शनिवार, 6 नवंबर 2010

ओबामा असुरक्षित महसूस क्यों करते हो ?

   अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा आज दोपहर में भारत पहुँच रहे हैं । यहां उनका भव्य स्वागत होगा। हम खुश हैं कि वे हमारे देश आ रहे हैं । मेरे मन में सवाल उठ रहा है कि वे इतने तामझाम के साथ क्यों आ रहे हैं ? क्या हमारे देश में उनकी सुरक्षा और जरूरत की चीजें नहीं हैं ? क्या भारत इतना गरीब देश है कि अमेरिका के राष्ट्रपति का शानदार स्वागत नहीं कर सकता ? क्या तामझाम से सुरक्षा मिलती है ? या जनता सुरक्षा देती है ? ओबामा नहीं जानते या जानना नहीं चाहते कि भारत कितना समर्थ देश है ।
     हमारे देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति अमेरिका या विदेश जाता है तो अपने साथ ज्यादा तामझाम नहीं ले जाता। लेकिन अमेरिका का राष्ट्रपति यदि कहीं जाता है तो विशाल तामझाम के साथ क्यों जाता है ? इकोनॉमिक टाइम्स ( 6नबम्वर 2010)  ने लिखा है ओबामा के आने के पहले से 13 अमेरिकी हवाई जहाज,चार हेलीकोप्टरों से विभिन्न किस्म के उपकरणों को यहां लाया गया है। 40 शानदार गाडियां लायी गयी हैं। जो मुंबई और दिल्ली में रहेंगी। इसके अलावा 34 युद्धपोत समुद्री मार्ग की निगरानी कर रहे हैं। 500 लोगों का भरोसेमंद स्टाफ भी साथ आया है जिसमें जासूस हैं,समुद्री जासूस हैं, अर्द्धसैनिक अफसर हैं,राष्ट्रपति भवन के अफसर हैं। संचार के अत्याधुनिक उपकरणों का पूरा तामझाम अमेरिका से यहां लाया गया है । अमेरिका की परमाणु बटन को भी लाया गया है।
     इसके अलावा अमेरिकी व्यापारियों,पत्रकारों और अन्य लोगों का विशालतम जत्था अन्य विमानों,निजी विमानों से साथ में आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन की स्थिति यह है कि वे मुंबई हवाई अड्डे के हवाई नियंत्रण को स्वयं संभालना चाहते हैं,उन्होंने मांग की है कि जब तक ओबामा यहां हैं एयर टॉवर का नियंत्रण उन्हें दे दिया जाए। भारत सरकार ने उनके इस अनुरोध को नहीं माना है लेकिन अमेरिकी अधिकारियों को एयर टॉवर में मौजूद रहने की अनुमति दे दी है लेकिन एयर नियंत्रण का काम भारतीय कर्मचारी ही करेंगे।
   ताज होटल में 800 कमरे बुक किए गए हैं। दो जेट विमानों से सुरक्षा उपकरणों को लाया गया है। मुंबई में ओबामा के साथ 40 कार रहेंगी वे भी अमेरिका से ही लायी गयी हैं। ऐसी ही व्यवस्था दिल्ली में रहेगी।
     इस सारे ब्यौरे को पढ़ने के बाद लग रहा है कि भारत बहुत गरीब देश है। यहां ओबामा के लायक न गाड़ियां हैं,न सुरक्षा व्यवस्था है और न हवाई और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त लोग ही हैं।
    मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ओबामा अतिथि के रूप में आ रहे हैं या भारत पर चढ़ाई करने के लिए आ रहे हैं ? अपने भारी बंदोवस्त को दिखाकर वे किसे आतंकित या प्रभावित करना चाहते हैं ? क्या वे नहीं जानते कि उनका देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उन्हें फिजूलखर्ची से बचना चाहिए ?
      क्या वे नहीं जानते कि भारत में उनकी सुरक्षा के सभी इंतजाम करने की क्षमता है। वे दोस्त की तरह आ रहे हैं तो उन्हें अपने भारत दोस्त पर भरोसा करना चाहिए। लेकिन उनका इतने तामझाम के साथ आना इस बात का संकेत है कि वे दोस्त के रूप में भारत पर विश्वास नहीं करते।
    हम समझ नहीं पा रहे हैं अतिथि के साथ युद्धपोत और परमाणु बटन का क्या काम ? यह सारा तामझाम इस बात का संकेत है कि अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति आज दुनिया में सबसे असुरक्षित है। ओबामा तुम्हें इस सवाल पर सोचना चाहिए कि तुम्हें ही इतनी असुरक्षा क्यों सता रही है ? भारत में और भी देशों के अतिथि राज्याध्यक्ष के रूप में आते हैं लेकिन वे सामान्यतौर पर आते -जाते हैं। उनकी सुरक्षा का सारा इंतजाम भारत सरकार करती है। किसी की सुरक्षा में कभी कोई गड़बड़ी नहीं हुई। लेकिन ओबामा तुम अपने को इतना असुरक्षित महसूस क्यों कर रहे हो ?  क्या यह अमेरिका की विश्व जनमानस में बढ़ती अलोकप्रियता का संकेत है ?





