सोमवार, 28 जून 2010

सीएनएन- आईबीएन 7 और टोरंटो के सत्य का विकृतिकरण

   ‘सीएनएन -आईबीएन 7’ चैनल के समाचारों का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस चैनल की खबरों में असत्य के प्रयोग बढ़ गए हैं। जनता के हितों के लिए संघर्ष करने वालों को तरह-तरह से कलंकित किया जा रहा है। इस कड़ी में नया मामला टोरंटो से जी-20 देशों की बैठक के मौके पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की खबर से जुड़ा है।
    चैनल ने जी-20 देशों की बैठक के मौके पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को ‘उत्पात’ की संज्ञा दी। लगता है किसी कमअक्ल के संवाददाता ने यह खबर लिखी है। उसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन और उत्पात में भाषिक अंतर और अर्थ का ज्ञान नहीं है। शांतिपूर्ण प्रदर्शकारियों को ‘हिंसा पर उतारू’ कहा। आरंभ में लिखा ‘दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह जी-20 की शिखर बैठक की मेजबानी कर रहे कनाडा के सबसे बड़े शहर एवं देश की वित्तीय राजधानी टोरंटो में हजारों प्रदर्शनकारी हिंसा पर उतारू हो गए।’प्रदर्शनकारियों को चैनल ने ‘उपद्रवी’ कहा। (विस्तार से इस चैनल की बेवसाइट पर जाकर देखें)  
 (शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी को पीटते पुलिस वाले)    
     इस खबर के प्रसंग में पहली बात यह कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। दूसरी बात यह कि प्रदर्शन की खबर को तोड़मरोड़ करके पेश किया गया है।
   इस प्रदर्शन में क्या हुआ इसके बारे में समग्रता में सूचनाएं देने की आईबीएन 7 ने जरूरत ही महसूस नहीं की। तथ्य यह हैं कि सम्मेलन स्थल पर किसी भी प्रदर्शन को कना़डा सरकार ने रोकने के आदेश पहले से ही दिए हुए थे।

(तोड़फोड़ करते पुलिस वाले)
      दूसरी महत्वपूर्ण सूचना यह कि पुलिस ने बड़ी निर्ममता के पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया। पत्रकार आग नहीं लगा रहे थे। वे समाचार संकलन कर रहे थे,लेकिन कनाडा पुलिस नहीं चाहती थी कि पुलिस की बर्बरता को कैमरों में कैद किया जाए।
     प्रेस फोटोग्राफरों की पीठ में प्लास्टिक गोलियां मारी गयीं और अनेक पत्रकार जख्मी भी हुए हैं। टोरेंटो के अखबार पुलिस के प्रेस फोटोग्राफरों पर किए गए हमलों की खबरों से भरे पड़े हैं लेकिन आईबीएन7 के संवाददाता को यह सब नजर नहीं आया। यह सब लोग जानते हैं कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ अराजकतावादी भी थे और जो कुछ तोड़फोड़ हुई उसमें इनका और कनाडा पुलिस के सादा कपड़ों में मौजूद पुलिस वालों का हाथ था।जिससे प्रदर्शनकारियों को बदनाम किया जा सके।   
    यहां हम कॉमन ड्रीम डॉट कॉम  में छपी रिपोर्ट का एक अंश उद्धृत करना चाहेंगे।
लिखा है-
 In a remarkable series of Tweets early Sunday morning, journalist Steve Paikin of public broadcaster TV Ontario said he witnessed "police brutality" against a reporter and the arrests of peaceful demonstrators.
"I saw police brutality tonight. It was unnecessary. They asked me to leave the site or they would arrest me. I told them I was doing my job," he Tweeted.
"As I was escorted away from the demonstration, I saw two officers hold a journalist. The journalist identified himself as working for 'the Guardian.' He talked too much and pissed the police off. Two officers held him a third punched him in the stomach. Totally unnecessary. The man collapsed. Then the third officer drove his elbow into the man's back. No cameras recorded the assault. And it was an assault."
Paikin had been at a demonstration in Toronto's Esplanade neighborhood, a densely-populated area near the waterfront. He said police moved in on a crowd of peaceful, "middle class" protesters and began arresting them.
"Police on one side screamed at the crowd to leave one way. Then police on the other side said leave the other way. There was no way out," he Tweeted. "So the police just started arresting people. I stress, this was a peaceful, middle class, diverse crowd. No anarchists. Literally more than 100 officers with guns pointing at the crowd. Rubber bullets and smoke bombs ready to be fired. Rubber bullets fired."
Paikin, a respected journalist who has hosted national election debates in Canada, said he was "escorted" away by police before he could see how many people were arrested, "but it must have been dozens."
"I have lived in Toronto for 32 years. Have never seen a day like this. Shame on the vandals and shame on those that ordered peaceful protesters attacked and arrested."
Earlier in the day, police told media that a small group of "Black bloc" demonstrators broke off from a protest of 10,000 people and began smashing storefront windows along the city's trendy Queen Street.
The CBC News Network reported that protesters smashed in the windows of an American Apparel outlet, pulled out the mannequins and spread feces on the floor. The storefronts of McDonald's and Starbucks locations were also damaged, as were numerous bank branches.
Police shut down all public transit in the city center, including subway and streetcar lines. They also shut down a large downtown shopping complex after reports of looting. AFP reported that some 200 people were trapped inside, unable to leave after the mall was put into lockdown.

"When the G20 protest began turning violent Saturday, police abandoned some of their police cars,"  "This one was briefly occupied on Queen Street."
एक अन्य बेवसाइट ने लिखा है कि प्रदर्शनकारियों में से जिन लोगों ने उपद्रव मचाया वे सादा बर्दी में पुलिसवाले ही थे। ‘ग्लोबल रिसर्च डॉट कॉम’ ने लिखा है-
Toronto is right now in the midst of a massive government / media propaganda fraud. As events unfold, it is becoming increasingly clear that the 'Black Bloc' are undercover police operatives engaged in purposeful provocations to eclipse and invalidate legitimate G20 citizen protest by starting a riot. Government agents have been caught doing this before in Canada.
 Montebello 2007 Riot Prevented - Identical Boots Exposed Undercover Police Provocateurs
 At the ‘Security and Prosperity Partnership’ meeting protests at Montebello Quebec on August 20, 2007, a Quebec union leader caught and outed three masked undercover Quebec Provincial Police operatives dressed as ‘black bloc’ protestors about to start a riot by throwing rocks at the security police. See the following videos documenting this event.
इस सिलसिले में ‘ग्लोबल रिसर्च डॉट कॉम’ ने 2007 और 2010 के पुलिसवालों के जूतों के फोटोग्राफ दिए हैं जिन्हें हम यहां पर दे रहे हैं। इससे आईबीएन 7 के इस झूठ का खंडन होता है कि उपद्रव करने वाले प्रदर्शनकारी थे। विस्तार से ये तथ्य ‘ग्लोबल रिसर्च डॉट कॉम’ पर देखे जा सकते हैं।

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