शनिवार, 12 जून 2010

तिथि खबर नहीं होती दीपक चौरसिया



(शनि वलय का अंतरिक्ष यान से प्राप्त चित्र )        
   स्टार न्यूज चैनल जिस मीडिया ग्रुप का हिस्सा है वह बहुराष्ट्रीय मीडिया घराना है रूपक मडरॉक का। मडरॉक के घराने का सारी दुनिया में कंजरवेटिव विचारधारा के प्रचार-प्रसार का शानदार रिकार्ड रहा है। इस घराने की मीडिया नीति का लक्ष्य है प्रतिगामी विचारधारा और नव्य-उदार आर्थिक उदारीकरण का प्रचार करना। सारी दुनिया में प्रगतिशील विचारधारा और वैज्ञानिक चिन्तन के विरोध में मडरॉक घराना अग्रिम कतारों में रहा है। सारी दुनिया में मीडिया के प्रतिगामी फ्लो ( बाजारू मनोरंजन और घटिया समाचार के संदर्भ में) को बनाए रखने और समाचार मूल्य को नष्ट करने में मडरॉक घराने के न्यूज कारपोरेशन की केन्द्रीय भूमिका रही है। इस विचारधारा के साथ भारत के स्टार ग्रुप के चैनलों का याराना है।
 (तूफान के बाद शनि का दृश्य)     
    भारत में स्टार न्यूज ग्रुप विचारधारा क्या है यह बात स्टार न्यूज चैनल के शनि अमावास्या जैसे कार्यक्रम के प्राइम टाइम प्रसारण से समझ में आ जाती है। स्टार चैनल के संवाददाताओं और समाचार संपादक का मीडिया संबंधी बोध इतना खराब है कि उसने समाचार और गैर-समाचार का अंतर ही खत्म कर दिया है। समाचार और मूल्यवान समाचार का फ़र्क ही खत्म कर दिया है।
    शनि अमावास्या वाले कार्यक्रम में जो कैप्सन टीवी पर पट्टियों पर दर्शाए गए थे वे स्वयं में इस बात का प्रमाण है कि स्टार वालों की विचारधारा क्या है ?नमूना देखें - ‘चार साल बाद बना है शनि अमावास्या का संयोग’, ‘शनिवार को अमावास्या पड़े तो इसका विशेष महत्व है’, ‘सौरमंडल का सबसे खूबसूरत ग्रह है शनि’, ‘अब 2013 में बनेगा ऐसा संयोग’ आदि। ये कैप्सन इस बात का प्रमाण हैं कि स्टार न्यूज की समाचार मूल्य को लेकर कितनी घटिया समझ है।
 (अंतरिक्ष यान के द्वारा भेजा गया शनि ग्रह का चित्र)   
     तिथि अथवा दिन को कभी खबर नहीं बनाया जा सकता। यदि ऐसा ही करना है तो स्टारन्यूज को अपने को समाचार चैनल की बजाय धार्मिक चैनल में तब्दील कर लेना चाहिए। सवाल यह है कि तिथियां क्या होती हैं ? क्या उन्हें कहीं देख सकते हैं ? जरा स्टार न्यूज वाले बताएं तिथि कहां होती है ? क्या उसे आकाश में देख सकते हैं ? तिथियों को देख नहीं सकते,जिसे देखा नहीं जा सकता वह विज्ञान नहीं हो सकता, तिथि पण्डित के पंचांग में है। भारतीय ज्योतिषशास्त्री इस बेबकूफी पर बहुत पहले पिट चुके हैं।
     
(शनि ग्रह ऐसा है)
     स्टार न्यूज का शनि अमावास्या पर कार्यक्रम इस बात का भी संकेत है कि चैनल की रेटिंग गिर रही है। स्टार की भाषा में उनका शनि खराब चल रहा है। चैनल के लिए दर्शक जुगाड़ करने के लिए मीडिया वाले भविष्यफल भी बताते हैं।
    स्टार न्यूज की शनि चर्चा का लक्ष्य शनि ग्रह के बारे में किसी सूचना और ज्ञान का प्रसार करना  नहीं था बल्कि शनिभक्तों को आकर्षित करना प्रधान लक्ष्य था। दूसरी बात यह कि शनि के बारे में ज्योतिषियों के बयानों को जिस तरह दिखाया गया उससे यह भी आभास मिलता है कि ज्ञान-विज्ञान और पोंगापंथ में कोई अंतर नहीं है। स्टार वाले पोंगापंडितों से जिस तरह बातें कर रहे थे और पोंगापंडित जिस तरह वैज्ञानिकों और तर्कशास्त्रियों पर हमले कर रहे थे और अपमानजनक भाषा बोल रहे थे वह स्टार न्यूज चैनल की आंतरिक संपादकीय अराजकता और पक्षधरता का नमूना है। एंकर दीपक चौरसिया ने पोंगापंडितों को वैज्ञानिकों पर व्यक्तिगत आक्षेप करने दिए,कायदे से उसे पोंगापंडितों को रोकना चाहिए था।
          स्टार न्यूज पर बैठे पोंगापंडितों ने शनि के बारे में बातें करते हुए कुतर्क की सभी हदें तोड़ दीं। महिला ज्योतिषियों का हाल तो बेहद बुरा था। ज्योतिषी जो बोल रहे थे वे यह मानकर बोल रहे थे कि वे तर्कपूर्ण बातें कह रहे हैं,दरअसल सभी पोंगापंडित ज्योतिषी थे और शास्त्र के नाम पर गप्प हांक रहे थे।  वे भूल ही गए कि मुँह से निकला प्रत्येक वाक्य तर्क नहीं होता। चैनल में बोली गयी प्रत्येक बात सच नहीं होती। वे जिस भाषा को बोल रहे थे वह भाषा भी ज्योतिषशास्त्र की भाषा नहीं थी, ऊपर से तुर्रा यह कि प्रत्येक ज्योतिषी तर्क दे रहा था कि हम सरल भाषा में ज्योतिष को बता रहे हैं। वे नहीं जानते कि भारत में शनि पर किसने ,कब और क्या काम किया ?
     ज्योतिष में उसकी विशेष भाषा का भी महत्व है। ज्योतिष के पक्ष में पोंगापंडितों ने सबसे भद्दा तर्क यह दिया कि न्यूटन ने ज्योतिष की सत्ता को माना था। अतःकार्यक्रम में आए वैज्ञानिकों को ज्योतिष का विरोध करने का कोई हक नहीं है। एक ज्योतिषी तो असभ्यता की हदें लांघते हुए कहने लगा क्या आप न्यूटन से बड़े वैज्ञानिक हैं, न्यूटन ने मान लिया है तो तुम भी मान लो।  
    ये पोंगापंडित नहीं जानते कि किस तरह के तर्क भारत के ज्योतिषियों ने फलित ज्योतिषियों और पोंगापंडितों के बारे में दिए हैं। यहां सिर्फ ज्योतिषशास्त्र के प्रसिद्ध सिद्धान्तशास्त्री भास्कराचार्य का मत दे रहा हूँ।भास्कराचार्य ने लिखा- ‘‘नक्षत्रसूचिनं दृष्टवा सचेनंस्नानमाचरेत्। दशदिन कृत पापं हन्त सिद्धान्तवेत्ताः।’’ यानी नक्षत्रसूची ज्योतिषी को देखते ही पाप लगता है और उसे देखते ही तत्काल स्नान करना चाहिए। दूसरी ओर सिद्धांतवेत्ता यानी गणितज्ञ को देखकर 10 दिन तक के किए पाप नष्ट हो जाते हैं।
    हम उम्मीद करते हैं कि स्टार न्यूज वाले पापी पोंगापंडितों से अपने को दूर रखेंगे।







3 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मेरा बचपन- माँ के दुख और हम

         माँ के सुख से ज्यादा मूल्यवान हैं माँ के दुख।मैंने अपनी आँखों से उन दुखों को देखा है,दुखों में उसे तिल-तिलकर गलते हुए देखा है।वे क...