सोमवार, 8 नवंबर 2010

अरूण जेटली की अमरीकाभक्ति

        भाजपा नेता अरूण जेटली का आज के अखबारों में एक बड़ा ही अच्छा बयान छपा है। यह बयान इस संदर्भ में अच्छा है कि इसमें उन्होंने ईमानदारी के साथ अपनी बात कही है। उन्होंने कहा है भाजपा कभी अमेरिका विरोधी मुहिम का हिस्सा नहीं रही है। हमें जेटली की इस साफ़गोई की प्रशंसा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा भाजपा ने तो शीतयुद्ध के जमाने में भी अमेरिका का विरोध नहीं किया था।
     हम कहना चाहते हैं अरूण जेटली साहब यह तो संभव ही नहीं था। शीतयुद्ध का बड़ा निशाना मुसलमान थे और अमेरिका ने मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और घृणा में शीतयुद्ध में द्वितीय विश्वयुद्ध के यहूदीविरोधी घृणा के मानदण्डों का भी अतिक्रमण कर दिया था।  
     अमेरिका के मजबूत दबंग के नातेदार इस्राइल ने मध्यपूर्व में मुसलमानों पर जुल्म ढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और आपका दल भारत में उस दौर में मुस्लिम विरोधी भावनाएं राममंदिर के नाम पर भड़का रहा था। याद करें वैसी घृणा आजाद भारत में भारत विभाजन के बाद पहलीबार देखी गयी थी।  इस अर्थ में आपका दल भी शीतयुद्ध की अमेरिका की विशाल मुस्लिम विरोधी रणनीति का हिस्सा बना हुआ था।संभवतः ओबामा इस बात को जानते हैं।   
     उल्लेखनीय है मुंबई में राष्ट्रपति ओबामा ने 6 नबम्बर 2010 को ताजहोटल में 26/11 की घटना की स्मृति में इस हमले के संदर्भ में अपने भाषण में पाक का जिक्र नहीं किया था। इस पर भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूढ़ी ने ओबामा के बयान में पाक के जिक्र न होने पर तेज प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उसी संदर्भ में भाजपा के नीतिगत मत को स्पष्ट करते हुए जेटली ने कहा है कि हम कभी भी अमेरिका विरोधी नहीं रहे।
      अरूण जेटली की यह ईमानदार अमेरिकाभक्ति है। उन्होंने अपनी अमेरिकाभक्ति के रूपों का बखान करते हुए यह भी कहा एनडीए सरकार के शासन के समय में कई महत्वपूर्ण अमेरिकापरस्त रणनीतिक फैसले भी लिए गए। बेहतर तो यही होता कि अरूण जेटली उन फैसलों के बारे में स्वयं बताते। फिर भी एक-दो बातें तो हम भी जानते हैं कि भारत के द्वारा इस्राइल से अस्त्र-शस्त्र खरीदने के सबसे बड़े सौदे उसी दौर में किए गए। फिलीस्तीनियों से दूरी और इस्राइल से मित्रता उसी दौर में आरंभ हुई। एनडीए के दौर में ही अमेरिका की विदेशनीति की सेवा में भारत की विदेश नीति को लगा दिया गया था।
    अफगानिस्तान से लेकर इराक तक अमेरिकी दादागिरी की भाजपा ने उस दौरान और बाद में कभी आलोचना नहीं की। हम समझते हैं कि राष्ट्रपति बराक ओबामा अरूण जेटली की भावनाओं को समझेंगे और राजीव प्रताप रूढ़ी की आलोचना को गंभीरता से नहीं लेंगे। भाजपा पहले से ही अमेरिकाभक्त पार्टी है और वह आगे भी अपनी अमेरिका भक्ति को बरकरार रखेंगे। ऐसा सभी भारतवासी उम्मीद करते हैं।  
      


















1 टिप्पणी:

  1. ये केवल भाजपा की ही नहीं अधिकांश राजनितिक दलों कई यही स्थिति है ,
    मौके पर चौके मारना , और झूठ , लज्जा शर्म इमानदारी से तो इनका कोई लेना देना ही नहीं होता ,
    इसे तो भूल जाईये
    इस निष्पक्ष और सार्थक लेख के लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं
    सत्य कहने का माद्दा बहुत कम लोगों में होता है
    dabirnews.blogspot.com
    ajabgazab.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं