादी नहीं है ? यदि है तो पीएम बोलते क्यों नहीं ? मोदी जिस मौन को लेकर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को मौनीबाबा कहते थे इन दिनों स्वयं मौनीबाबा बने बैठे हैं ! यही लिखें ट्विट में –पीएम मायने मौनीबाबा !!

मोदीजी आप सिर्फ आमसभा में बोलेंगे ,नायककेन्द्रित मंचों पर बोलेंगे,यह तो काम मनमोहन सिंह भी करते थे। लेकिन आपने तो ट्विटर के जरिए संवाद का जनता से वायदा किया था लेकिन सात महिने होने को आए आपको ट्विटर पर संवाद करते नहीं देखा गया ! मजेदार बात यह है कि आपके मंत्री परिषद के सदस्य भी ट्विट करके संवाद नहीं करते। यह सब देखकर हम कैसे उम्मीद करें कि ट्विटर के अच्छे दिन आ गए हैं ?

हम सोचते हैं मोदीजी के इतनी बड़ी विशाल संख्या में ट्विटर अनुयायी हैं और उनके स्वच्छता अभियान की ट्विट पढ़ने के बाद उनमें से दस फीसदी भी अनुयायी जमीन पर सक्रिय नहीं हुए। किसी ने फेसबुक पर लिखा भी कि पीएम के मैदान में उतरने बावजूद बनारस में स्वच्छता की स्थिति बेहतर नहीं है। मैं कोलकाता में रहता हूँ यहाँ आपके अनुयायियों और ट्विटरभक्तों की संख्या भी काफी है लेकिन स्वच्छता अभियान की ट्विट का कोई असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा। यहां तक कि देश के मुख्यमंत्रियों पर भी कोई असर नहीं पड़ा है, देश गंदा था और गंदा है। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि आपकी स्वच्छता ट्विट इतनी प्रभावहीन क्यों हो गयी ? जिस ट्विट ने लोगों को मतपेटियों तक पहुँचा दिया ! उन्हीं लोगों को आपकी ट्विट कूड़े के ढ़ेर तक नहीं ले जा पाए !

मैं आपकी ट्विट की असफलता से दुखी हूँ,सच मानें मैं पहला लेखक था मैंने काफी पहले पूर्व प्रधानमंत्री और उनके मंत्रीमंडल से अपील की थी नेट पर आओ, ट्विटर पर आओ,बाद में मनमोहनजी आए भी,लेकिन अन्य मंत्री भागते रहे। लेकिन जब से आप केन्द्र की राजनीति में आए और आपने ट्विटर का जमकर प्रयोग करना शुरु किया मैं खुश था कि चलो कोई पीएम आया जिसको संचार तकनीकी के इस्तेमाल की समझ है,लेकिन आपने भी मुझे निराश किया है।

मोदीजी आप जान लें ट्विटर में रहें तो धारावाहिकता रखें,निरंरतर सवाल उठाएं,बहसें चलाएं,संगी-साथियों को भी दिशा दें। उनसे भी कहें कि वे आपके बताए मसलों पर बहस करें। लेकिन यहां मैं सब कुछ उलटा देख रहा हूँ ,आप ट्विटर पर बहस नहीं चला रहे, आपकी काम की ट्विट का कोई असर ही नहीं हो रहा। यह कैसा चमत्कार है कि आपकी ट्विट असरहीन हो गयी है ! खासकर स्वच्छता अभियान वाली ट्विट तो जमीनी स्तर पर गायब है। जितने भी पायखाने बनने हैं या बन रहे हैं वे तो एक सर्कुलर से भी बनवाए जा सकते थे। मैं दुखी इस बात से भी हूँ कि भाजपा जैसा 'कर्मठ दल' एकसिरे से सड़क सफाई अभियान से नदारत है ! दिल्ली नगर निगम से लेकर बनारस की महानगरपालिका तक आपके ट्विट का कोई असर नजर नहीं आ रहा। आपसे अपील है कि कुछ करें जिससे आपके ट्विट में जान आए ! आपके ट्विट को ईश्वर वचन के रुप में जनता ग्रहण करे ! कम से कम संघ के लोग तो पहले गंभीरता से आपके अभियान से जुडें।

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