गुरुवार, 4 नवंबर 2010

बराक ओबामा से कुछ तो बोलो आदरणीय मोहन भागवत !

          भारत की यात्रा पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा आ रहे हैं,वे यहां क्यों आ रहे हे हैं,इस बात को आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत अच्छी तरह जानते हैं। यदि नहीं जानते तो उन्हें लालकृष्ण आडवाणी को बुलाकर पूछना चाहिए कि ओबामा भारत क्यों आ रहे हैं ? इसके बावजूद भी पता न चले तो आज के अखबारों में ओबामा का साक्षात्कार छपा है उसे पढ़कर समझ सकते हैं कि ओबामा के भारत आने का मकसद क्या है ?
     राष्ट्रपति ओबामा खुलेआम कह रहे हैं वे भारत को एशिया में रणनीतिक पार्टनर बनाने आ रहे हैं। अब मोहन भागवत आप ही सोचें कि अमेरिका और भारत में कैसी पार्टनरशिप ? वे एशिया में व्यापार करने लिए भारत को साझीदार बनाने नहीं आ रहे,वे एशिया में अमेरिका का रणनीतिक पार्टनर बनाने आ रहे हैं।
    यानी एशिया में अमेरिका की उस्तादी में भारत ताल ठोकेगा। इसको ही राजनीतिक भाषा में कहते हैं गुलामी। यह बड़ी मीठी गुलामी है।साफ-सुथरी गुलामी है। मोहन भागवतजी आप और आपका संगठन आरएसएस देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन आपने अभी तक भारत सरकार के ओबामा प्रेम और रणनीतिक पार्टनर बनाए जाने पर प्रतिवाद का एक वाक्य नहीं कहा है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आपकी देशभक्ति और राष्ट्रवाद सोई क्यों हैं ? आपकी भाषा में ही कहूँ ‘उत्तिष्ठ कौन्तेय।’
    आपको इस बात पर गुस्सा आया कि कांग्रेस संघ को आतंकी संगठन घोषित करने के लिए झूठा प्रचार कर रही है और आने वाले दिनों में उसके खिलाफ संघ परिवार प्रतिवाद करने जा रहा है। लेकिन ओबामा और उनका अमेरिकी प्रशासन खुलेआम आतंकियों और अलकायदा की मदद करता रहा है। आपको नहीं लगता कि आपको विश्व के सबसे बड़े आतंकी देश अमेरिका का प्रतिवाद करना चाहिए ?
     मैं जहां तक आपको और आपके संगठन को जानता हूँ उसकी देशभक्ति पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाया जा सकता। आपके संगठन का देश में सबसे विशाल नेटवर्क है। आपको दूसरों की तकलीफें देखकर कष्ट भी होता है। लेकिन मेरी अभी तक यह बात समझ में नहीं आई कि आपने अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं के द्वारा ढ़ाए जा रहे जुल्मोसितम पर कुछ भी नहीं कहा है।
     क्या हम पूछ सकते हैं कि आपकी आत्मा को अफगानिस्तान -इराक की निरीह जनता पर अमेरिकी सेनाओं के जुल्म देखकर कष्ट होता है या नहीं ? अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक की संप्रभुता  पर जिस तरह हमला किया है और इन दोनों देशों पर अवैध कब्जा किया है क्या उसके खिलाफ आवाज उठाने की आपकी कभी इच्छा नहीं करती ? क्या आपको कभी फिलीस्तीनियों के आंसू परेशान नहीं करते ?
       आप जानते हैं वामदलों ने यथाशक्ति ओबामा का प्रतिवाद करने का फैसला किया है। यदि आपका जैसा विशाल संगठन भी ओबामा का प्रतिवाद करता तो अच्छा होता। वैसे आप जानते हैं कि मुंबई बमकांड छब्बीस इलेवन के आतंकी  हिंसाचार में अमेरिकी जासूस भी सक्रिय थे उनमें से एक को उन्होंने बंद करके रखा हुआ है,वह बार-बार बता रहा है मुंबई के छब्बीस इलेवन के हमले की साजिश को आईएसआई ने अंजाम दिया था,कम से कम आप आईएसआई के खिलाफ अमेरिका सख्ती से पेश आए इस मांग को लेकर ओबामा के लिए सार्वजनिक बयान तो दे सकते हैं ?
       मोहन भागवतजी आप ओबामा के खिलाफ प्रतिवाद न भी करें। संभवतःआपको डर है कि आपके परिवार के संगठनों को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निगमों को द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद इससे प्रभावित हो जाएगी। इस मदद को अमेरिका स्थित आपके भक्त जुटाते रहे हैं। लेकिन आपको नहीं लगता कि आपको मिलने वाली मदद से ज्यादा कीमत अफगानिस्तान-इराक और फिलीस्तीन के करोड़ों लोगों की है। हमें विश्व मानवता की रक्षा के नाते कम से कम इन लोगों की रक्षा के लिए ओबामा के खिलाफ प्रतिवाद जरूर करना चाहिए। मैं जहां तक समझता हूँ कि भारत के हिन्दू अभी इतने संवेदनहीन नहीं हुए है कि पड़ोस में कोई जुल्म करता रहे और वे चुप रहें।
आदरणीय मोहन भागवत जी आप जानते हैं कि एक जमाने में अफगानिस्तान को अखंड भारत का हिस्सा कहते थे। कम से कम उसी नाते आप ओबामा से मांग करें कि वह अफगानिस्तान छोड़ दे। ईरान को सताना बंद कर दे। इराक से सेनाएं वापस बुला ले। इस्राइल से आपकी गहरी दोस्ती है उससे कहें कि वह फिलीस्तीनियों को उनका देश वापस कर दे।  यदि और कोई बात आपको कहनी हो तो वह भी कह सकते हैं । 
    लेकिन भोपाल की यूनियन कारबाइड त्रासदी के लिए जिम्मेदार एंडरसन को भारत को सौंपे जाने की मांग आपको जरूर करनी चाहिए। आप कम से कम भोपास त्रासदी के लोगों के दुख और प्रतिवाद में तो इस मोके पर शामिल हो सकते हैं। आप अपने राजनेताओं से कह सकते हैं कि वे ओबामा के भारत आगमन पर कम से कम भोपाल गैसकांड के प्रधान अपराधी एंडरसन को भारत को सौंपे जाने की मांग करें। ओबामा के आने पर आपकी चुप्पी भारत के लिए शुभलक्षण नहीं है। आपकी एक आवाज से भारत की जनता में बड़ा जागरण होता है। आप कम से कम देशभक्ति की खातिर राष्ट्रपति बराक ओबामा से कुछ तो बोलें। हमें इंतजार रहेगा।










