शनिवार, 13 नवंबर 2010

गजानन माधव मुक्तिबोध के जन्मदिन पर विशेष- दिल्लीवासी हिन्दी लेखक

                 (मुक्तिबोध-जन्म 13नवम्बर1917-मृत्यु 11सितम्बर 1964)
 आज मुक्तिबोध का जन्मदिन है। इस मौके पर उनके बहाने हम बहुत कुछ नया सीख और समझ सकते हैं। पहली बात यह कि हिन्दी में साहित्यकारों की जो दशा है और खासकर दिल्ली केन्द्रित बड़े लेखकों की जो दशा है उस पर मुक्तिबोध की 54 साल की गई टिप्पणी एकदम सटीक बैठती है , उन्होंने लिखा है- "आज दिल्ली में बूढ़े पके बाल साहित्यिकों का जमघट हो गया। उनको स्वर्गवास नहीं दिल्लीवास हुआ। अर्थात् उनकी प्रतिभा की मृत्यु हो गयी और उन्होंने लिखना-पढ़ना छोड़ दिया। अब वे प्रतिष्ठा और सम्मान के स्वर्ग में हैं,और उस स्वर्ग में वे अधिक से अधिक आदर-श्रद्धा और पद के लिए राजनीति करते हैं,सूत्र हिलाते हैं,किन्तु सूत्रधार होने पहले वस्तुतः,वे विदूषक हो जाते हैं।"-

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