5 टिप्‍पणियां:

  1. चतुरवेदी जी, इसी सोच के चलते अमेरिका में ९/११ के बाद कोई भीषण हमला नहीं हुआ.. वे हमारी तरह लापरवाह नहीं हैं.. हमें उनसे सीख लेने की आवश्यकता है..

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  2. "चतुर"वेदी जी,
    भारतीय नागरिक से सहमत होते हुए कहना चाहूंगा कि जब भारत के प्रधानमंत्री किसी गरीब अफ़्रीकी देश के दौरे पर जाते हैं तब भी यही सब होता है, भले ही कुछ कम मात्रा में होता है…

    क्या आप वाकई इस बात से मुतमईन है कि ओबामा की पूरी सुरक्षा भारतीय एजेंसियां कर लेंगी? उनकी और हमारी मानसिकता (खासकर देश के फ़ायदे और अपनी जनता के बारे में सोचने) में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है। विदेश में एक अमेरिकी नागरिक मारा जाता है तो "पहलवान" दुनिया हिला डालता है, इधर तो बांग्लादेश और नेपाल जैसे दो कौड़ी के देश हमारे जवानों को गाहे-बगाहे हड़काते रहते हैं और हमारे बेशर्म रीढ़विहीन नेता घिघियाते रहते हैं…

    चतुर्वेदी जी, दर-असल हममें "राष्ट्रवाद" की भावना है ही नहीं, कॉमनवेल्थ के नाम पर गुलामी की प्रथा हेतु अरबों की लूट मचाने वाले इस देश ने अभी तक अपनी सीमा की पूर्ण तारबन्दी तक नहीं की है और बांग्लादेशी-पाकिस्तानी नागरिक इस देश का उपयोग "धर्मशाला" के रुप में करते हैं… और आप अमेरिका और भारत की तुलना कर रहे हैं?

    खैर "राष्ट्रवाद" का मतलब आपको समझ आयेगा भी नहीं…

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  3. सुरेश जी से सहमत हूँ। ९/११ के हमले से सबक लेकर अमेरिका ने अपनी सुरक्षा इतनी मजबूत कर ली कि दोबारा कोई हमला नहीं हुआ। दूसरी तरफ भारत में न जाने कितने हमले हो चुके हैं, हर हमले के बाद वही रटे-रटाये डायलॉग सुनने को मिलते हैं कि ये आतंकवादियों की हताशा का परिणाम है, कायराना हरकत है, देशवासी का हौंसला इससे नहीं टूटेगा आदि।

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  4. यह एक आम मानसिकता है कि कोई भी व्यक्ती जितना सम्पन्न होता है उतना डरपोक होता जाता है। उदाहरण के लिए हमारे सांसदो , विधायको को ही लें। क्या पहले गनमैन होते थे और आज...!!:)

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  5. ऊँचा महल और राजा की सवारी याद आती है। यदि तामझाम न हो तो ओबामा को कोई गाँठेगा दुनिया में।
    राष्ट्रवाद पूरी वफादार अनुचर की भूमिका निभा रहा है मिस्टर ओबामा की इस यात्रा पर।

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