4 टिप्‍पणियां:

  1. जगदीश्वर जी का लेख पढ़ कर एक बात स्पष्ट हो गयी की
    '' खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे ''
    चतुर(वेदी) जी जानते है की मुट्ठी भर वामपंथी चाह कर भी कुछ नही कर सकते और संघ की एक हुंकार पर भी सारे काम हो जाते है . हम स्वयंसेवक इन वामपंथी कैडरों से श्रेष्ठ है और हमारे संगठन की विशालता और निष्ठा इस का सबूत है.
    चीन जैसा दुष्ट देश भारत को खंडित करने का संकल्प लिये हुए है और ये वामपंथी उस देश के भक्त है . ये जानते है की चीन को उस की औकात पता चल जाएगी अगर भारत ,जापान , ताईवान और अमेरिका की चौकड़ी बन गयी तो पर ये बेचारे कुछ नही कर सकते है तो हम से मदद की गुहार लगा रहे है .
    अफगानिस्तान ईरान और पाकिस्तान ने खुद बर्बादी का रास्ता चुना है .जिस इस्लामिक हिंसा से वे काबिज हुए वही हिंसा उन्हें खाए जा रही है .अमेरिका से बहुत ज्यादा मौते सिया सुन्नी और अन्य मुस्लिम सम्प्रदायों के बीच दंगो से हो जाती है तो हम क्या कर सकते है ?
    अमेरिका ने ईट का जवाब पत्थर से दिया है और वक्त का तकाजा यही है की चीन का नष्ट होना बहुत जरुरी है .खुदा न करे चीन का गिराया गया कोई परमाणु बम चतुर(वेदी) जी के घर पर गिरे .
    अतः जो भी चीन का दुश्मन है वो हमारा स्वाभाविक दोस्त है

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  3. मोहन भागवत4 नवंबर 2010 को 4:41 pm

    यार!
    मेरी नौकरी छुड़वाने पर क्यों तुले हो?

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  4. चलो! इस बहाने मोहन भागवत जी को याद तो किया। दीपावली की शुभकामनाएं॥

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