सोमवार, 18 जुलाई 2016

मुझे भारत चाहिए-

          कश्मीर में तनाव इसलिए है क्योकि हम सबकी कश्मीर को लेकर समझ साफ नहीं है,पूरे देश में हिन्दू-मुसलमान संबंधों को लेकर तनाव इसलिए है क्योंकि हमारे देश में एक बहुत बड़ा अंश है जिसकी हिन्दू-मुसलमानो के संबंधों को लेकर सही और साफ समझ नहीं है।

मुसलमान भी भारतीय हैं,कश्मीरी भी भारतीय हैं,हम इस सामान्य किंतु बहुत महत्वपूर्ण बात को समझने से कन्नी क्यो काट रहे हैं ?मुसलमानो को कष्ट मिले या हिन्दुओं को कष्ट मिले,अंततःयह भारतीय समाज का कष्ट है।

हमने गलत किस्म का सामाजिक विभाजन मन में बिठा लिया है।हम भारतीय को भूल गए और अपने -अपने धर्म की पहचान में व्यस्त कर दिए गए हैं।आरएसएस और मुस्लिम तत्ववादी संगठन अपने-अपने तरीके से यह काम खुलकर कर रहे हैं और हम सब उनकी इन हरकतों की उपेक्षा करते रहे हैं,आज स्थिति यह है कि ये दोनों ही किस्म के संगठन आम जनता और मीडिया में हिन्दू-मुसलमान के जहर को सतह पर ले आए हैं।हम भारतीय समाज की बातें नहीं कर रहे हिन्दू समाज,मुस्लिम समाज आदि कोटियों में बांटकर बातें कर रहे हैं,एक-दूसरे को जलील करके तीसमार खाँ बनने की कोशिश करके अंततःदेश को बांट रहे हैं।

आज जो कश्मीर में सुलगता अंगारा दिखाई दे रहा है,वह कभी भी पूरे देश में सुलगता नजर आ सकता है।इसका प्रधान कारण है हमारे प्रमुख राजनीतिकदलों ने गंभीरता के साथ देश को धर्म के आधार पर हमारे दिलों में बांट दिया है।दिलचस्प बात यह है ये सभी दल खासकर कांग्रेस,भाजपा,आरएसएस आदि ऊपर से सद्भाव का नाटक करते रहे हैं लेकिन वैचारिक प्रचार में हिन्दू-मुसलमान की कोटियों में बांटकर अपने नजरिए को परोसते रहे हैं।कांग्रेस ने यह काम बारीकी से किया है,धर्मनिरपेक्षता की आड़ में किया है,आरएसएस के लोग बिना किसी आड़ के सीधे कर रहे हैं।एक कमरे में नंगा घूम रहा है,दूसरा सड़कों पर नंगा घूम रहा है,लेकिन हैं दोनों नंगे।इन दोनों के इस विभाजनकारी खेल से बचने की जरूरत है।

भारतवासी होने के नाते हमें धार्मिक पहचान के आधार पर सोचने से बचना चाहिए।धार्मिक पहचान के आधार पर सोचना अंततःभारत को सामाजिक तौर पर विभाजित करता है।



इस समय सारा मीडिया ,पुलिस, सरकारी तंत्र और सोशलमीडिया का बड़ा हिस्सा धार्मिक पहचान के आधार पर ही सोच रहा है और यह खतरनाक स्थिति है इससे बचने की जरूरत है।इन दिनों हिन्दू-मुसलमानों के भेद बताने पर जोर दिया जा रहा है,जबकि होना यह चाहिए कि हम समानताएं खोजें।हिन्दू-मुसलमानों के प्रति उन्मादी भाषण देने,बयान देने.फेसबुक पोस्ट लिखने से बचें।हमें भारत को बचाना है,हम यह हिन्दू-मुसलमान बचाने के नाम पर चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से बाहर निकलकर सोचें,मनुष्य को पहचान का आधार बनाएं,मनुष्य के रूप में भारतवासियों के साझा सुख-दुख रेखांकित करें।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति नेल्सन मंडेला और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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